देश की खबरें | भारतीय वैज्ञानिक काले ने 60 साल बाद ध्वनि राकेट के लिए उल्टी गिनती कर इतिहास दोहराया

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. भारत के पहले ‘ध्वनि रॉकेट’ प्रक्षेपण के समय उल्टी गिनती करने वाले वैज्ञानिक प्रमोद पुरुषोत्तम काले ने 60 साल बाद शनिवार को एक अन्य रॉकेट के प्रक्षेपण से पहले उल्टी गिनती शुरू कर इतिहास दोहराया।

तिरुवनंतपुरम, 26 नवंबर भारत के पहले ‘ध्वनि रॉकेट’ प्रक्षेपण के समय उल्टी गिनती करने वाले वैज्ञानिक प्रमोद पुरुषोत्तम काले ने 60 साल बाद शनिवार को एक अन्य रॉकेट के प्रक्षेपण से पहले उल्टी गिनती शुरू कर इतिहास दोहराया।

छह दशक पहले केरल में तिरुवनंतपुरम के पास थुम्बा स्थित अस्थायी इक्वेटोरियल प्रक्षेपण स्थल से एक रॉकेट को प्रक्षेपित करने के मौके पर युवा वैज्ञानिक प्रमोद पुरुषोत्तम काले ने आत्मविश्वास के साथ 20 सेकंड की उल्टी गिनती (काउंटडाउन) शुरू की थी, तब देश का अंतरिक्ष कार्यक्रम अपने शुरुआती चरण में था।

लेकिन शनिवार को इतिहास ने खुद को दोहराया जब विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र में 80 वर्ष से अधिक उम्र के काले ने एक बार फिर रॉकेट प्रक्षेपण के लिए उल्टी गिनती का मार्गदर्शन करने के लिए माइक्रोफोन उठाया। काले महान वैज्ञानिक विक्रम साराभाई के समर्पित शिष्य रहे हैं।

नये रॉकेट का प्रक्षेपण उसी स्थान से किया गया जहां से 21 नवंबर, 1963 को भारत के पहले ‘ध्वनि रॉकेट’ को प्रक्षेपित किया गया था।

काले ने कहा कि याद रखने वाली सबसे अहम बात यह है कि देश के पहले ‘ध्वनि रॉकेट’ का प्रक्षेपण सूर्यास्त के बाद देर शाम को किया गया था और खुद वह उलटी गिनती कर रहे थे।

प्रसन्नचित काले ने उन दिनों को याद करते हुए कहा, ‘‘मैंने घड़ी विकसित कर ली थी, लेकिन वह घड़ी ऊपर की गिनती कर रही थी, नीचे की नहीं। इसलिए उन्होंने मुझसे उलटी गिनती करने के लिए कहा था।’’

इस प्रक्षेपण से देश में अंतरिक्ष क्षेत्र में विकास का मार्ग प्रशस्त हुआ और 1969 में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की स्थापना हुई।

विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र (वीएसएससी) के निदेशक रहे अहमदाबाद निवासी काले ने कहा कि उन्होंने कुछ और समय तक रॉकेट प्रक्षेपण के लिए उल्टी गिनती करना जारी रखा, क्योंकि उस समय प्रक्षेपण का समय बहुत महत्वपूर्ण था।

पुराने दिनों को याद करते हुए काले ने कहा कि विक्रम साराभाई द्वारा तैयार शुरुआती बैच में से केवल एपीजे अब्दुल कलाम ही एक ‘एरोनॉटिकल इंजीनियर’ थे।

उन्होंने कहा कि साराभाई ने इस बैच का गठन किया और जनवरी 1963 में इसके सदस्यों को रॉकेट उत्पादन, प्रक्षेपण और रॉकेट इंस्ट्रूमेंटेशन में प्रशिक्षण के लिए भेजा।

काले का मानना ​​है कि गगनयान के जरिए इसरो जल्द ही अपने मुख्य मिशन को पूरा करेगा और अंतरिक्ष स्टेशन बनाने में सफल होगा। इसरो के साथ दशकों की सेवा के बाद काले वीएसएससी के निदेशक के रूप में सेवानिवृत्त हुए। उन्होंने वीएसएससी से ही अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में अपनी यात्रा शुरू की थी।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)

Share Now

संबंधित खबरें

IPL 2026 Points Table With Net Run-Rate (NRR): कोलकाता नाइट राइडर्स को हराकर छठे स्थान पर पहुंची सनराइजर्स हैदराबाद, शीर्ष तीन पर इन टीमों का कब्जा, देखें अपडेट पॉइंट्स टेबल

KKR vs SRH, TATA IPL 2026 6th Match Scorecard: ईडन गार्डन्स स्टेडियम में सनराइजर्स हैदराबाद ने कोलकाता नाइट राइडर्स को हराकर जीत का स्वाद चखा, केकेआर को 65 रनों से दी पटखनी; यहां देखें मैच का स्कोरकार्ड

Jan Vishwas Bill 2026: राज्यसभा में पास हुआ जन विश्वास बिल, 16 अप्रैल को महिला आरक्षण पर होगी अहम चर्चा

CSK vs PBKS, IPL 2026 7th Match Date And Time: कब और कितने बजे से खेला जाएगा चेन्नई सुपर किंग्स बनाम पंजाब किंग्स मुकाबला? इस स्टेडियम में भिड़ेंगी दोनों टीमें, यहां जानें वेन्यू समेत मैच से जुड़ी सभी जानकारी