देश की खबरें | सेना के पूर्व जवान को दिव्यांग पेंशन देने के मामले में न्यायालय ने कहा, ‘मानवीय पहलू को देखना होगा’
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को कहा कि उसे इंसाफ के मानवीय पहलू को देखना होगा और केंद्र सरकार से आग्रह किया कि वह सेना के उस जवान की दिव्यांग पेंशन जारी रखने के लिए एक अपवाद कायम करे, जिसे शराब पर निर्भरता के चलते सेवा मुक्त कर दिया गया था।
नयी दिल्ली, एक अगस्त उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को कहा कि उसे इंसाफ के मानवीय पहलू को देखना होगा और केंद्र सरकार से आग्रह किया कि वह सेना के उस जवान की दिव्यांग पेंशन जारी रखने के लिए एक अपवाद कायम करे, जिसे शराब पर निर्भरता के चलते सेवा मुक्त कर दिया गया था।
न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति सुधांशू धूलिया की पीठ ने कहा, “हमें उन परिस्थितियों को समझना होगा, जिनमें वह काम कर रहा था। उसे कश्मीर में तैनाती मिली थी और हम जानते हैं कि वे कितने कठिन हालातों में सेवा देते हैं।”
पीठ ने कहा, “हम न्यायाधीश भी इनसान हैं। हम रोज ताबूतों को लाया जाता देखते हैं। उसके पास देखभाल करने के लिए एक परिवार है। हमें इंसाफ के मानवीय पहलू को भी देखना होगा। चलिए इसे यहीं खत्म करते हैं।”
पीठ ने केंद्र सरकार की तरफ से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल माधवी दीवान से परामर्श लेने और एक अपवाद कायम करने को कहा, ताकि जवान की दिव्यांग पेंशन न खत्म की जाए।
शीर्ष अदालत सशस्त्र बल अधिकरण के उस फैसले के खिलाफ केंद्र द्वारा दाखिल याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसके तहत करगिल युद्ध में लड़ने वाले जवान नागेंद्र सिंह को पेंशन देने का आदेश दिया गया है।
सुनवाई की शुरुआत में दीवान ने कहा था कि अगर जवान को अनुशासनात्मक आधार पर सेवा मुक्त किया जाता है तो उसे पेंशन नहीं दी जा सकती और इस मामले में शराब पर निर्भरता के कारण जवान को सेवा मुक्त किया गया था।
इस पर पीठ ने कहा कि सरकार को इस मुद्दे को व्यापक नजरिये से देखना चाहिए और उसे जवान के परिवार और उन परिस्थितियों पर गौर फरमाना चाहिए, जिनमें वह तैनात था।
दीवान ने कहा कि अगर इस मानदंड को लागू किया जाएगा तो अन्य मामले भी सामने आएंगे और शराब पर निर्भरता को सशस्त्र बलों में एक गंभीर अनुशासनात्मक मुद्दे के तौर पर देखा जाता है।
हालांकि, पीठ ने परामर्श लेने और एक अपवाद कायम करने का प्रयास करने का निर्देश दिया, ताकि जवान को दिव्यांग पेंशन मिलना जारी रहे।
सर्वोच्च अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए आठ अगस्त की तारीख मुकर्रर की।
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