जरुरी जानकारी | भारत सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बना रहेगा: सीतारमण

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में 5.2 प्रतिशत की कम वृद्धि दर की स्थिति से तेजी से पटरी पर लौट रही है।

नयी दिल्ली, 11 फरवरी वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में 5.2 प्रतिशत की कम वृद्धि दर की स्थिति से तेजी से पटरी पर लौट रही है।

उन्होंने कहा कि सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए उपाय करेगी कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बना रहे।

वित्त मंत्री ने लोकसभा में 2025-26 के बजट पर चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि बजट में राजकोष के मोर्चे पर सूझबूझ के साथ कदम उठाने के साथ लोगों के हाथों में पैसा पहुंचाने के उपाय किये गये हैं। राजकोषीय सूझबूझ का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि वित्त वर्ष 2025-26 में 99 प्रतिशत कर्ज का उपयोग पूंजीगत व्यय में किया जाएगा।

उन्होंने यह भी कहा कि मुद्रास्फीति प्रबंधन इस सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और खुदरा महंगाई दो से छह प्रतिशत के संतोषजनक दायरे के भीतर है। विशेषकर खाद्य वस्तुओं की महंगाई का रुख कम होता दिख रहा है।

सीतारमण ने जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) वृद्धि के बारे में कहा कि 2024-25 से पहले के तीन वर्षों में, देश की वृद्धि दर औसतन लगभग आठ प्रतिशत थी।

देश की आर्थिक वृद्धि दर चालू वित्त वर्ष में 6.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो चार साल में सबसे कम है। वित्त मंत्रालय की आर्थिक समीक्षा में अगले वित्त वर्ष 2025-26 में वृद्धि दर 6.3 से 6.8 प्रतिशत के बीच रहने का अनुमान लगाया गया है।

सीतारमण ने कहा कि 12 में से केवल दो तिमाहियों में, देश की वृद्धि दर 5.4 तक या उससे नीचे रही। दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) में जीडीपी वृद्धि दर घटकर सात तिमाहियों के निचले स्तर 5.4 प्रतिशत पर आ गई।

मंत्री ने कहा, ‘‘मजबूत आर्थिक बुनियाद के कारण, चीजें तेजी से पटरी आ रही हैं और हम ऐसे कदम उठाएंगे जो आगे चलकर हमारी अर्थव्यवस्था को पिछले कुछ वर्षों की तरह सबसे तेजी से बढ़ने में मदद करेंगे। हम सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बने रहेंगे।’’

सीतारमण ने कहा कि गांवों में अच्छी मांग के कारण चालू वित्त वर्ष में निजी अंतिम उपभोग व्यय 7.3 प्रतिशत बढ़ने की उम्मीद है।

उन्होंने कहा कि निजी अंतिम उपभोग व्यय बाजार मूल्य पर जीडीपी का 61.8 प्रतिशत होने का अनुमान है, जो 2002-03 के बाद से सबसे अधिक है।

सीतारमण ने कहा कि वित्त वर्ष 2025-26 में प्रभावी पूंजीगत व्यय 15.48 लाख करोड़ रुपये है, जो जीडीपी का 4.3 प्रतिशत है।

सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 में 15.68 लाख करोड़ रुपये के राजकोषीय घाटे का लक्ष्य रखा है, जो जीडीपी का 4.4 प्रतिशत है। राजकोषीय घाटा सरकारी राजस्व और व्यय के बीच का अंतर है और इसे बाजार कर्ज से पूरा किया जाता है।

उन्होंने कहा, ‘‘... सरकार प्रभावी पूंजीगत व्यय के लिए कर्ज के लगभग पूरे हिस्से का उपयोग कर रही है। यानी उधार राजस्व व्यय या प्रतिबद्ध व्यय के लिए नहीं है। यह केवल पूंजीगत संपत्ति बनाने के लिए है।’’

वित्त मंत्री ने कहा, ‘‘वास्तव में, सरकार प्रभावी पूंजीगत व्यय को पूरा करने के लिए कुल कर्ज का लगभग 99 प्रतिशत उपयोग करेगी।’’

सीतारमण ने कहा कि बजट ऐसे समय आया है जब वैश्विक स्तर पर अनिश्चितताएं हैं और वैश्विक वृहद-आर्थिक माहौल में बदलाव हो रहा है तथा वैश्विक वृद्धि दर स्थिर और मुद्रस्फीति ऊंची बनी हुई है।

उन्होंने कहा कि पिछले 10 साल में दुनिया के परिदृश्य में काफी बदलाव आया है और बजट बनाना अब पहले से कहीं अधिक चुनौतीपूर्ण है। बजट राजकोषीय प्राथमिकताओं के साथ राष्ट्रीय विकास की जरूरतों को संतुलित करता है।

सीतारमण ने अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट पर कहा कि विभिन्न वैश्विक और घरेलू कारक अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये के मूल्य को प्रभावित कर रहे हैं।

अक्टूबर, 2024 और जनवरी, 2025 के बीच अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में 3.3 प्रतिशत की गिरावट आई है। लेकिन यह गिरावट एशिया की अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राओं की तुलना में कम रही है।

इस अवधि में दक्षिण कोरियाई वोन और इंडोनेशियाई रुपैया में क्रमशः 8.1 प्रतिशत और 6.9 प्रतिशत की गिरावट आई है।

इसके अलावा, सभी जी-10 में शामिल देशों की मुद्राओं में भी इस अवधि के दौरान छह प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई। यूरो और ब्रिटिश पाउंड में क्रमशः 6.7 प्रतिशत और 7.2 प्रतिशत की गिरावट आई है।

सीतारमण ने यह भी कहा कि राज्यों को हस्तांतरण में कोई कटौती नहीं की गई है और वित्त वर्ष 2025-26 में 25.01 लाख करोड़ रुपये हस्तांतरित किए जाएंगे।

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