देश की खबरें | उच्च न्यायालय ने अन्नाद्रमुक की पूर्व मंत्री वलारमति के खिलाफ पुनरीक्षण मामला शुरू किया

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. मद्रास उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को अन्नाद्रमुक की पूर्व मंत्री बी वलारमति और उनके रिश्तेदारों को 2012 में निचली अदालत द्वारा आय से अधिक संपत्ति के मामले में बरी किए जाने के बाद शुरू किए गए आपराधिक पुनरीक्षण मामले पर नोटिस जारी किया।

चेन्नई, आठ सितंबर मद्रास उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को अन्नाद्रमुक की पूर्व मंत्री बी वलारमति और उनके रिश्तेदारों को 2012 में निचली अदालत द्वारा आय से अधिक संपत्ति के मामले में बरी किए जाने के बाद शुरू किए गए आपराधिक पुनरीक्षण मामले पर नोटिस जारी किया।

दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 397 के तहत अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए न्यायमूर्ति एन आनंद वेंकटेश ने स्वतः संज्ञान लेते हुए आपराधिक पुनरीक्षण मामला शुरू किया और राज्य सरकार के अलावा वलारमति, उनके पति के वी बालासुब्रमण्यम और उनके बेटों बी मुथमिजन, बी मूवेंद्रन को नोटिस जारी किया।

अभियोजन पक्ष (सतर्कता और भ्रष्टाचार रोधी निदेशालय-डीवीएसी) का मामला यह था कि वलारमति ने 2001 और 2006 के बीच राज्य मंत्रिमंडल में मंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान अपने और अपने रिश्तेदारों के नाम पर 1.70 करोड़ रुपये की संपत्ति अर्जित की थी, जो उनकी आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक थी।

घटनाओं का विवरण देते हुए और अभियोजन तथा निचली अदालत द्वारा अपनाई गई प्रक्रिया में खामियों की ओर इशारा करते हुए न्यायाधीश ने कहा कि आरोपमुक्त करने के आदेश का अवलोकन करने के बाद, इस अदालत का प्रथम दृष्टया मानना है कि विशेष अदालत ने आरोपमुक्त करने की याचिका पर अपने अधिकार क्षेत्र से परे कदम उठाया।

न्यायाधीश ने कहा कि प्रथम दृष्टया आरोपमुक्त करने के आदेशों से कई स्पष्ट त्रुटियां उजागर होती हैं जिन्हें किसी भी प्रशिक्षित कानूनी दिमाग के लिए नजरअंदाज करना असंभव था।

न्यायाधीश ने कहा कि आरोपमुक्त करने के संबंधित आदेश में यह देखा गया कि अनुच्छेद 11 में, विशेष अदालत ने कहा कि ‘‘आरोपपत्र और दायर जवाबी कार्रवाई के बीच विभिन्न विरोधाभास हैं...।’’

न्यायाधीश ने कहा कि यदि विशेष अदालत को लगता था कि आगे की जांच आवश्यक है तो उसे इस आशय का निर्देश पारित करने से कोई नहीं रोक सकता। लेकिन ऐसा करने के बजाय अदालत आरोपियों को बरी करने के लिए आगे बढ़ी।

न्यायाधीश ने कहा कि दूसरे शब्दों में कहा जाए तो विशेष अदालत ने आरोपियों को इस आधार पर बरी नहीं किया कि उन सभी के खिलाफ मामला निराधार था, बल्कि इस तथ्य के कारण कि विशेष अदालत की राय में जांच अधूरी थी।

न्यायाधीश ने कहा कि इस अदालत को पता है कि आरोपी नंबर एक (वलारमति) की पार्टी (अन्नाद्रमुक) मई 2011 में सत्ता में आई और आरोपी व्यक्तियों को दिसंबर, 2012 को बरी कर दिया गया था।

न्यायाधीश ने कहा कि अन्नाद्रमुक मई 2021 तक सत्ता में रही, और आरोपी नंबर एक सरकार के दूसरे कार्यकाल (2016-2021) में पाठ्यपुस्तक निगम की अध्यक्ष बन गई। न्यायाधीश ने कहा कि आरोपी और उसकी पार्टी के सत्ता में लौटते ही तुरंत आरोपमुक्त किए जाने की कार्यप्रणाली सुनियोजित योजना के तहत थी।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)

Share Now

संबंधित खबरें

LSG vs KKR, IPL 2026 38th Match Date And Time: कब और कितने बजे से खेला जाएगा लखनऊ सुपर जायंट्स बनाम कोलकाता नाइट राइडर्स के बीच रोमांचक मुकाबला. इस स्टेडियम में भिड़ेंगी दोनों टीमें, यहां जानें वेन्यू समेत मैच से जुड़ी सभी जानकारी

RR vs SRH, IPL 2026 36th Match Scorecard: जयपुर में सनराइजर्स हैदराबाद ने राजस्थान रॉयल्स को 5 विकेट से रौंदा, ईशान किशन और अभिषेक शर्मा ने जड़ा ताबड़तोड़ अर्धशतक; यहां देखें मैच का स्कोरकार्ड

LSG vs KKR, IPL 2026 38th Match Stats And Preview: टूर्नामेंट के 38वें मुकाबले में कोलकाता नाइट राइडर्स को हराकर जीत की राह पर लौटना चाहेगी लखनऊ सुपर जायंट्स, मैच से पहले जानें स्टैट्स एंड प्रीव्यू

CSK vs GT, IPL 2026 37th Match Date And Time: कब और कितने बजे से खेला जाएगा चेन्नई सुपर किंग्स बनाम गुजरात टाइटंस के बीच रोमांचक मुकाबला. इस स्टेडियम में भिड़ेंगी दोनों टीमें, यहां जानें वेन्यू समेत मैच से जुड़ी सभी जानकारी