देश की खबरें | उच्च न्यायालय ने आरोपी के विरूद्ध बलात्कार को लेकर प्राथमिकी दर्ज करने के आदेश पर रोक लगायी

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. दिल्ली उच्च न्यायालय ने यह कहते हुए एक व्यक्ति के विरूद्ध बलात्कार को लेकर प्राथमिकी दर्ज करने के निचली अदालत के आदेश पर रोक लगा दी कि पीड़िता ने अपनी शिकायत में खुद ही कहा है कि दोनों ने एक बौद्ध समारोह में शादी की थी।

नयी दिल्ली, चार अप्रैल दिल्ली उच्च न्यायालय ने यह कहते हुए एक व्यक्ति के विरूद्ध बलात्कार को लेकर प्राथमिकी दर्ज करने के निचली अदालत के आदेश पर रोक लगा दी कि पीड़िता ने अपनी शिकायत में खुद ही कहा है कि दोनों ने एक बौद्ध समारोह में शादी की थी।

उच्च न्यायालय ने कहा कि इस बात को लेकर बुनियादी संदेह है कि क्या इस अपराध के मूल तत्वों को उजागर किया गया है।

उच्च न्यायालय ने कहा कि यह शिकायतकर्ता महिला का ही रुख है कि उसने ताइवान में बौद्ध पद्धति से विवाह कर लिया और उसने इस बुनियाद पर इस व्यक्ति के विरुद्ध कई कार्यवाहियां दायर कर रखी हैं कि वह याचिकाकर्ता की विधिसम्मत पत्नी है।

न्यायमूर्ति अनूप जे भम्भानी ने 29 मार्च को अपने आदेश में कहा, ‘‘ यदि यह प्रतिवादी नंबर 2 (महिला) का रुख है, तो भादंसं की धारा 375 के तहत मुख्य अपराध बनेगा ही नहीं, क्योंकि शादी के वादे को झूठा नहीं कहा जा सकता है।’’

न्यायमूर्ति भम्भानी ने कहा कि इस चरण में इस मामले में अदालत आगे कुछ नहीं करना/कहना चाहती है और वह बस इतना ही कह सकती है कि प्राथमिकी दर्ज करने से इस व्यक्ति पर निश्चित ही असर पड़ेगा, क्योंकि अदालत की राय में उसके विरूद्ध प्राथमिकी दर्ज करने से उसे कानूनी परिणाम को झेलने के अलावा उसपर बहुत बड़ा कलंक लग जाएगा।

महिला ने अपनी पुलिस शिकायत में दावा किया है कि तलाकशुदा इस व्यक्ति ने शादी का झूठा वादा कर उसे शारीरिक संबंध बनाया, जिसके बाद वह गर्भवती भी हो गयी।

उसने आरोप लगाया कि दिसंबर, 2018 में वे दोनों एक बौद्ध विवाह पद्धति से शादी के बंधन में बंध गये और इस कार्यक्रम में करीबी दोस्त पहुंचे थे। उसने कहा कि बाद में यह व्यक्ति इस बात से पीछे हट गया कि उसने उसके साथ कभी शादी की।

उसके बाद महिला ने इस व्यक्ति के खिलाफ बलात्कार, धोखाधड़ी, पीछा करने , गलत तरीके से बंधक बनाने आदि कथित अपराधों को लेकर प्राथमिकी दर्ज करने की मांग करते हुए शिकायत की।

शुरू में मजिस्ट्रेट अदालत ने प्राथमिकी दर्ज करने की महिला का अनुरोध खारिज कर दिया। उसने उसे सत्र अदालत में चुनौती दी, जिसने व्यक्ति के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया। तब यह व्यक्ति उच्च न्यायालय चला गया।

उच्च न्यायालय ने निचली अदालत के आदेश पर रोक लगा दी और पुलिस से निचली अदालत के 27 मार्च के आदेश को रद्द करने के आरोपी के अनुरोध पर पुलिस एवं महिला से जवाब मांगा।

उच्च न्यायालय ने कहा कि गुजारा भत्ता, बच्चे से मिलने, उसे संरक्षण में लेने जैसे कई मुद्दों पर दोनों के बीच कानूनी लड़ाई चल रही है।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)

Share Now

संबंधित खबरें

लाड़की बहन योजना: eKYC पूरा न होने से लाखों महिलाएं सूची से बाहर, क्या सरकार देगी सुधार का एक और मौका?

PBKS vs RCB, IPL 2026 61st Match Scorecard: धर्मशाला में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ने पंजाब किंग्स के सामने रखा 223 रनों का टारगेट, वेंकटेश अय्यर और विराट कोहली ने खेली धमाकेदार पारी; यहां देखें पहली पारी का स्कोरकार्ड

DC vs RR, IPL 2026 62nd Match Winner Prediction: अरुण जेटली स्टेडियम में आज दिल्ली कैपिटल्स और राजस्थान रॉयल्स के बीच खेला जाएगा रोमांचक मुकाबला, मैच से पहले जानें कौनसी टीम मार सकती हैं बाजी

DC vs RR Stats In IPL: आईपीएल इतिहास में एक दूसरे के खिलाफ कुछ ऐसा रहा हैं दिल्ली कैपिटल्स बनाम राजस्थान रॉयल्स का प्रदर्शन, यहां देखें दोनों टीमों के आकंड़ें