देश की खबरें | उच्च न्यायालय ने पूर्व उग्रवादियों, अन्य को आतंक वित्तपोषण मामले में बरी किया
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. गुवाहाटी उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को असम के दीमा हसाओ जिले में करोड़ों रुपये के आतंकी वित्तपोषण मामले में उग्रवादी से नेता बने निरंजन होजाई, ज्वेल गोरलोसा और एनसीएचएसी के पूर्व मुख्य कार्यकारी सदस्य मोहित होजाई सहित सभी आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया।
गुवाहाटी, 11 अगस्त गुवाहाटी उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को असम के दीमा हसाओ जिले में करोड़ों रुपये के आतंकी वित्तपोषण मामले में उग्रवादी से नेता बने निरंजन होजाई, ज्वेल गोरलोसा और एनसीएचएसी के पूर्व मुख्य कार्यकारी सदस्य मोहित होजाई सहित सभी आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया।
अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि फैसले की प्रतियां पुलिस और राज्य न्यायिक अकादमी के समक्ष रखी जाएं, ताकि गंभीर आरोपों वाले मामले जांच एजेंसी, अभियोजन और अदालत की ओर से गंभीर चूक के कारण खारिज न हों।
मुख्य न्यायाधीश संदीप मेहता और न्यायमूर्ति मिताली ठाकुरिया की खंडपीठ ने मई 2017 के एनआईए विशेष न्यायालय के फैसले को रद्द कर दिया, जिसने आतंक वित्त पोषण मामले में 13 आरोपियों को दोषी ठहराया था।
यह मामला ‘उत्तरी कछार पर्वतीय स्वायत्त परिषद’ (एनसीएचएसी) के विकासात्मक कोष को हथियार खरीदने और उग्रवादी संगठन दिमा हलाम दाओगाह (ज्वेल गुट) की अन्य गतिविधियों को अंजाम देने के लिए इस्तेमाल किए जाने के आरोपों से संबंधित है।
इस मामले में उग्रवादी समूह के नेताओं के अलावा सरकारी कर्मचारियों को भी आरोपी बनाया गया था। यह असम में ऐसा पहला मामला था, जिसकी जांच राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) ने की थी।
अदालत ने 230 पन्नों के अपने आदेश में कहा, ‘‘हमें यह मानने में कोई झिझक नहीं है कि अभियोजन पक्ष अपने इस आरोप को साबित करने के लिए विश्वसनीय और कानूनी रूप से स्वीकार्य साक्ष्य पेश करने में बुरी तरह विफल रहा है कि दिमा हलाम दाओगाह (ज्वेल गुट) किसी भी प्रकार की हिंसक गतिविधियों में शामिल एक उग्रवादी समूह था या एनसीएचएसी के कोष का उपयोग उग्रवादी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए किया गया।’’
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