मुंबई, नौ जून बंबई उच्च न्यायालय ने एमएसबीएसएचएसई को एक 17 वर्षीय लड़के को 12वीं कक्षा का अंकपत्र जारी करने का निर्देश देते हुए कहा कि उसे इस बात में कोई तर्क नजर नहीं आता कि जिन छात्रों ने 10वीं में विज्ञान विषय का विकल्प नहीं चुना था उन्हें बाद में पाठ्यक्रम में दाखिला क्यों नहीं दिया जा सकता।
महाराष्ट्र राज्य माध्यमिक व उच्च माध्यमिक शिक्षण बोर्ड (एमएसबीएसएचएसई) ने उच्च माध्यमिक परीक्षा में बैठने के बाद लड़के का कक्षा 11 और 12 में दाखिला रद्द करते हुए दावा कि वह विज्ञान विषय में दाखिला के लिए अयोग्य था, क्योंकि उसने 10वीं कक्षा में विषय के तौर पर इसका विकल्प नहीं चुना था।
न्यायमूर्ति गौतम पटेल और न्यायमूर्ति नीला गोखले की पीठ ने सात जून के आदेश में कहा कि उसे कोई कारण नजर नहीं आता कि 10वीं कक्षा के छात्र जो विज्ञान विषय नहीं चुनते हैं, उन्हें बाद में स्ट्रीम में प्रवेश क्यों नहीं देना चाहिए।
यह आदेश कृष चोर्डिया द्वारा दायर याचिका पर पारित किया गया, जिसमें राज्य बोर्ड द्वारा उनके दाखिले को रद्द करने और उनकी कक्षा 12वीं का अंकपत्र जारी करने से इनकार करने के फैसले को चुनौती दी गई थी।
अदालत ने कहा, ‘‘एसएससी और आईसीएसई स्कूलों में विषयों का चुनाव 10वीं कक्षा में नहीं किया जाता है, बल्कि कम से कम एक या दो साल पहले कक्षा 8वीं या 9वीं के आसपास किया जाता है। यह उम्मीद करना निश्चित रूप से अनुचित है कि 14 साल के बच्चे का निर्णय उसके पूरे भविष्य का निर्धारक होगा।’’
अदालत ने आगे कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के अनुसार, पूरे पैटर्न को बदलने का प्रस्ताव है। अदालत ने कहा, ‘‘विज्ञान-कला-वाणिज्य में से चुनने के पुराने चलन को खत्म किया जाना है और यह सही भी है। अब जोर क्षमता की पहचान करने और उसको उभारने तथा सीखने के लचीले विकल्प प्रदान करने पर है।’’
अदालत ने कहा, ‘‘हम यह पूछने को मजबूर हैं कि चौथे प्रतिवादी (राज्य बोर्ड) का उद्देश्य क्या है: छात्रों की सहायता करना और शिक्षा के अवसर प्रदान करना तथा उन्हें प्रोत्साहित करना या उन्हें रोकने के नए तरीके खोजना?’’
अदालत ने कहा कि अगर याचिकाकर्ता को अंतरिम राहत दी जाती है, तो बोर्ड के लिए कोई पक्षपात नहीं होगा। अदालत ने अंतिम सुनवाई जारी रहने और याचिका के निस्तारण तक उसकी कक्षा 12वीं के अंकपत्र को जारी करने का निर्देश दिया।
पीठ ने कहा कि चोर्डिया ‘‘राज्य बोर्ड के एक पूरी तरह से सिद्धांतवादी दृष्टिकोण और गार्गी जूनियर कॉलेज, नासिक की ओर से एक कथित चूक के बीच फंस गए।’’
अदालत ने कहा, ‘‘परिणाम यह है कि युवा याचिकाकर्ता का पूरा शैक्षिक करियर और भविष्य खतरे में है।’’
याचिका के मुताबिक चोर्डिया ने 2020-21 में इंडियन सर्टिफिकेट ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (आईसीएसई) बोर्ड की 10वीं कक्षा की परीक्षा दी थी, जिसके बाद उन्होंने गार्गी जूनियर कॉलेज में विज्ञान विषय में दाखिला लिया। याचिकाकर्ता ने 2023 में 12वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा दी थी।
हालांकि, मार्च में, उन्हें कॉलेज से एक पत्र मिला जिसमें कहा गया था कि कक्षा 11वीं और 12वीं में उनका दाखिला बोर्ड द्वारा रद्द कर दिया गया, क्योंकि उन्होंने कक्षा 10 में विज्ञान विषय का विकल्प नहीं चुना था। चोर्डिया ने अपनी याचिका में कहा कि उन्हें बोर्ड के आदेश की प्रति नहीं दी गई।
इस बीच, चोर्डिया वेल्लोर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी की संयुक्त प्रवेश परीक्षा में बैठे और उस स्कोर के आधार पर उन्हें एक अनंतिम प्रवेश पत्र दिया गया। जब मई में एचएससी के नतीजे घोषित किए गए, तो चोर्डिया का अंकपत्र अपलोड नहीं किया गया और उन्हें अयोग्य दिखाया गया।
अदालत ने कहा कि चोर्डिया ने 11वीं और 12वीं कक्षा पूरी कर ली है, दोनों में औसत से बेहतर प्रदर्शन किया है और प्रतिस्पर्धी प्रवेश परीक्षाओं में शामिल हुए हैं। अदालत ने कहा, ‘‘अब उन्हें बताया जा रहा है कि वह विज्ञान पढ़ने में समर्थ नहीं हैं क्योंकि उन्होंने तीन साल पहले 10वीं कक्षा में विज्ञान नहीं लिया था।’’
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