विदेश की खबरें | भारतीय-अमेरिकी नागरिक ‘इंटरनेशनल पैरेंटल किडनैपिंग’ का दोषी करार

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श्रीलंका के प्रधानमंत्री दिनेश गुणवर्धने

न्यूयॉर्क (अमेरिका), 26 जुलाई अमेरिका की एक अदालत ने एक भारतीय-अमेरिकी नागरिक को अमेरिका में जन्मे अपने बच्चे को भारत ले जाने और फिर अमेरिका में उसकी मां के पास उसे वापस ना लाने के मामले में ‘इंटरनेशनल पैरेंटल किडनैपिंग’ का दोषी ठहराया है।

वडोदरा के अमित कुमार कनुभाई पटेल को पिछले सप्ताह न्यूजर्सी में कैमडेन संघीय अदालत में अमेरिकी जिला न्यायाधीश रेनी मैरी बंब ने पांच दिन तक चली सुनवाई के बाद ‘इंटरनेशनल पैरंटल किडनैपिंग’ का दोषी ठहराया गया था। पटेल पहले न्यू जर्सी के एडिसन में रहते थे।

‘इंटरनेशनल पैरंटल किडनैपिंग’ का दोषी पाए जाने पर अधिकतम तीन साल की सजा और अधिकतम 2,50,000 डॉलर का जुर्माना लगाने का प्रावधान है। पटेल को मामले में इस साल नवंबर में सजा सुनाई जाएगी।

अमेरिकी अटार्नी फिलिप आर. सेलिंगर ने सोमवार को बताया कि पटेल को बच्चे का अपहरण करने, बच्चे की मां के अधिकारों को बाधित करने और अमेरिका में बच्चे को वापस लाने में विफल रहने का दोषी ठहराया गया है।

इस मामले में दायर दस्तावेजों और मुकदमे के साक्ष्य के अनुसार, बच्चे की मां और पटेल के बीच संबंध थे और दोनों अगस्त 2015 से जुलाई 2017 तक न्यूजर्सी में साथ रहते थे। दोनों ने कभी शादी नहीं की। नवंबर 2016 में उनका एक बच्चा हुआ।

बच्चे की मां के अनुसार, पटेल बच्चे को भारत ले जाकर अपने परिवार से मिलवाना चाहते थे और डीएनए जांच करवाना चाहते थे। पटेल का कहना था कि उनकी पारिवारिक संपत्ति हासिल करने के लिए यह जरूरी है।

बच्चे की मां से पटेल ने बच्चे का भारत का वीजा लेने के लिए भी कहा। पटेल ने बच्चे की मां से कहा था कि वह अदालत के समक्ष कहे कि उनके बीच बच्चे के संरक्षण को लेकर आपसी सहमति बन चुकी है। पटेल ने कहा था कि वह अदालत में कहे कि उसके पास काम करने की अनुमति नहीं है इसलिए वह बेरोजगार है और बच्चे का ध्यान नहीं रख सकती।

मई 2017 में, पटेल बच्चे की मां को न्यूजर्सी सुपीरियर कोर्ट ले गया, ताकि बच्चे के संरक्षण संबंधी सभी अधिकार केवल उसे मिल सकें।

बच्चे की मां के अनुसार, मामले की अधिकतर सुनवाई अंग्रेजी में की गई। वह भी बिना अनुवादक के..महिला का दावा है कि वह इस दौरान बेहद कम अंग्रेजी बोली। मां ने पटेल के निर्देशानुसार ही सभी सवालों के जवाब दिए। सुनवाई के दौरान उनका प्रतिनिधित्व करने के लिए कोई वकील भी नहीं था।

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