विदेश की खबरें | भारतीय मूल के मंत्रियों से जुड़ी फर्जी खबर पर विपक्षी नेता और अन्य को ‘भूल सुधार’ का निर्देश

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on world at LatestLY हिन्दी. सिंगापुर की सरकार ने रविवार को विपक्षी दल के एक नेता और एक वेबसाइट (जोम) को उन लेखों और सोशल मीडिया पोस्ट के जरिये दी गई फर्जी खबरों को लेकर कानून के तहत ‘भूल सुधार’ करने को कहा है जिनमें ‘रिडआउट रोड’ प्रकरण और सत्तारूढ़ दल के भारतीय मूल के मंत्रियों द्वारा सरकारी बंगले को किराए पर दिये जाने को लेकर गलत बयान दिए गए हैं।

श्रीलंका के प्रधानमंत्री दिनेश गुणवर्धने

सिंगापुर, 16 जुलाई सिंगापुर की सरकार ने रविवार को विपक्षी दल के एक नेता और एक वेबसाइट (जोम) को उन लेखों और सोशल मीडिया पोस्ट के जरिये दी गई फर्जी खबरों को लेकर कानून के तहत ‘भूल सुधार’ करने को कहा है जिनमें ‘रिडआउट रोड’ प्रकरण और सत्तारूढ़ दल के भारतीय मूल के मंत्रियों द्वारा सरकारी बंगले को किराए पर दिये जाने को लेकर गलत बयान दिए गए हैं।

‘द स्ट्रेट्स टाइम्स ऑनलाइन’ की रिपोर्ट के अनुसार, कानून मंत्रालय ने कहा कि दूसरे कानून मंत्री एडविन टोंग ने रिफॉर्म पार्टी के नेता केनेथ जयरत्नम और फेसबुक उपयोगकर्ता थमिल सेलवन (दोनों भारतीय मूल के हैं) को निर्देश जारी किए हैं।

आदेश जयरत्नम द्वारा प्रकाशित एक लेख के संबंध में हैं जिसका शीर्षक है ‘क्या एसएलए बयान जारी कर उन अफवाहों का खंडन करेगा उसने षणमुगम के बेटे की कंपनी को कोई अनुबंध दिया है?’। इस लेख को दो जुलाई को उनकी वेबसाइट ‘द राइसबॉउल सिंगापुर’ पर प्रकाशित किया गया है। इसके साथ ही एक जुलाई को इसे थामिल ने फेसबुक अकाउंट पर पोस्ट किया था।

लेख और पोस्ट में उन्होंने ‘‘झूठ कहा था कि सिंगापुर भूमि प्राधिकरण (एसएलए) ने 26 रिडआउट रोड या/और 31 रिडआउट रोड के नवीनीकरण का ठेका गृह की आंतरिक साजसज्जा करने वाली कंपनी लिवस्पेस को दिया था।’’ मीडिया की पुरानी खबरों के अनुसार ये सरकारी बंगले कई वर्षों से खाली थे।

उन्होंने यह भी दावा किया था कि ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि लिवस्पेस के मुख्य कार्यकारी अधिकारी गृह मामलों और कानून मंत्री के षणमुगम के बेटे हैं।

आरोप लगाया गया कि रिडआउट रोड में औपनिवेशिक युग के दो बंगले षणमुगम और विदेश मंत्री विवियन बालाकृष्णन द्वारा किराए पर दिये जा रहे हैं।

बयान में कानून मंत्रालय ने कहा कि लिवस्पेस और षणमुगम के बेटे को एसएलए द्वारा 26 रिडआउट रोड या/और 31 रिडआउट रोड के लिए काम करने के लिए नियुक्त नहीं किया गया था, जैसा कि तीन जुलाई को एक संसदीय बैठक के दौरान टोंग ने कहा था। संसद ने इस बात पर बहस की थी कि बंगलों को कैसे दो मंत्रियों द्वारा किराए पर दिया गया था।

भ्रष्ट आचरण जांच ब्यूरो (सीपीआईबी) को जांच में षणमुगम और डॉ. बालाकृष्णन द्वारा रिडआउट रोड की संपत्तियों को किराये पर देने में भ्रष्टाचार या आपराधिक कृत्य का कोई सबूत नहीं मिला।

कानून मंत्रालय और संचार एवं सूचना मंत्रालय ने रविवार को एक संयुक्त बयान में कहा कि टोंग ने ऑनलाइन प्रकाशन जोम के लिए एक ‘भूल सुधार’ निर्देश जारी किया है।

इसके तहत जोम को ‘भूल सुधार’ नोटिस प्रकाशित करना पड़ेगा जिसमें कहा जाएगा कि लेख में तथ्यात्मक रूप से गलत बयान दिये गये हैं और इसके साथ ही अपनी वेबसाइट के कई पोस्ट और सोशल मीडिया के कई पेज पर तथ्यात्मक लेख का लिंक उपलब्ध कराना होगा।

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