देश की खबरें | उच्च न्यायालय ने सेवानिवृत्त प्रोफेसर की ग्रेच्युटी तथा अर्जित छुट्टियों के पैसे रोकने पर जेएनयू से जवाब मांगा

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. दिल्ली उच्च न्यायालय में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के पूर्व प्रोफेसर ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय ने अक्टूबर 2018 में उनकी सेवानिवृत्ति के बाद से उनकी ग्रेचुएटी और अर्जित अवकाश के पैसे अवैध और मनमाने तरीके से रोके हुए हैं। इसके बाद अदालत ने जेएनयू से मंगलवार को इस मामले में जवाब तलब किया।

नयी दिल्ली, 30 जून दिल्ली उच्च न्यायालय में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के पूर्व प्रोफेसर ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय ने अक्टूबर 2018 में उनकी सेवानिवृत्ति के बाद से उनकी ग्रेचुएटी और अर्जित अवकाश के पैसे अवैध और मनमाने तरीके से रोके हुए हैं। इसके बाद अदालत ने जेएनयू से मंगलवार को इस मामले में जवाब तलब किया।

न्यायमूर्ति ज्योति सिंह ने प्रोफेसर रामकृष्ण रामस्वामी की याचिका पर जेएनयू को नोटिस जारी किया और उसे इस मामले में अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। इस मामले में अब छह अगस्त को आगे सुनवाई होगी।

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वह भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, दिल्ली के रसायन विज्ञान विभाग में प्रेफेसर (विजिटिंग) के तौर पर सेवा दे रहे हैं।

सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की स्थायी अधिवक्ता मोनिका अरोड़ा ने उच्च न्यायालय को बताया कि प्रोफेसर 2018 में बिना पूर्व मंजूरी के उज्बेकिस्तान चले गए थे और वहां से लौटने के बाद सेवानिवृत्त हो गए।

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उन्होंने बताया कि नवंबर 2018 में जेएनयू की कार्यकारी परिषद में उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही करने के लिए एक प्रस्ताव पारित किया था और उनपर भारी जुर्माना लगाया था।

अरोड़ा ने कहा कि जेएनयू ने विश्वविद्यालय के कुलाधिपति – भारत के राष्ट्रपति— को पत्र लिखकर अनुशासनात्मक कार्यवाही के लिए मंजूरी मांगी है लेकिन आज की तारीख तक इसकी मंजूरी नहीं मिली है। इसलिए विश्वविद्यालय ने उनकी ग्रेच्युटी और अर्जित अवकाश के पैसे रोक लिए हैं।

प्रोफेसर रामस्वामी की ओर से पेश वकील अमित जॉर्ज ने जेएनयू की दलीलों का विरोध करते हुए कहा कि उनके मुवक्किल की छुट्टियां उज्बेकिस्तान से लौटने के बाद मंजूर कर ली गई थी।

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