जरुरी जानकारी | भारत का प्रति व्यक्ति कोयला उत्सर्जन सात साल में 29 प्रतिशत बढ़ाः रिपोर्ट

नयी दिल्ली, पांच सितंबर भारत में प्रति व्यक्ति कोयला उत्सर्जन वर्ष 2015 की तुलना में 2022 में 29 प्रतिशत बढ़ गया जबकि इस अवधि में जी20 देशों का प्रति व्यक्ति कोयला उत्सर्जन करीब नौ प्रतिशत बढ़ा। एक विश्लेषण रिपोर्ट में यह आकलन पेश किया गया है।

वैश्विक ऊर्जा शोध संस्थान ‘एम्बर’ की वार्षिक रिपोर्ट कहती है कि जी20 देशों की तुलना में भारत में प्रति व्यक्ति कोयला उत्सर्जन 2015-2022 के दौरान अधिक तेजी से बढ़ा है। रिपोर्ट के मुताबिक, जी20 समूह के 20 में से 12 देशों में प्रति व्यक्ति कोयला उत्सर्जन में गिरावट का रुख रहा है।

स्वच्छ ऊर्जा की तरफ बदलाव पर केंद्रित यह रिपोर्ट कहती है कि 2015 में जी20 देशों का प्रति व्यक्ति कार्बन डाई-ऑक्साइड उत्सर्जन 1.5 टन था जो 2022 में करीब नौ प्रतिशत बढ़कर 1.6 टन हो गया। इसकी तुलना में भारत का प्रति व्यक्ति कोयला उत्सर्जन सात वर्षों में 29 प्रतिशत बढ़ गया।

जी20 समूह वैश्विक स्तर पर कार्बन डाई-ऑक्साइड के उत्सर्जन में करीब 80 प्रतिशत भागीदारी रखते हैं। इस वजह से कोयला-जनित प्रदूषण पर काबू पाने में इन देशों की भूमिका सबसे अहम है।

एम्बर के वैश्विक अंतर्दृष्टि प्रमुख डेव जोन्स ने कहा कि आम धारणा के उलट भारत और चीन के बजाय प्रति व्यक्ति कोयला उत्सर्जन में दक्षिण कोरिया और ऑस्ट्रेलिया का प्रदर्शन कहीं अधिक खराब है। वैश्विक स्तर की तुलना में ये दोनों देश कोयला से होने वाले प्रदूषण में आगे खड़े हैं।

जोन्स ने कहा, ‘‘परिपक्व अर्थव्यवस्थाओं के तौर पर इन देशों को नवीकरणीय बिजली का उत्पादन बढ़ाने और वर्ष 2030 तक कोयले का इस्तेमाल चरणबद्ध ढंग से खत्म करने के बारे में कदम उठाना चाहिए।’’

रिपोर्ट के मुताबिक, समीक्षाधीन अवधि में ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया के बाद चीन में प्रति व्यक्ति कोयला-जनित उत्सर्जन 30 प्रतिशत की दर से बढ़ा।

एम्बर के एशिया कार्यक्रम प्रमुख आदित्य लोला ने कहा कि जी20 सम्मेलन का मेजबान देश होने के नाते भारत के पास यह अवसर होगा कि वह समूह के भीतर जलवायु मुद्दे पर नेतृत्व करे और कोयला-जनित उत्सर्जन में कटौती के लिए सदस्य देशों को जवाबदेह बनाने की कोशिश करे।

उन्होंने कहा, ‘‘वर्ष 2030 तक नवीकरणीय ऊर्जा को तिगुना करने के लक्ष्य के अनुरूप भारत नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने में लगा हुआ है। अगर भारत इस लक्ष्य को समर्थन देता है तो न सिर्फ जी20 हरकत में आने के लिए मजबूर होगा बल्कि विकसित देश भी प्रति व्यक्ति उत्सर्जन को घटाएंगे।’’

प्रेम

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