देश की खबरें | भारत ने कनाडा के खिलाफ सही जवाबी कदम उठाया: पूर्व भारतीय राजनयिकों ने कहा
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. कई पूर्व राजनयिकों ने मंगलवार को ओटावा में भारतीय राजनयिकों को सिख चरमपंथी हरदीप सिंह निज्जर के मारे जाने की घटना की जांच से जोड़ने के कनाडा के आरोप की आलोचना की और कहा कि नयी दिल्ली ने ‘‘जवाब में सही कदम’’ उठाया है।
नयी दिल्ली, 15 अक्टूबर कई पूर्व राजनयिकों ने मंगलवार को ओटावा में भारतीय राजनयिकों को सिख चरमपंथी हरदीप सिंह निज्जर के मारे जाने की घटना की जांच से जोड़ने के कनाडा के आरोप की आलोचना की और कहा कि नयी दिल्ली ने ‘‘जवाब में सही कदम’’ उठाया है।
पूर्व राजदूतों ने यह भी कहा कि कनाडा का ‘‘मिथ्या प्रचार’’ प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो की अगले चुनाव में अपनी संभावनाएं बढ़ाने के लिए अपने देश के भीतर ‘‘कट्टरपंथी तत्वों से समर्थन’’ हासिल करने की ‘‘दुःसाहस’’ से उपजा है।
ओटावा द्वारा निज्जर के मारे जाने की घटना की जांच से भारतीय उच्चायुक्त को जोड़े जाने के बाद पहले से ही खराब भारत-कनाडा संबंधों में सोमवार को भारी गिरावट देखी गई।
भारत ने कनाडा के आरोपों को खारिज करते हुए कड़ी प्रतिक्रिया दी और छह कनाडाई राजनयिकों को निष्कासित कर दिया तथा कनाडा से अपने उच्चायुक्त को वापस बुला लिया।
भारत ने भारतीय एजेंटों को कनाडा में आपराधिक गिरोहों से जोड़ने के कनाडाई अधिकारियों के प्रयासों को भी खारिज किया और आधिकारिक सूत्रों ने यहां तक कहा कि ओटावा के इस दावे में रत्ती भर भी सच्चाई नहीं है कि उसने निज्जर मामले में नयी दिल्ली के साथ सबूत साझा किए हैं।
पूर्व राजनयिक और लेखक राजीव डोगरा ने कहा कि कनाडा की नवीनतम कार्रवाई तब हुई है जब ट्रूडो की लोकप्रियता ‘‘नीचे खिसक गई’’ है और उनके वहां आगामी चुनाव ‘‘हारने की आशंका’’ है।
उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रूडो अब सिख चरमपंथियों का समर्थन पाने की उम्मीद में एक नया दुष्प्रचार लेकर आए हैं।
डोगरा ने कहा, ‘‘काल्पनिक आरोप के बारे में ट्रूडो की सोच बेहद दुर्भाग्यपूर्ण, सबसे अस्थिर व्यक्ति जैसी है।’’ उन्होंने कहा कि यह चीजों से निपटने का ‘‘बुद्धिमत्तापूर्ण तरीका नहीं’’ है।
यह पूछे जाने पर कि क्या इससे 16 अक्टूबर को इस्लामाबाद में होने वाले शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन में भारत के रुख पर असर पड़ेगा, डोगरा ने कहा, ‘‘ऐसा नहीं होगा।’’
उन्होंने यहां पीटीआई की वीडियो सेवा से कहा, ‘‘चाहे वह एससीओ हो या कोई अन्य मंच, भारत का अपना स्तर और स्थिति है तथा कनाडा की ओर से मूर्खतापूर्ण कृत्यों का इस पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।’’
विदेश मंत्री एस जयशंकर पाकिस्तान की मेजबानी में होने वाली एससीओ बैठक के लिए मंगलवार को पड़ोसी देश पहुंचे।
भारत-कनाडा राजनयिक विवाद के द्विपक्षीय संबंधों पर प्रभाव के बारे में पूछे जाने पर डोगरा ने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो कनाडा के लोगों के लिए एक तरह से दुर्भाग्य बन गए हैं। उनकी लोकप्रियता गिर गई है, और जितनी यह गिरती है, उतना ही वह भड़क जाते हैं और गलत बातें बोलते हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘यह मैं नहीं कह रहा हूं, बल्कि कनाडा का मीडिया और राजनीतिक नेताओं का एक तबका कह रहा है।’’
डोगरा ने कहा, ‘‘यह मिथ्या प्रचार, क्या इससे वहां चरमपंथी गतिविधियों को बढ़ावा नहीं मिलेगा?’’
