देश की खबरें | उच्च न्यायालय ने सारदा घोटाले की आरोपी को सीबीआई अधिकारियों के साथ सहयोग करने का निर्देश दिया
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कोलकाता, एक दिसंबर कलकत्ता उच्च न्यायालय ने मंगलवार को सारदा चिटफंड घोटाले की आरोपी देबजानी मुखर्जी को निवेशकों के हजारों करोड़ रुपये के धन के मामले में सीबीआई की जांच में पूरी तरह सहयोग करने का निर्देश दिया।
मुखर्जी की जमानत अर्जी पर सुनवाई स्थगित करते हुए न्यायमूर्ति संजीब बनर्जी और न्यायमूर्ति अनिरुद्ध रॉय की खंडपीठ ने निर्देश दिया कि मामला आठ सप्ताह बाद फिर सुनवाई के लिए आएगा।
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पीठ ने निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता को इस मामले में किसी तरह की पूछताछ और उनकी आवाज के नमूने के मामले में पूरी तरह सहयोग करना चाहिए।
मुख्य आरोपी सुदीप्त सेन की करीबी सहयोगी और मामले में कथित रूप से संलिप्त रही मुखर्जी ने दावा किया कि वह करीब सात साल से हिरासत में है और अब जमानत दी जानी चाहिए।
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सीबीआई की ओर से अतिरिक्त सॉलिसीटर जनरल वाई जे दस्तूर ने दलील दी कि याचिकाकर्ता ने मामले से जुड़े अन्य आरोपियों के साथ जांच को तथा अदालत को उलझाने के लिए जाल बुना ताकि मामले में देरी हो।
दस्तूर ने दलील दी कि सह-आरोपी सुदीप्त सेन और इस याचिकाकर्ता से हिरासत में पूछताछ के लिए साधारण आवेदन में इसलिए महीनों लग गये क्योंकि अनगिनत आपत्तियां दर्ज कराई गयीं।
उन्होंने यह भी कहा कि मामले में सामने आए कुछ टेप रिकॉर्ड के साक्ष्यों से मिलान करने के लिहाज से मुखर्जी की आवाज का नमूना लेने के लिए 27 नवंबर को आदेश प्राप्त किया गया है।
अतिरिक्त सॉलिसीटर जनरल ने दलील दी कि याचिकाकर्ता की आवाज का नमूना लेने से भी पहले इस स्तर पर उनके अनुरोध पर विचार करना उचित नहीं होगा।
सारदा समूह ने पश्चिम बंगाल में कथित तौर पर लाखों लोगों को कई चिटफंड योजनाओं के माध्यम से चूना लगाया था। कंपनी 2013 में बैठ गयी और लोगों को हजारों करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। इसके प्रमोटर सुदीप्त सेन और देबजानी मुखर्जी को उसी साल कश्मीर के सोनमर्ग से गिरफ्तार किया गया था।
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