जरुरी जानकारी | बीमा नियामक ने ड्रोन के उपयोग को लेकर बीमा उत्पादों के बारे में सुझाव देने के लिये समिति गठित की
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नयी दिल्ली, 25 जून भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (इरडा) ने ड्रोन के उपयोग में शामिल विभिन्न जोखिमों को कवर करने वाले बीमा उत्पादों का सुझाव देने के लिये एक कार्य समूह का गठन किया है।
बीमा क्षेत्र के नियामक ने एक परिपत्र में कहा कि ड्रोन सबसे तेजी से बढ़ती प्रौद्योगिकी के रूप में उभर रहे हैं और इसका उपयोग विभिन्न उद्देश्यों के लिये किया जा रहा है।
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नियामक ने यह भी कहा गया है कि ड्रोन कोविड-19 के कारण उत्पन्न मौजूदा स्थिति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं और कई गतिविधियों में विभिन्न प्राधिकरणों की सहायता कर रहे हैं।
इरडा ने कार्य समूह का गठन करते हुए कहा, ‘‘ड्रोन के उपयोग में शामिल विभिन्न जोखिमों को कवर करने वाले उपयुक्त बीमा उत्पाद उपलब्ध कराने की तत्काल आवश्यकता है।’’
दी न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी के महाप्रबंधक अंजन देव की अध्यक्षता में गठित नौ सदस्यीय समिति को दूरस्थ पायलट एयरक्राफ्ट सिस्टम (आरपीएएस) के मालिकों व ऑपरेटरों की बीमा जरूरतों का अध्ययन करने और उन्हें समझने के लिए कहा गया है।
इरडा ने समूह को आरपीएएस मालिकों और ऑपरेटरों की जरूरतों को पूरा करने के लिये उत्पाद के डिजाइन व विकास से संबंधित सिफारिशें देने का काम सौंपा है, जिसमें तृतीय पक्ष देनदारी भी शामिल है।
समूह ऐसे जोखिमों के पुनर्लेखन से संबंधित सिफारिशें भी करेगा, जिनमें पुन: बीमा परिप्रेक्ष्य और विषय से संबंधित किसी अन्य प्रासंगिक मामले की जांच शामिल है।
कार्य समूह को छह सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट देने को कहा गया है।
नागर विमानन मंत्रालय ने इस महीने की शुरुआत में देश में ड्रोन बनाने और इनका उपयोग करने के लिये मसौदा नियम जारी किये थे। इसमें प्रस्ताव दिया गया था कि एक अधिकृत निर्माता या आयातक अपने उपकरणों को केवल वैसे व्यक्ति या इकाई को बेच सकते हैं, जो विमानन नियामक डीजीसीए द्वारा अनुमोदित हैं।
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