जरुरी जानकारी | अगले कुछ महीनों में मुद्रास्फीति ऊंची रहेगी, सरकारी नीतियां इसे और बढ़ने से रोकेंगी: एसएंडपी

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नयी दिल्ली, पांच सितंबर एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स के अर्थशास्त्री (एशिया प्रशांत) विश्रुत राणा ने मंगलवार को कहा कि भारत में निकट भविष्य में मुद्रास्फीति ऊंची रहने की आशंका है, लेकिन सरकारी नीतियां इसे और बढ़ने से रोकेंगी।

विशिष्ट खाद्य वस्तुओं के दाम बढ़ने से उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित खुदरा मुद्रास्फीति जुलाई में 15 महीने के उच्चस्तर 7.44 प्रतिशत पर पहुंच गई थी।

‘मंथली एशिया-पैसिफिक क्रेडिट फोकस' वेबिनार में राणा ने कहा कि भारत में मानसून बहुत कमजोर रहा और बारिश सामान्य से करीब 11 प्रतिशत कम दर्ज की गई।

उन्होंने कहा, ‘‘ यह एक बड़ी चिंता का विषय है क्योंकि यह अगले कुछ महीनों में भारत में अनाज की कीमतों को प्रभावित कर सकता है।’’

त्योहारी सीजन से पहले स्थानीय बाजार में पर्याप्त भंडार उपलब्ध कराने के लिए सरकार ने पहले ही चावल के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया है और प्याज पर 40 प्रतिशत निर्यात शुल्क लगाया है।

राणा ने कहा, ‘‘ आपूर्ति बहुत मजबूत बनी हुई है और सरकार जिंस, गेहूं और चावल की कीमतों में वृद्धि को रोकने के लिए कदम उठा सकती है। इससे खाद्य मुद्रास्फीति को थोड़ा कम रखने में मदद मिलेगी।’’

टमाटर की कीमतें जो जुलाई में आसमान छू गई थीं, अगस्त के अंत में कम होनी शुरू हो गईं।

राणा ने कहा कि सब्जियों की बढ़ती कीमतें भी अब कम हो रही हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘ कुल मिलाकर भारत के लिए मुद्रास्फीति का माहौल ऊर्जा की कीमतों पर निर्भर करेगा। खाद्य कीमतें ऊंची रहेंगी लेकिन सार्वजनिक नीतियों के कारण इनके अधिक बढ़ने की आशंका नहीं है। हमें उम्मीद है कि अगले कुछ महीनों में भारत के लिए समग्र मुद्रास्फीति ऊंची बनी रहेगी लेकिन यह इससे अधिक नहीं बढ़ेगी।’’

वित्त मंत्रालय ने पिछले महीने अपनी मासिक रिपोर्ट में कहा था कि खाद्य पदार्थों पर कीमत का दबाव अस्थायी रहने की उम्मीद है, लेकिन सरकार तथा भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) को बढ़े हुए मुद्रास्फीति दबाव से निपटने के लिए सतर्कता बढ़ाने की जरूरत है।

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