देश की खबरें | उच्च न्यायालय का घरेलू उड़ानों में सिख यात्रियों के कृपाण रखने की अनुमति पर रोक लगाने से इनकार

नयी दिल्ली, 18 अगस्त दिल्ली उच्च न्यायालय ने घरेलू उड़ानों के दौरान सिखों को छह इंच तक के ब्लेड वाली कृपाण लेकर चलने की अनुमति संबंधी फैसले पर स्थगन का अंतरिम आदेश जारी करने से बृहस्पतिवार को इनकार कर दिया।

मुख्य न्यायाधीश सतीशचंद्र शर्मा और न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद की पीठ ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा, ‘‘ कोई स्थगन नहीं।’ पीठ ने नागर विमानन महानिदेशालय से इस याचिका पर उसका रूख जानना चाहा। याचिका में इस संबंध में चार मार्च, 2022 को जारी की गयी अधिसूचना को चुनौती दी गयी है।

पीठ ने इस याचिका पर प्रतिवादियों से जवाब मांगा है। याचिका में ‘व्यवहारिक हल’ की गुजाइंश ढूढने के वास्ते एक समिति गठित करने का अनुरोध किया गया है ताकि उड़ान के दौरान ले जाई जाने वाली कृपाण ‘उपयुक्त डिजाइन वाली हो’ तथा उसमें चार सेंटीमीटर से अधिक का ब्लेड न लगा हो।

वकील हर्ष विभोरे की इस याचिका में कहा गया है कि वर्तमान मान्य आयामों के तहत उड़ानों में कृपाण ले जाने की अनुमति देना ‘ विमानन सुरक्षा के लिए खतरनाक है’ और ‘यदि कृपाण को केवल धर्म के लिहाज से सुरक्षित माना जाता है तो किसी को भी अचरज होता है कि फिर सिलाई/बुनाई वाली सूई, नारियल, पेंचकस एवं छोटे पेन चाकू आदि कैसे खतरनाक मान लिये गये हैं और उनपर रोक लगा दी गयी है। ’’

याचिका में कहा गया है, ‘‘ प्रतिकूल अवधारणा से अलग, कृपाण एक ब्लेड ही होती है जिसका उपयोग सैंकड़ों हत्याओं में किया गया है और कई में तो उच्चतम न्यायालय ने फैसले सुनाये। इस तरह, कृपाण से आकाश में दहशत फैल सकती है और विमानन सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।’’

चार मार्च, 2022 को जारी एक अधिसूचना में केंद्र सरकार ने कहा था कि अपवादस्वरूप सिख यात्रियों के लिए घरेलू मार्गों पर भारत में किसी भी नागरिक उड़ान में छह इंच तक के ब्लेड वाले कृपाण (लेकिन मूठ समेत वह कुल नौ इंच से अधिक न हो) लेकर चलने की अनुमति होगी।

इस मामले की अगली सुनवाई 15 दिसंबर को होगी।

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