जरुरी जानकारी | अगले दो दशक में हवाईअड्डों के विकास के लिए भारत को 50 अरब डॉलर निवेश की जरूरत : रपट

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. भारत को दो दशक में हवाईअड्डों के विकास के लिए कुल 50 अरब डॉलर के निवेश की आवश्यकता होने का अनुमान है। एक रपट के मुताबिक अगले पांच साल में हवाईअड्डा क्षेत्र में काफी निवेश होने की उम्मीद है।

मुंबई, 26 अगस्त भारत को दो दशक में हवाईअड्डों के विकास के लिए कुल 50 अरब डॉलर के निवेश की आवश्यकता होने का अनुमान है। एक रपट के मुताबिक अगले पांच साल में हवाईअड्डा क्षेत्र में काफी निवेश होने की उम्मीद है।

परामर्श कंपनी केपीएमजी ने भारत के अवसंरचना क्षेत्र पर अपनी एक रपट में कहा है कि 2027 तक देश में घरेलू हवाई यात्रियों की संख्या बढ़कर करीब 50 करोड़ हो जाने का अनुमान है। जबकि अंतरराष्ट्रीय हवाई यात्रियों की संख्या भी तब तक 20 करोड़ होने की उम्मीद है।

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भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण की वेबसाट के मुताबिक अभी देश में 108 हवाईअड्डे परिचालन में हैं। इसमें भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण के प्रबंधन अधीन 21 अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे, संयुक्त उपक्रम के तहत सात अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे और एक राज्य सरकार द्वारा चलाया जाने वाला अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डा शामिल हैं।

देश में 10 सीमा शुल्क हवाईअड्डे, 58 घरेलू हवाईअड्डे और 11 अन्य निजी या राज्य सरकार अधीन घरेलू हवाईअड्डे भी हैं।

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केपीएमजी की ‘कैटलाइजिंग द नेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर पाइपलाइन-प्रोजेक्ट इंडिया’ रपट के मुताबिक, ‘‘अगले दो दशक में हवाईयात्रा क्षेत्र की मांग को पूरा करने के लिए भारत को हवाईअड्डा परिसंपत्तियों के निर्माण पर 50 अरब डॉलर के निवेश की जरूरत होगी। हमारी तात्कालिक जरूरत अगले पांच सालों में 20 अरब डॉलर के निवेश की है। इसमें इसे अधिकांश निवेश निजी क्षेत्र से आने की जरूरत है।’’

बड़े वाणिज्यिक हवाईअड्डों के निर्माण में निजी क्षेत्र के रुचि लेने से सरकार को भी क्षेत्रीय हवाईअड्डों का बुनियादी ढांचा खड़ा करने में मदद मिलेगी। यह सरकार के क्षेत्रीय हवाई संपर्क और हवाईअड्डों पर यातायात वृद्धि को आगे बढ़ाने एवं वित्तपोषण में मदद करेगा।

पिछले हफ्ते सरकार ने जयपुर, गुवाहाटी और तिरुवनंतपुरम के हवाईअड्डों को लोक-निजी भागीदारी के तहत परिचालित करने की मंजूरी दे दी।

सरकार इस साल अब तक 12 हवाईअड्डों का निजीकरण कर चुकी है। इसमें उपरोक्त हवाईअड्डों के अलावा लखनऊ, अहमदाबाद, मंगलुरू, अमृतसर, वाराणसी, भुवनेश्वर, इंदौर, रायपुर और त्रिची के हवाईअड्डे शामिल हैं।

सरकार ने 2020 के आम बजट में क्षेत्रीय हवाई संपर्क योजना ‘उड़ान’ के तहत 100 नए हवाईअड्डों के विकास का प्रस्ताव रखा है।

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