देश की खबरें | भारतीय वैज्ञानिकों ने गंभीर स्क्रब टाइफस के लिए बेहतर उपचार पद्धति की पहचान की

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नयी दिल्ली, छह मार्च भारतीय वैज्ञानिकों के एक दल ने हर साल हजारों लोगों की जान लेने वाले जीवाणुजनित गंभीर संक्रमण स्क्रब टाइफस के लिए उल्लेखनीय रूप से अधिक प्रभावशाली उपचार की पहचान की है।

‘न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन’ (एनईजेएम) में प्रकाशित अध्ययन में बताया गया है कि नसों में दी जानी वाली (अंत: शिरा) एंटीबायोटिक डॉक्सीसाइक्लिन और एजिथ्रोमाइसिन का मिश्रण रोगी के लिए कोई एक दवा देने की मौजूदा पद्धति से अधिक प्रभावशाली है।

‘इंट्रावीनस ट्रीटमेंट फॉर स्क्रब टाइफस’ के क्लीनिकल परीक्षण के आंकड़ों का इस्तेमाल कर कई भारतीय संस्थानों के अनुसंधानकर्ताओं ने गंभीर स्क्रब टाइफस के रोगियों में सात-दिवसीय तीन अंतःशिरा एंटीबायोटिक उपचार पद्धतियों (डॉक्सीसाइक्लिन, एजिथ्रोमाइसिन या दोनों का मिश्रण) के प्रभाव और उनके सुरक्षित होने के संबंध में तुलनात्मक अध्ययन किया।

उन्होंने पाया कि दवाओं का मिश्रण देने की पद्धति केवल एक दवा देने से अधिक लाभकारी है। जिन मरीजों को दोनों दवाएं दी गईं, उनमें संक्रमण के सात दिन पर अपेक्षाकृत कम जटिलताएं देखी गईं।

तमिलनाडु के वेल्लोर स्थित क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज में कार्यरत अनुसंधानकर्ता और अध्ययन के प्रमुख लेखक प्रोफेसर जॉर्ज एम वर्गीस ने कहा, ‘‘अंत:शिरा डॉक्सीसाइक्लिन और एजिथ्रोमाइसिन का मिश्रण किसी एक दवा के इस्तेमाल की तुलना में गंभीर स्क्रब टाइफस का इलाज करने का एक बेहतर एवं अधिक प्रभावी तरीका है।’’

स्क्रब टाइफस कीड़े के काटने से होने वाला बुखार है। यह बुखार ओरिएंटिया त्सुत्सुगामुशी नामक खतरनाक जीवाणु की वजह से फैलता है।

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