उन्होंने कहा कि ट्रूडो अधिक समय तक प्रधानमंत्री नहीं रहेंगे और उनके ‘‘आगामी चुनाव में हारने’’ की संभावना है।
कुछ पूर्व राजनयिकों ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय राय के मामले में यह कदम ‘‘कनाडा को नुकसान पहुंचाने वाला’’ होगा।
पूर्व राजनयिक दिलीप सिन्हा ने कहा कि भारत ने जवाबी कार्रवाई में ‘‘सबसे महत्वपूर्ण कदम’’ उठाया है।
उन्होंने कहा कि कूटनीति ‘‘पारस्परिकता’’ पर चलती है और यदि कनाडा ‘‘अनर्गल आरोप लगाने और उस देश में भारतीय राजनयिकों के जीवन को असुरक्षित बनाने’’ का निर्णय लेता है, तो भारत को ‘‘जवाबी कार्रवाई’’ करनी होगी।
यूनान में राजदूत रहे सिन्हा ने कहा कि भारत पहले ही ‘‘कनाडा में काम कर रहे भारतीय उच्चायुक्त और अन्य वरिष्ठ भारतीय राजनयिकों के खिलाफ बेबुनियाद आरोप लगाने के कनाडा सरकार के बेहद गैर-जिम्मेदाराना कृत्य के खिलाफ जवाबी कार्रवाई करने का सबसे महत्वपूर्ण कदम उठा चुका है।’’
नयी दिल्ली ने कनाडा के कार्यवाहक उच्चायुक्त और पांच अन्य राजनयिकों से भारत से चले जाने को कहा है।
सिन्हा ने डोगरा की बात दोहराते हुए कहा कि ट्रूडो ‘‘चुनाव पूर्व सर्वेक्षणों में पीछे दिख रहे हैं, इसलिए उन्हें लगता है कि वह हारने वाले हैं’’।
सिन्हा ने कहा, ‘‘उन्हें (ट्रूडो) लगता है कि उन्हें कट्टरपंथी खालिस्तानी तत्वों के समर्थन की जरूरत है, जिनका कनाडा में बहुत मजबूत आधार है।’’
उन्होंने कहा कि ट्रूडो इन तत्वों को लुभाने के लिए भारत के साथ संबंधों की बलि देने पर आमादा हैं।
यह पूछे जाने पर कि क्या जी7 समूह के सदस्य के रूप में कनाडा की स्थिति भारत को प्रभावित करेगी, पूर्व राजनयिक ने कहा कि कनाडा संबंधित समूह का एक महत्वपूर्ण देश है, लेकिन ‘‘अन्य देश ट्रूडो की चाल में नहीं फंसेंगे’’, हालांकि ओटावा दूसरों से समर्थन हासिल करने की कोशिश जरूर करेगा।
ब्रिगेडियर राहुल भोंसले (सेवानिवृत्त) ने देहरादून में पीटीआई की वीडियो सेवा से कहा कि कनाडा का आरोप ‘‘काफी बेतुका’’ है।
उन्होंने कहा कि भारतीय राजनयिक अत्यंत सम्मानित और अत्यधिक पेशेवर हैं, जो संबंधों की मजबूती के लिए काम करते हैं, न कि संबंधों को तोड़ने के लिए।
भोंसले के अनुसार, विदेश मंत्रालय ने कनाडा के आरोपों को सही तरीके से खारिज किया है।
उन्होंने कहा, ‘‘यह कदम... भारत के साथ संबंध खराब करने की हताशापूर्ण कार्रवाई है, किस कारण से, मुझे नहीं पता, लेकिन मुख्यत: यह राजनीतिक कारणों की वजह से लगती है... क्योंकि उनकी (ट्रूडो की) पार्टी चुनाव से पहले हार रही है।’’
पिछले साल सितंबर में निज्जर के मारे जाने की घटना में भारतीय एजेंटों की ‘‘संभावित’’ संलिप्तता के ट्रूडो के आरोपों के बाद दोनों देशों के बीच संबंध काफी तल्ख हो गए हैं।
भारत ने ट्रूडो के आरोपों को ‘‘बेतुका’’ बताते हुए खारिज किया है।
भारत कहता रहा है कि दोनों देशों के बीच मुख्य मुद्दा कनाडा द्वारा अपनी धरती से सक्रिय खालिस्तान समर्थक तत्वों को खुलेआम समर्थन देना है।
भारत द्वारा आतंकवादी घोषित निज्जर की पिछले साल 18 जून को ब्रिटिश कोलंबिया के सरे में एक गुरुद्वारे के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।
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