देश की खबरें | तिलक अगर जिंदा होते तो अपने नाम का पुरस्कार मोदी को देना पसंद नहीं करते: पटोले
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पुणे, 11 जुलाई कांग्रेस की महाराष्ट्र इकाई के प्रमुख नाना पटोले ने मंगलवार को कहा कि अगर आज लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक जिंदा होते, तो वह यह पसंद नहीं करते कि उनके नाम का एक पुरस्कार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को दिया जाए।
पुणे में स्थित तिलक स्मारक मंदिर ट्रस्ट (हिंद स्वराज संघ) ने एक अगस्त को लोकमान्य तिलक की 103वीं जयंती पर लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार प्रधानमंत्री मोदी को देने का निर्णय लिया है।
ट्रस्ट के मुताबिक, आत्मनिर्भर भारत की अवधारणा के तहत प्रधानमंत्री के सर्वोच्च नेतृत्व में भारत ने प्रगति की सीढ़ियां चढ़ी हैं।
पटोले ने दिल्ली में पत्रकारों से कहा कि ट्रस्ट को पंडित जवाहरलाल नेहरू के समय से मजबूती मिली।
उन्होंने कहा, “यह उनका (ट्रस्ट का) मुद्दा (परमाधिकार) है कि वे किस आधार पर पुरस्कार दे रहे हैं लेकिन लोकमान्य तिलक अगर जिंदा होते, तो उन्हें यह पसंद नहीं आता और वह इसका विरोध करते।”
हालांकि, कांग्रेस नेता ने इसके बारे में विस्तारपूर्वक बात नहीं की।
आयोजकों के अनुसार, पुरस्कार समारोह में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के संस्थापक शरद पवार को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया है, जबकि उनके भतीजे व उपमुख्यमंत्री अजित पवार आमंत्रित लोगों में शामिल हैं।
ट्रस्ट ने मोदी को पुरस्कार देने की घोषणा करते हुए सोमवार को कहा था, ‘‘प्रधानमंत्री मोदी ने नागरिकों में देशभक्ति की भावना जगाई और भारत को वैश्विक मानचित्र पर स्थापित किया। उनकी दृढ़ता और प्रयासों पर विचार करते हुए और उनके काम को रेखांकित करने के लिए तिलक स्मारक मंदिर ट्रस्ट के न्यासियों ने सर्वसम्मति से उन्हें इस पुरस्कार के लिए चुना है।’’
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