ऑस्ट्रेलिया का कैनबरा कैसे बना सौ फीसदी स्वच्छ ऊर्जा पर चलने वाला शहर

ऑस्ट्रेलिया जीवाश्म ईंधन का बड़ा उत्पादक है, फिर भी उसकी राजधानी कैनबरा स्वच्छ ऊर्जा की सबसे बड़ी मिसाल बन गई है.

प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credit: Image File)

ऑस्ट्रेलिया जीवाश्म ईंधन का बड़ा उत्पादक है, फिर भी उसकी राजधानी कैनबरा स्वच्छ ऊर्जा की सबसे बड़ी मिसाल बन गई है. कोयला और गैस में निवेश की जगह पवन और सौर ऊर्जा में की गई. जिसके बाद बिजली के बिल स्वयं सस्ते हो गए.साल 2017 में ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री बनने जा रहे नेता स्कॉट मॉरिसन ने कैनबरा स्थित देश की संसद में कोयले का टुकड़ा दिखाते हुए कहा कि फॉसिल फ्यूल भविष्य की ऊर्जा के लिए जरूरी है. लेकिन आगे चल कर वही कैनबरा 100 फीसदी पवन और सौर ऊर्जा से चलने वाला शहर बना. कैनबरा इस मील के पत्थर तक 2020 में पहुंचा. तब तक ऑस्ट्रेलियन कैपिटल टेरिटरी (एसीटी), कैनबरा ने इतनी स्वच्छ बिजली बना ली थी कि वहां कोयला और गैस बेमानी हो गए थे.

यह यूरोप के बाहर एक लाख से ज्यादा आबादी वाला पहला ऐसा शहर था, जिसने अपना ग्रिड डीकार्बोनाइज कर लिया. आइसलैंड की राजधानी रेक्जाविक, पहला शहर था, जहां 70 फसीदी बिजली हाइड्रोइलेक्ट्रिक से आती थी. 2021 में कैनबरा को यूके की ऊर्जा वेबसाइट यूस्विच ने दुनिया का सबसे सस्टेनेबल शहर घोषित किया. लेकिन इसी दौरान, ऑस्ट्रेलिया के बाकी हिस्सों में स्वच्छ ऊर्जा निवेश, ओईसीडी देशों में सबसे कम रहा.

आज भी ऑस्ट्रेलिया में कुल बिजली उत्पादन का सिर्फ 35 फीसदी ही नवीकरणीय ऊर्जा से आता है. जबकि जर्मनी में यह हिस्सा 60 प्रतिशत तक पहुंच चुका है. ऑस्ट्रेलिया में जैसे-जैसे कोयला बिजलीघर बंद हो रहे हैं और सौर व पवन ऊर्जा सस्ती हो रही है. उम्मीद है कि 2030 तक ऑस्ट्रेलिया की 82 फीसदी बिजली नवीकरणीय स्रोतों से आएगी.

आखिरकार फॉसिल फ्यूल से भरे देश में कैनबरा स्वच्छ ऊर्जा का एक द्वीप-सा कैसे बना?

कैनबरा का डीकार्बनाइजेशन तक का सफर

2010 के मध्य में ऑस्ट्रेलिया की रूढ़िवादी सरकार ने स्वच्छ ऊर्जा योजनाएं बंद कर दी थी ताकि कोयला और गैस पर निर्भरता बनी रहे. इसके कारण, नवीकरणीय ऊर्जा में निवेश रुक गया, यह बात एसीटी सरकार के पर्यावरण और उत्सर्जन विभाग के उपनिदेशक ज्योफ्री रूटलेज ने बताई.

लेकिन एसीटी प्रशासन ने अकेले आगे बढ़ने का फैसला किया. उन्होंने सौर और पवन ऊर्जा में बड़ा निवेश किया ताकि बिजली ग्रिड को डीकार्बनाइज किया जा सके. रूटलेज के अनुसार, यह नेट जीरो उत्सर्जन, 2045 तक के लक्ष्य तक पहुंचने का सबसे "आसान और सस्ता” कदम था.

कैशलेस होती दुनिया में कैश लेना अनिवार्य बनाएगा ऑस्ट्रेलिया

द क्लाइमेट काउंसिल के स्वच्छ ऊर्जा विशेषज्ञ, ग्रेग बोर्न ने बताया कि एसीटी में पर्यावरण समर्थक सरकार 2001 से सत्ता में है. साथ ही, यहां की जनसंख्या भी जलवायु के प्रति जागरूक है, जिससे यह बदलाव संभव हुआ है. ग्रेग बोर्न ने कहा, "एसीटी सरकार के पास दूरदृष्टि थी."

स्थानीय सरकार के निरंतर शासन ने राष्ट्रीय स्तर की जलवायु राजनीति से बचने में मदद की. उन्होंने कहा, "वे संघीय सरकार और जीवाश्म ईंधन लॉबी की राजनीति को नजरअंदाज कर सकते थे." एसीटी ने यूरोप से सीख लिया. 2016 में कैनबरा ने जर्मनी के फ्राइबर्ग, सौर ऊर्जा शहर में एक प्रतिनिधिमंडल भेजा और अपना "रिन्यूएबल्स हब" बनाया. बोर्न ने बताया कि ऑस्ट्रेलियन नेशनल यूनिवर्सिटी में सौर ऊर्जा पैनलों पर शोध भी इस पहल का हिस्सा है.

