आईबीबीआई ने मौजूदा नियमनों पर सार्वजनिक टिप्पणियां मांगीं

आईबीबीआई दिवाला एवं ऋणशोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) का क्रियान्वयन करने वाली इकाई है।

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नयी दिल्ली, छह मई भारतीय दिवाला एवं ऋणशोधन अक्षमता संहिता बोर्ड (आईबीबीआई) ने अशंधारकों के लिए अधिक अनुकूल नियामकीय वातावरण के लिए दिवाला कानून के मौजूदा नियमनों पर सार्वजनिक टिप्पणियां मांगी हैं।

आईबीबीआई दिवाला एवं ऋणशोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) का क्रियान्वयन करने वाली इकाई है।

आईबीबीआई ने कहा कि अंशधारक नियमन बनाने में सक्रिय भूमिका निभाते हैं। ऐसे में वे लेनदेन में आने वाली नियामकीय अड़चनों और उन्हें दूर करने के लिए वैकल्पिक समाधान सुझा सकते हैं।

आईबीबीआई ने बयान में कहा, ‘‘यह विचारों को जुटाने के समान है। इससे प्रत्येक विचार नियामक के पास पहुंच सकेगा। इससे नियामक के पास काफी अधिक विचार उपलब्ध होंगे और वह अनुकूल नियामकीय ढांचे की संभावना भी अधिक ऊंची हो सकेगी।’’

आईबीबीआई ने कहा कि बेहतरीन प्रयासों और मंशा के बावजूद ऐसा हो सकता है कि नियामक के पास हमेशा जमीनी वास्तविताओं की जानकारी नहीं हो।

आईबीबीआई ने कहा कि 13 अप्रैल से लेकर 31 दिसंबर तक मिले विचारों की एक विचार किया जाएगा और नियमनों में उसके अनुसार संशोधन किया जाएगा। बयान में कहा गया है कि आईबीबीआई संशोधित नियमनों को 31 मार्च, 2021 तक अधिसूचित करेगा और इन्हें एक अप्रैल, 2021 से लागू किया जाएगा।

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