देश की खबरें | उच्च न्यायालय पड़ताल करेगा: क्या केरल मानवाधिकार आयोग पीआईएल की सुनवाई कर सकता है?

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कोच्चि, 23 मार्च केरल उच्च न्यायालय इस सवाल की पड़ताल कर रहा है कि क्या केरल मानवाधिकार आयोग (केएचआरसी) किसी जनहित याचिका (पीआईएल) की सुनवाई कर सकता है।

उच्च न्यायालय ने इस सवाल की पड़ताल का फैसला उस वक्त किया, जब आयोग ने केरल ग्रामीण बैंक के खिलाफ एक शिकायत की सुनवाई शुरू की। आयोग के समक्ष दायर शिकायत में ऋणी व्यक्ति की मौत के बाद उसके परिवार से ऋण वसूलने से ग्रामीण बैंक को रोकने का अनुरोध किया गया था।

इस मामले की पड़ताल का निर्णय करते हुए उच्च न्यायालय ने आयोग के समक्ष दायर शिकायत की सुनवाई पर फिलहाल रोक लगा दी, और यह भी स्पष्ट कर दिया कि उसके ‘अंतरिक रोक’ के आदेश का लाभ उठाकर ‘बैंक ऋण की वसूली के लिए कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं करेगा।’

अदालत ने बैंक को निर्देश दिया कि वह इस मामले में ऋणी व्यक्ति के कानूनी प्रतिनिधि को पक्षकार बनाये।

आयोग के समक्ष की गयी शिकायत में मांगी गयी प्राथमिक राहत सामान्य प्रकृति की है, लेकिन इसमें सुरेश बाबू को 2017 में दिया गया कर्ज माफ करने की भी मांग की गई है, क्योंकि कर्जदार (सुरेश बाबू) की मौत 2019 में हो गयी थी।

आयोग ने शिकायत की सुनवाई करते हुए केरल ग्रामीण बैंक मलाप्पुरम के महाप्रबंधक से रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया था, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया था। इसके बाद आयोग ने उन्हें व्यक्तिगत तौर पर पेश होने के लिए दो बार निर्देश दिया था, लेकिन वह तब भी नहीं पेश हुए और न ही रिपोर्ट दाखिल की। इसके बाद आयोग ने बैंक महाप्रबंधक को ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी करके पूछा था कि क्यों न उनके (प्रबंधक के) खिलाफ आदेश का पालन नहीं करने के लिए कार्रवाई की जाए?

आयोग के इस आदेश को बैंक ने उच्च न्यायालय के समक्ष चुनौती दी है, जिसे यह निर्धारित करना है कि क्या केएचआरसी पीआईएल की सुनवाई कर सकता है।

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