जल्द ही, कैनबरा ने नवीकरणीय ऊर्जा कंपनियों को अवसर देना शुरू किया. जिससे देश में कई बड़े पवन और सौर ऊर्जा प्रोजेक्ट की शुरुवात हुई. रूटलेज ने बताया कि जैसे-जैसे ये नवीकरणीय ऊर्जा प्रोजेक्ट शुरू हुए कैनबरा ने जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता को कम कर दिया. रूटलेज ने कहा, "जब नवीकरणीय ऊर्जा में रुचि कम थी, तब कैनबरा ने शुरुआती कदम उठाए."

बड़े ऑस्ट्रेलियाई राज्यों के विपरीत, कैनबरा ने महंगे कोयला या गैस पावर प्लांट में निवेश नहीं किया था.

कैनबरा में केवल तीन सौर ऊर्जा फार्म है. लेकिन इसकी 95 फीसदी नवीकरणीय बिजली पांच पवन ऊर्जा फार्मों से आती है, जो न्यू साउथ वेल्स, विक्टोरिया और साउथ ऑस्ट्रेलिया में स्थित हैं. यह ऊर्जा सीधे कैनबरा नही जाती, बल्कि राष्ट्रीय ग्रिड से होकर जाती है, जिससे उनकी कोयला आधारित बिजली पर निर्भरता कम हो जाती है.

जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता को कम करने में सफलता

कैनबरा के लोग न्यू साउथ वेल्स के लोगों से सालाना 257-385 ऑस्ट्रेलियन डॉलर कम बिजली बिल भरते है. रूटलेज के अनुसार, इसका कारण है कि कैनबरा की नवीकरणीय ऊर्जा की कीमत तय है, जबकि जीवाश्म ईंधन की कीमतें बाजार में उतार-चढ़ाव के कारण महंगी हो सकती हैं.

कैनबरा का ऊर्जा नेटवर्क विकेन्द्रीकृत है. जिसका मतलब कि सिर्फ सौर और पवन ऊर्जा परियोजनाएं ही नहीं, बल्कि लोग भी ऊर्जा बनाते हैं. वे इलेक्ट्रिक वाहन चलाकर या अपने घरों में सोलर पैनल लगाकर बिजली पैदा करते हैं. पूरे ऑस्ट्रेलिया में सरकारी सब्सिडी के कारण दुनिया में प्रति व्यक्ति सबसे ज्यादा सोलर पैनल यहीं हैं.

2018 में कैनबरा ने 2045 तक नेट-जीरो का लक्ष्य तय किया था. इसका मकसद 1960 के पुराने मॉडल से दूर जाना था, जहां बड़े शहर विशाल पावर प्लांट पर निर्भर थे. बर्न ने बताया, "अब ऊर्जा हर जगह उत्पन्न की जाती है, हर जगह उपयोग की जाती है, और हर जगह संग्रहित की जाती है."

कैनबरा में बैटरी भंडारण परियोजनाएं बढ़ रही हैं. 5,000 घरों और व्यवसायों में बैटरियां लगाई जा रही हैं ताकि केंद्रीय ग्रिड पर निर्भरता कम की जा सके. रूटलेज ने बताया कि "व्हीकल-टू-ग्रिड" योजना चलाई जा रही है, इसमें इलेक्ट्रिक कार की बैटरियों का उपयोग घरों और अस्पतालों में इस्तेमाल किया जाता है ताकि बिजली गुल होने पर सपोर्ट मिल सके.

अगले पांच वर्षों में सभी सार्वजनिक आवासों को पूरी तरह बिजली से चलने वाला बनाने का लक्ष्य है. यानि, गैस और तेल के उपकरणों को धीरे-धीरे सभी घरों से खत्म किया जाएगा. कैनबरा, स्वच्छ ऊर्जा में अब बाकी ऑस्ट्रेलियाई राज्यों के लिए उदाहरण बन रहा है.

हालांकि, विपक्षी रूढ़िवादी पार्टी परमाणु ऊर्जा को बढ़ावा दे रही है, यह कहते हुए कि नवीकरणीय ऊर्जा "बेस लोड" नहीं दे सकती. लेकिन बर्न के अनुसार, यह सोच भविष्य के ऊर्जा सिस्टम के लिए पुरानी हो चुकी है.

अगले 10 वर्षों में बचे हुए कोयला पावर प्लांट भी बंद हो सकते हैं, ऐसा ऑस्ट्रेलियन क्लीन एनर्जी काउंसिल ने डीडब्ल्यू को बताया. इसी बीच, मौजूदा केंद्र सरकार ने हाल ही में दुनिया की सबसे बड़ी सौर और बैटरी परियोजना को मंजूरी दी.

बर्न के अनुसार, असली बदलाव यही है – "भविष्य को अपनाना, न कि अतीत से चिपके रहना."

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