ताजा खबरें | राज्यसभा में भाजपा के सुधांशु त्रिवेदी ने देश की आर्थिक उपलब्धियों को जोड़ा राम मंदिर अभियान से

Get latest articles and stories on Latest News at LatestLY. राज्यसभा में मंगलवार को भारतीय जनता पार्टी सदस्य सुधांशु त्रिवेदी ने देश के आर्थिक विकास को अयोध्या के राम मंदिर निर्माण अभियान से जोड़ते हुए कहा कि इस दिशा में जब भी कोई प्रगति हुई है, देश ने नयी आर्थिक उपलब्धियों को हासिल किया है।

नयी दिल्ली, पांच दिसंबर राज्यसभा में मंगलवार को भारतीय जनता पार्टी सदस्य सुधांशु त्रिवेदी ने देश के आर्थिक विकास को अयोध्या के राम मंदिर निर्माण अभियान से जोड़ते हुए कहा कि इस दिशा में जब भी कोई प्रगति हुई है, देश ने नयी आर्थिक उपलब्धियों को हासिल किया है।

उच्च सदन में ‘‘देश में आर्थिक स्थिति’’ विषय पर अल्पकालिक चर्चा में भाग लेते हुए त्रिवेदी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस बात को भलीभांति समझा कि धन को किस मार्ग से व्यय करना चाहिए। उन्होंने शास्त्रों का हवाला देते हुए कहा, ‘‘धनात् धर्म: तत: सुखम्’’ अर्थात धन वही सुखकारक होता है जो धर्म के मार्ग से व्यय होता है।

उन्होंने कहा, ‘‘जो लोग धर्म के समूल नाश का संकल्प लेते हैं, उनके लिए संपत्ति भी विपत्ति बन जाती है और वह सुखकारक बनने के रास्ते पर नहीं चल पाती।’’ उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने ऐसी युक्ति बनायी है कि जो आर्थिक विपत्ति थी वो अब संपत्ति की तरफ बढ़ती दिखाई दे रही है।

त्रिवेदी ने कहा कि एक दौर ऐसा था जब भारतीय अर्थव्यवस्था का मजाक उड़ाया जाता था और कहा जाता था कि ये दो प्रतिशत से अधिक विकास कर ही नहीं सकते। उन्होंने कहा, ‘‘इसे हिन्दू ग्रोथ रेट’’ कहकर मजाक उड़ाया जाता था।

उन्होंने कहा, ‘‘किंतु अब जो लोग (सत्ता में) आये हैं वे हिन्दुत्व पर विश्वास करते हैं और इसीलिए 7.8 की हिन्दुत्व की ग्रोथ है।’’

भाजपा सदस्य ने कहा कि जब भारत आजाद हुआ तो देश की अर्थव्यवस्था पर ताला लगा हुआ था। विपक्ष के लोग कहते थे कि उस समय देश के पास कुछ था ही नहीं इसलिए कुछ कर भी नहीं सकते थे। उन्होंने कहा, ‘‘उस समय रामलला विराजमान भी ताले में ही थे।’’

उन्होंने दावा किया कि 1990-92 वह दौर है जब विवादित ढांचा भी गिरा, भारत की अर्थव्यवस्था में बदलाव आया और वह खुली और उसी दौर में ‘‘नेहरूवादी मॉडल भी गिर गया’’।

त्रिवेदी ने कहा कि उसके बाद एक और बड़ा दौर आया 2003-04 में जब भारत चालू खाता अधिशेष हासिल कर पाया और अर्थव्यवस्था काफी तेजी से विकास करने लगी। उन्होंने कहा कि यही वह दौर था जिसमें अयोध्या में विवादित स्थल पर 70 खंभे निकले थे जिससे साबित हुआ कि रामलला विराजमान के पास ही मंदिर है।

भाजपा सदस्य ने कहा कि 2019 में जब राममंदिर के पक्ष में उच्चतम न्यायालय का निर्णय आया तो उस साल देश का विदेशी मुद्रा भंडार बढ़कर पहली बार 500 अरब डालर के स्तर पर पहुंच गया।

उन्होंने कहा,‘‘अब जब राममंदिर बनने जा रहा है तो हम विश्व की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था हैं, चौथे सबसे बड़े स्टाक एक्सचेंज हैं, तीसरे सबसे बड़े ऑटोमोबाइल निर्माता हैं, दूसरे सबसे बड़े मोबाइल फोन निर्माता है, आधारभूत क्षेत्र में सबसे अधिक निवेश करने वाला देश हैं और चांद के एक कोने को छूने वाला देश बन गये हैं।’’

उन्होंने कहा कि कुछ ऐसे संयोग होते हैं जिन्हें देखने के लिए एक अलग दृष्टि चाहिए। उन्होंने रामचरित मानस की एक चौपाई को उद्धृत किया, ‘‘कुमति सुमति सबके उर रहिइ, नाथ पुराण निगम यह कहिइ, जहां सुमति तहां संपत्ति नाना जहां कुमति तहां विपत्ति निधाना’’

इससे पहले चर्चा को शुरू करते हुए तृणमूल कांग्रेस के नेता डेरेक ओब्रायन ने सरकार से प्रश्न किया कि देश के आर्थिक विकास को किस दृष्टि से देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि अमीर लोगों की दृष्टि से देखें तो बहुत विकास हो रहा है किंतु गरीब और आम लोगों की दृष्टि से स्थितियां बहुत प्रतिकूल हैं।

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