देश की खबरें | आईआईएससी आतंकी हमला: न्यायालय ने चार आरोपियों की उम्र कैद की सजा बरकरार रखी

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नयी दिल्ली, 11 जुलाई उच्चतम न्यायालय ने बेंगलुरु स्थित भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी) में दिसंबर, 2005 में हुए आतंकवादी हमले के मामले में चार लोगों की दोषसिद्धि और उन्हें दी गई आजीवन कारावास की सजा सोमवार को बरकरार रखी।

इस हमले में आईआईटी (भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान)-दिल्ली के एक सेवानिवृत्त प्रोफेसर की मौत हो गई थी और चार अन्य घायल हो गए थे।

न्यायमूर्ति यू यू ललित, न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता और न्यायमूर्ति एस रवींद्र भट की पीठ ने चारों दोषियों की याचिका खारिज करते हुए कहा कि सार्वजनिक संपत्ति एवं आम जनता को खतरा पैदा करने के उद्देश्य से रची गई साजिशों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।

दोषियों - मोहम्मद इरफान, निजामुद्दीन, मोहम्मद इरफान और नूरुल्ला खान - ने मई 2016 में कर्नाटक उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देते हुए शीर्ष अदालत का रुख किया था।

शीर्ष अदालत ने कहा कि उच्च न्यायालय ने निचली अदालत द्वारा दी गई सात साल की सजा को भारतीय दंड संहिता की धारा 121-ए (सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने का षड्यंत्र रचना) के तहत दंडनीय अपराध के तहत आजीवन कारावास में बदल दिया और उसे उच्च न्यायलय के इस आदेश के खिलाफ दायर याचिकाएं सुनवाई योग्य नहीं लगतीं।

इस मामले के सात आरोपियों में से एक को सभी आरोपों से बरी कर दिया गया था, जबकि एक को आठ साल की सजा हुई और बाकी पांच को उच्च न्यायालय ने उम्रकैद की सजा सुनाई थी।

28 दिसंबर, 2005 को, दो हथियारबंद व्यक्ति एक कार में शाम लगभग सात बजे बेंगलुरु स्थित आईआईएससी परिसर में दाखिल हुए और छात्रों तथा प्रतिनिधि मंडल पर अंधाधुंध गोलीबारी कर दी। गोलीबारी तब की गई जब एक सम्मेलन के बाद छात्र और प्रतिनिधिमंडल के लोग रात्रिभोज में शामिल होने के लिए जा रहे थे।

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