नयी दिल्ली, 23 जून इंडियन बैंक ने बताया कि उसे 31 मार्च को समाप्त चौथी तिमाही में 217.74 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा हुआ है। इसकी प्रमुख वजह फंसे कर्ज के लिए ऊंचा प्रावधान करना है। इससे पिछले वित्त वर्ष की जनवरी-मार्च तिमाही में बैंक का घाटा 189.77 करोड़ रुपये था।
शेयर बाजार को दी जानकारी के अनुसार इससे पिछली अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में बैंक ने 247.16 करोड़ रुपये का लाभ कमाया था।
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समीक्षावधि में बैंक की आय बढ़कर 6,334.37 करोड़ रुपये रही, जो इससे पिछले वित्त वर्ष 2018-19 की इसी तिमाही में 5,537.47 करोड़ रुपये थी।
बैंक का 2019-20 की जनवरी-मार्च तिमाही में फंसे कर्ज के लिए प्रावधान 1,891.86 करोड़ रुपये रहा। इससे पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में यह प्रावधान 1,638.83 करोड़ रुपये था।
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इस दौरान बैंक की सकल गैर-निष्पादित आस्तियां (एनपीए) उसके सकल ऋण का 6.87 प्रतिशत रही। इससे पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में यह आंकड़ा 7.11 प्रतिशत था। बैंक का शुद्ध एनपीए उसके शुद्ध ऋण का 3.13 प्रतिशत रहा। वित्त वर्ष 2018-19 की इसी अवधि में यह 3.75 प्रतिशत था।
बैंक ने जानकारी दी कि बिजली और इस्पात क्षेत्र के लिए एक ऋण देने में 33 बैंकों के समूह में वह भी शामिल रहा। यह ऋण 2019-20 की दूसरी तिमाही के तहत रिजर्व बैंक के नियमानुसार धोखाधड़ी वाली श्रेणी में पहुंच गया। इस पर बैंक का 31 मार्च 2020 तक 854.92 करोड़ रुपये बकाया था। यह ऋण खाता 2015-16 से ही एनपीए की श्रेणी में है। बैंक ने इसके लिए 854.92 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है।
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