ताजा खबरें | बजट में गरीबों की अनदेखी, बेरोजारी दूर करने के कोई उपाय नहीं : विपक्ष

Get latest articles and stories on Latest News at LatestLY. राज्यसभा में बृहस्पतिवार को विपक्ष ने आम बजट 2022-23 में सरकार पर गरीबों की पूरी तरह से अनदेखी करने का आरोप लगाते हुए दावा किया कि इसमें बेरोजगारी को दूर करने के लिए कोई उपाय नहीं हैं तथा किसानों की आय दुगनी होने के बजाय कृषि की लागत अवश्य दुगनी हो गयी है।

नयी दिल्ली, 10 फरवरी राज्यसभा में बृहस्पतिवार को विपक्ष ने आम बजट 2022-23 में सरकार पर गरीबों की पूरी तरह से अनदेखी करने का आरोप लगाते हुए दावा किया कि इसमें बेरोजगारी को दूर करने के लिए कोई उपाय नहीं हैं तथा किसानों की आय दुगनी होने के बजाय कृषि की लागत अवश्य दुगनी हो गयी है।

सत्ता पक्ष की ओर से इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा गया कि रोजगार के अवसरों में लगातार वृद्धि हो रही है और कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) में पंजीकृत होने वाले नये लोगों के खातों की संख्या से इसकी पुष्टि की जा सकती है।

उच्च सदन में आम बजट 2022-23 पर चर्चा में भाग लेते हुए कांग्रेस की छाया वर्मा ने कहा कि राष्ट्रपति अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर हुई चर्चा के जवाब में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह कहा था कि कांग्रेस ने मुंबई में ट्रेनों और बसों से प्रवासी मजदूरों को उनके घर भेजा, इसके कारण देश में कोरोना बढ़ा। कांग्रेस सदस्य ने सवाल किया कि लॉकडाउन के दौरान कौन सी ट्रेन और और कौन सी बस चल रही थी? उन्होंने कहा, ‘‘इस तरह का असत्य वक्तव्य प्रधानमंत्री के मुंह से शोभा नहीं देता।’’

वर्मा ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी उस समय तत्कालीन मध्य प्रदेश सरकार को गिराने और ‘‘नमस्ते ट्रंप’’ में लगी हुई थी जिसके कारण देश में कोरोना फैला। उन्होंने कहा, ‘‘कोरोना कांग्रेस पार्टी के कारण नहीं आया है।’’

उन्होंने प्रधानमंत्री द्वारा उच्च सदन में कांग्रेस पर किए गए तीखे प्रहार का उल्लेख करते हुए कहा कि मोदी ने तमाम बातों के लिए कांग्रेस को जिम्मेदार ठहरा दिया किंतु क्या वह 2002 (गुजरात दंगों) को भूल गये? उन्होंने कहा कि उस समय गुजरात में भाजपा की सरकार थी और अटल बिहारी वाजपेयी देश के प्रधानमंत्री थे।

वर्मा के अनुसार उस समय वाजपेयी ने कहा था, ‘‘मैं जब विदेश जाऊंगा तो मुझे शर्म आएगी कि मेरे राज्य, मेरे देश में ऐसा हुआ है।’’ उन्होंने सत्ता पक्ष को नसीहत दी कि उन्हें पूर्व प्रधानमंत्री वाजपेयी से कुछ सीखना चाहिए।

बजट की चर्चा करते हुए कांग्रेस सदस्य ने प्रश्न किया, बजट में ‘‘गरीबन का का बा? हीरे की कीमत कम किए बा और आर्टिफिशियल ज्वैलरी की कीमत बढ़ाए बा।’’ उन्होंने कहा कि हीरा अमीर आदमी पहनता है तथा इस बात को भी समझना चाहिए कि हीरे का व्यापार सबसे अधिक कहां होता है और गुजरात एवं सूरत से कौन आता है?’’

उन्होंने कहा कि हर अखबार में जब महिलाओं से बलात्कार की खबरें छायी रहती हैं तो ऐसे में फिर ‘‘बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ’’ नारे का क्या महत्व रह जाता है? उन्होंने कहा कि यदि सरकार इस दिशा में कुछ सार्थक करना ही चाहती है तो उसे राज्यों की विधानसभा एवं लोकसभा में महिलाओं को आरक्षण दिलवाने वाले विधेयक को अपने बहुमत के जरिये पारित करवाना चाहिए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी पहले ही कह चुकी हैं कि उनकी पार्टी इस विधेयक का समर्थन करेगी।

उन्होंने बजट में ड्रोन खेती की पहल पर कहा कि इससे खेती में रोजगार के अवसर घटेंगे। उन्होंने कहा कि कृषि ऐसा क्षेत्र है जहां लोगों को सबसे अधिक रोजगार मिलता है। उन्होंने कहा कि किसानों की आय तो दुगनी नहीं हुई किंतु उनकी लागत दुगनी हो गयी।

वर्मा ने कहा कि कोरोना के दौरान मनरेगा के कारण लोगों को काम मिला किंतु सरकार ने बजट में इसके लिए आवंटन घटा दिया। उन्होंने कहा कि सरकार को मनरेगा के लिए 100 दिन के काम के बजाय 365 दिन करके इसके लिए आवंटन बढ़ा दिया जाना चाहिए।

चर्चा में भाग लेते हुए भाजपा के सैयद जफर इस्लाम ने कहा कि पूर्व की संप्रग सरकार ने सभी घरों में बिजली आपूर्ति, नल से पेयजल, आतंकवाद को समाप्त करने जैसे जो तमाम वादे किये थे, उनमें से वह कोई भी पूरा नहीं कर पायी तथा वर्तमान सरकार ने इसे पूरा किया। उन्होंने कहा कि इसीलिए उसे ‘अंडर परफार्मिंग एलायंस’ (कम कामकाज करने वाला गठबंधन) यानी यूपीए कहा जाता था।

उन्होंने कहा कि विपक्ष के सदस्यों ने बेरोजगारी के बारे में गुमराह करने वाले आंकड़े दिये हैं। उन्होंने कहा कि सबसे विश्वसनीय आंकड़े ईपीएफओ के होते हैं। सरकार हर महीने 10 लाख से अधिक रोजगार सृजित कर रही है और वह भी संगठित क्षेत्र में। उन्होंने कहा कि एक सामान्य नियम होता है कि जब संगठित क्षेत्र में एक रोजगार अवसर सृजित होता है तो असंगठित क्षेत्र में पांच अवसर पैदा होते हैं।

उन्होंने कहा कि अमृत काल का मतलब है कि देश की आने वाली पीढ़ियों के लिए नौकरियां और सभी सुविधाएं हों। उन्होंने कहा कि सरकार की सभी नौकरियां जमीनी स्तर पर जरूरतों को ध्यान में रखकर बनायी गयी हैं तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसीलिए पसंदीदा नेता हैं क्योंकि वे जमीन पर जाकर लोगों से रुबरू होते हैं और उनकी जरूरतों को समझते हैं।

जारी माधव

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