देश की खबरें | आरोपियों की संपत्ति ध्वस्त करने के खिलाफ याचिकाओं पर मंगलवार को उच्चतम न्यायालय में सुनवाई

नयी दिल्ली, 16 सितंबर उच्चतम न्यायालय मंगलवार को उन याचिकाओं पर सुनवाई करने वाला है, जिनमें यह मुद्दा उठाया गया है कि कई राज्यों में कुछ अपराधिक मामलों के आरोपियों की संपत्तियां ध्वस्त की जा रही हैं।

शीर्ष अदालत ने दो सितंबर को इन याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सवाल किया था कि महज आरोपी होने के चलते किसी की संपत्ति कैसे ध्वस्त की जा सकती है।

न्यायालय ने कहा था, ‘‘किसी व्यक्ति के महज आरोपी होने के चलते उसका मकान कैसे ध्वस्त किया जा सकता है? यदि वह दोषी भी है, तो भी कानून में निर्धारित प्रक्रिया का पालन किये बिना ऐसा नहीं किया जा सकता।’’

हालांकि, शीर्ष न्यायालय ने कहा था कि अदालत सार्वजनिक सड़कों पर किसी अनधिकृत निर्माण या अतिक्रमण का बचाव नहीं करेगी।

न्यायालय की वेबसाइट पर 17 सितंबर के लिए अपलोड की गई वाद सूची के अनुसार, ये याचिकाएं सुनवाई के लिए न्यायमूर्ति बी आर गवई और न्यायमूर्ति के वी विश्वनाथ की पीठ के समक्ष आएंगी।

पीठ ने दो सितंबर को कहा था, ‘‘हम देश भर के लिये कुछ खास दिशानिर्देश निर्धारित करने का प्रस्ताव करते हैं, ताकि उठाये गए मुद्दे से जुड़ी चिंताओं पर ध्यान दिया जा सके।’’

पक्षकारों की ओर से पेश हुए वकीलों से पीठ ने सुझाव देने को कहा था, ताकि न्यायालय उपयुक्त दिशानिर्देश तैयार कर सके।

उत्तर प्रदेश की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इस मामले में राज्य सरकार द्वारा पूर्व में दाखिल एक हलफनामे का हवाला दिया था।

उन्होंने कहा था कि हलफनामे में कहा गया है कि महज इसलिए कि किसी व्यक्ति पर किसी अपराध में शामिल रहने का आरोप है, उसकी अचल संपत्ति को ध्वस्त करने का आधार कभी नहीं हो सकता।

मेहता के अनुसार, राज्य ने कहा है कि किसी अचल संपत्ति का ध्वस्तीकरण "केवल किसी प्रकार के उल्लंघन के लिए और संबंधित नगरपालिका कानून या क्षेत्र के विकास प्राधिकरणों को नियंत्रित करने वाले कानून में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार’’ हो सकता है।

उन्होंने कहा था कि किसी भी अचल संपत्ति को महज इस आधार पर ध्वस्त नहीं किया जा सकता कि उस संपत्ति का मालिक या उस पर कब्जा रखने वाला व्यक्ति किसी अपराध में शामिल है।

शीर्ष अदालत 'जमीयत उलेमा-ए-हिंद' और अन्य द्वारा दायर याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है, जिसमें विभिन्न राज्य सरकारों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश देने का अनुरोध किया गया है कि दंगों और हिंसा के मामलों में आरोपियों की संपत्तियों को ध्वस्त नहीं किया जाए।

'जमीयत उलेमा-ए-हिंद' ने इससे पहले राष्ट्रीय राजधानी के जहांगीरपुरी इलाके में कुछ इमारतों को गिराए जाने को लेकर शीर्ष अदालत में एक याचिका दायर की थी।

मुस्लिम संगठन ने शीर्ष अदालत में याचिका दायर कर उत्तर प्रदेश सरकार को यह सुनिश्चित करने का निर्देश देने का भी अनुरोध किया था कि राज्य में हिंसा के आरोपियों की संपत्तियों को नहीं ध्वस्त किया जाए।

संगठन ने यह भी कहा था कि उचित प्रक्रिया का पालन किए बिना और बगैर पूर्व सूचना के इस तरह की कोई भी ध्वस्तीकरण की कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए।

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