देश की खबरें | भारत, ब्रिटेन ने महत्वाकांक्षी प्रौद्योगिकी सुरक्षा पहल को अंतिम रूप दिया

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नयी दिल्ली, 24 जुलाई भारत और ब्रिटेन ने महत्वपूर्ण खनिजों, स्वच्छ ऊर्जा, दूरसंचार, सेमीकंडक्टर और नवीन प्रौद्योगिकियों जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग के लिए एक नया दृष्टिकोण निर्धारित करते हुए बुधवार को एक व्यापक प्रौद्योगिकी सुरक्षा पहल को अंतिम रूप दिया, जिसका व्यापक उद्देश्य दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को अगले मुकाम तक ले जाना है।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर और ब्रिटेन के उनके समकक्ष डेविड लैमी के बीच व्यापक वार्ता के बाद यूके-भारत प्रौद्योगिकी सुरक्षा पहल के बारे में जानकारी दी गई।

दोनों पक्षों ने मुक्त व्यापार समझौते के लिए बातचीत को गति देने पर भी विचार-विमर्श किया।

वार्ता में व्यापार, रक्षा एवं सुरक्षा, स्वच्छ ऊर्जा, डिजिटल क्षेत्र समेत विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी ध्यान केंद्रित किया गया।

विदेश मंत्रालय (एमईए) ने कहा, "राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक विकास में प्रौद्योगिकी की बढ़ती भूमिका को महत्व देते हुए, भारत और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को अगले स्तर तक ले जाने लिए एक नयी 'प्रौद्योगिकी सुरक्षा पहल' (टीएसआई) शुरू कर रहे हैं।"

टीएसआई भारत-यूके रोडमैप 2030 में निर्धारित महत्वाकांक्षी द्विपक्षीय सहयोग एजेंडे पर आधारित है, और यह प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में महत्वपूर्ण व उभरती प्रौद्योगिकियों में सहयोग को और अधिक स्पष्ट रूप से सामने लाएगी।

विदेश मंत्रालय ने कहा कि दोनों देंश मौजूदा और नये दौर की वार्ता के माध्यम से टीएसआई को लेकर समन्वय कायम करेंगे।

टीएसआई के तहत भारत और ब्रिटेन दूरसंचार, महत्वपूर्ण खनिजों, सेमीकंडक्टर, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), क्वांटम, जैव प्रौद्योगिकी और स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी तथा उन्नत सामग्री के क्षेत्रों में सहयोग करेंगे।

समझा जा रहा है कि भारत ने वार्ता के दौरान ब्रिटेन में खालिस्तान समर्थक तत्वों की गतिविधियों पर अपनी चिंता जताई, जबकि ब्रिटेन ने अगस्ता वेस्टलैंड वीवीआईपी हेलिकॉप्टर मामले में मुख्य आरोपी क्रिश्चियन मिशेल का मुद्दा उठाया, जो भारत की जेल में बंद है।

लैमी मुख्य रूप से व्यापार, रक्षा और सुरक्षा, स्वच्छ ऊर्जा, नयी प्रौद्योगिकियों जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच समग्र साझेदारी को फिर से स्थापित करने के लिए भारत की दो दिवसीय यात्रा पर हैं।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात की, जिन्होंने कहा कि भारत ब्रिटेन के साथ अपने संबंधों को प्रगाढ़ बनाने के लिए प्रतिबद्ध है और पारस्परिक रूप से लाभकारी मुक्त व्यापार समझौते पर बातचीत को अंतिम रूप देने की इच्छा का स्वागत करता है।

ब्रिटेन के विदेश मंत्री की नयी दिल्ली यात्रा, प्रधानमंत्री स्टॉर्मर की लेबर सरकार के पांच जुलाई को सत्ता में आने के बाद भारत और ब्रिटेन के बीच पहली उच्च स्तरीय वार्ता है।

मोदी ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘ब्रिटेन के विदेश मंत्री डेविड लैमी से मिलकर खुशी हुई। व्यापक रणनीतिक साझेदारी को प्रगाढ़ करने के लिए प्रधानमंत्री केअर स्टॉर्मर द्वारा दी गई प्राथमिकता की सराहना करता हूं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘हम संबंधों को प्रगाढ़ बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। द्विपक्षीय प्रौद्योगिकी सुरक्षा पहल और पारस्परिक रूप से लाभकारी एफटीए समझौता करने की इच्छा का स्वागत करते हैं।’’

लैमी ने कहा, ‘‘भारत 21वीं सदी की उभरती हुई महाशक्ति है, 1.4 अरब लोगों के साथ यह दुनिया का सबसे बड़ा देश है और दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है।’’

लैमी ने विदेश मंत्री एस जयशंकर से भी मुलाकात की।

जयशंकर ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में लैमी के साथ अपनी बातचीत को "सार्थक और आकर्षक" बताया।

उन्होंने कहा, "व्यापार और अर्थव्यवस्था, रक्षा एवं सुरक्षा, शिक्षा, आईटी, डिजिटल, अंतरिक्ष और उच्च तकनीक, संस्कृति के क्षेत्र में घनिष्ठ संबंधों पर आधारित भारत-यूके व्यापक रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने की अपार संभावनाओं पर चर्चा की।"

उन्होंने कहा, "प्रौद्योगिकी सुरक्षा पहल की शुरुआत का स्वागत करता हूं जो सहयोग के नए रास्ते खोलेगी। साथ ही क्षेत्रीय व वैश्विक मुद्दों और बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग पर चर्चा की।"

बैठक की शुरुआत में जयशंकर ने कहा कि भारत-यूके संबंधों में अपार संभावनाएं हैं और उन्हें सार्थक रूप से साकार करना हमारा कर्तव्य है।

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