देश की खबरें | उच्च न्यायालय का एनडीआरएफ मुख्यालय के लिए झुग्गियों को गिराने पर रोक से इनकार
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंगलवार को उस स्थान की झुग्गी बस्ती को गिराने पर रोक लगाने से इनकार कर दिया जिसे राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) को उसके मुख्यालय के निर्माण के लिए आवंटित किया गया है। लेकिन अदालत निर्देश दिया कि दो जून के बजाय 15 जून को कार्रवाई की जाए।
नयी दिल्ली, 30 मई दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंगलवार को उस स्थान की झुग्गी बस्ती को गिराने पर रोक लगाने से इनकार कर दिया जिसे राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) को उसके मुख्यालय के निर्माण के लिए आवंटित किया गया है। लेकिन अदालत निर्देश दिया कि दो जून के बजाय 15 जून को कार्रवाई की जाए।
न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला ने वसंत विहार में झुग्गी बस्ती प्रियंका गांधी कैंप के निवासियों की एक याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (डीयूएसआईबी) से याचिकाकर्ताओं के पुनर्वास के लिए याचिका पर विचार करने और उन्हें एक अस्थायी आश्रय में स्थानांतरित करने के लिए कहा।
न्यायाधीश ने समय सीमा बढ़ाते हुए कहा कि 19 मई, 2023 को ढांचों को गिराने की सूचना पर दो जून, 2023 के बजाय 15 जून, 2023 से अमल किया जाये।
याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि परिवार पिछले तीन दशकों से क्षेत्र में रह रहे हैं और 2015 की पुनर्वास नीति के तहत पुनर्वास के हकदार थे।
एनडीआरएफ की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) चेतन शर्मा ने कहा कि मुख्यालय का निर्माण राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला है।
उन्होंने कहा, ‘‘यह कहीं अधिक महत्वपूर्ण है। सीपी वगैरह भूकंपीय क्षेत्र में हैं...आसन्न खतरा है। यह प्रतिस्पर्धी हित का मामला नहीं बल्कि गंभीरता को देखते हुए अहम जरूरत है।’’
एएसजी शर्मा ने कहा कि याचिकाकर्ता परिवारों को ‘‘बेघर’’ बनाने का सुझाव नहीं है क्योंकि ढांचों को गिराए जाने की सूचना में ही कहा गया है कि वे लागू नीति के अनुसार डीयूएसआईबी द्वारा संचालित रैन बसेरों में रह सकते हैं।
अदालत को यह भी सूचित किया गया कि विवादित भूमि दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) द्वारा 2020 में एनडीआरएफ को आवंटित की गई थी और वर्तमान में इसका मुख्यालय पट्टे के परिसर में स्थित है जिसके लिए किराए के रूप में करोड़ों रुपये का भुगतान किया जा रहा है।
अदालत ने कहा कि चूंकि एनडीआरएफ मुख्यालय के निर्माण को रोका नहीं जा सकता है, हितधारकों के हितों को संतुलित करने की आवश्यकता है। अदालत ने संबंधित अधिकारियों से झुग्गी के निवासियों के पुनर्वास के मुद्दे पर विचार करने के लिए कहा।
अदालत ने स्पष्ट किया कि मौजूदा क्लस्टर से रैन बसेरों में जाने के संबंध में खर्च को डीयूएसआईबी द्वारा वहन किया जाएगा और जहां तक पुनर्वास का संबंध है, बोर्ड वर्तमान याचिका को आवेदन के रूप में मानेगा और दो सप्ताह के भीतर इस मुद्दे को हल करेगा।
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