देश की खबरें | कोविड के दौरान नीतीश सरकार की असंवेदनशीलता के कारण मैं राजनीति में आया: प्रशांत किशोर

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने दावा किया है कि कोविड-19 महामारी के दौरान बिहार में नीतीश कुमार सरकार की कथित असंवेदनशीलता ने उन्हें अपने गृह राज्य में राजनीति में उतरने के लिए प्रेरित किया।

पटना, 17 मई जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने दावा किया है कि कोविड-19 महामारी के दौरान बिहार में नीतीश कुमार सरकार की कथित असंवेदनशीलता ने उन्हें अपने गृह राज्य में राजनीति में उतरने के लिए प्रेरित किया।

प्रशांत किशोर ने उन आरोपों को भी खारिज किया है कि उन्होंने सत्ता का आनंद लेने के लिए अपनी खुद की पार्टी बनाई है, जो राज्य में आगामी विधानसभा चुनाव लड़ेगी।

किशोर ने एक पॉडकास्ट में कहा, ‘‘मैंने 2015 के विधानसभा चुनाव में बिहार में महागठबंधन को एक बड़ी जीत दिलाने में मदद की थी। अगर मैं अपने लिए कोई पद चाहता तो मैं वह उसी समय पा सकता था।’’

किशोर (47) की परामर्श कंसल्टेंसी फर्म आईपीएसी नरेन्द्र मोदी, ममता बनर्जी और अरविंद केजरीवाल जैसे विविध नेताओं के प्रचार अभियान को संभालने का दावा करती है। उन्होंने कहा कि ‘‘लोगों को सितारों की अपील के कारण फिल्म देखने की अपेक्षा नेता के लिए वोट देते समय अधिक सावधान रहना चाहिए।’’

जन सुराज पार्टी के संस्थापक किशोर ने कहा, ‘‘चुनाव में बहुत कुछ दांव पर लगा होता है...लोग अक्सर कहते हैं कि वे शिक्षा, स्वास्थ्य और भ्रष्टाचार के मुद्दे पर वोट देंगे, क्योंकि वे सही काम करते हुए दिखना चाहते हैं। लेकिन वे जाति और धर्म के बहकावे में आ जाते हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘मैंने अपने गृह राज्य बिहार की सेवा करने का मन तब बनाया जब मैंने वैश्विक कोविड महामारी के दौरान यहां सरकार की असंवेदनशीलता देखी। जरा सोचिए, दूसरे राज्यों में बिहारी प्रवासियों को भगाया जा रहा था और उन्हें घर लौटने के लिए हजारों किलोमीटर पैदल चलना पड़ रहा था।’’

किशोर ने कहा कि उन्होंने 2021 के पश्चिम बंगाल चुनावों के बाद फैसला किया था कि वह अब चुनाव प्रचार प्रबंधन में शामिल नहीं होंगे। उन्होंने कहा, ‘‘कुछ सोच-विचार के बाद मैंने अपनी खुद की पार्टी बनायी।’’

किशोर ने पॉडकास्ट में प्रखर गुप्ता से कहा, ‘‘बिहार को इसलिए नुकसान उठाना पड़ रहा है क्योंकि उसके नेताओं को लगता है कि अगर वे अच्छा प्रदर्शन नहीं करेंगे तो भी उन्हें वोट मिलेंगे। मुझे उम्मीद है कि मेरी पार्टी बदलाव के लिए उत्प्रेरक बनेगी।’’

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