देश की खबरें | ज्ञानवापी-श्रृंगार गौरी मामला: हिन्दू पक्ष की भी दलीलें हुई पूरी, अगली सुनवाई 25 जुलाई को

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. ज्ञानवापी-श्रृंगार गौरी मामले में वाराणसी की जिला अदालत में हिन्दू पक्ष की दलीलें बृहस्पतिवार को पूरी हो गयीं। अदालत ने अगली सुनवाई के लिए 25 जुलाई की तारीख नियत की है।

वाराणसी (उप्र), 21 जुलाई ज्ञानवापी-श्रृंगार गौरी मामले में वाराणसी की जिला अदालत में हिन्दू पक्ष की दलीलें बृहस्पतिवार को पूरी हो गयीं। अदालत ने अगली सुनवाई के लिए 25 जुलाई की तारीख नियत की है।

हिन्दू पक्ष के अधिवक्ता शिवम गौड़ ने बताया कि वादी राखी सिंह की तरफ से दलीलें पूरी हो गयी हैं। उत्तर प्रदेश सरकार, जिलाधिकारी और पुलिस कमिश्नरेट की तरफ से सरकारी अधिवक्ता महेन्द्रनाथ पांडेय ने भी दलीलें रख दी हैं। उन्होंने बताया कि अब अगली सुनवाई की तारीख पर मुस्लिम पक्ष अपना प्रतिवाद रखेगा। इस मामले में अब दोनों पक्ष अपनी-अपनी दलीलें रख चुके हैं।

गौड़ ने बताया, ''उपासना स्थल अधिनियम, वक्फ अधिनियम और काशी विश्वनाथ अधिनियमन को लेकर, जो हमने दलीलें पूर्व में अदालत के समक्ष रखी थी, उसी को आज पूरा किया है। हमने अदालत से कहा है कि हमारा मुकदमा पूरी तरह से सुनवाई योग्य है।''

गौरतलब है कि श्रंगार गौरी की नियमित पूजा और विग्रहों की सुरक्षा के आदेश देने के आग्रह वाली एक याचिका वाराणसी के सिविल जज (सीनियर डिवीजन) की अदालत में दायर की गयी थी।

अदालत ने गत 26 अप्रैल को ज्ञानवापी-श्रृंगार गौरी परिसर में वीडियोग्राफी-सर्वे करने का आदेश दिया था। इसके खिलाफ ज्ञानवापी मस्जिद प्रबंधन कमेटी ने उच्चतम न्यायालय में अर्जी दाखिल करते हुए निचली अदालत के इस आदेश को वर्ष 1991 के उपासना स्थल अधिनियम के विरुद्ध बताते हुए सर्वे पर रोक लगाने का आग्रह किया था।

हालांकि, न्यायालय ने सर्वे पर रोक लगाने से इंकार कर दिया था। लेकिन मामले की सुनवाई जिला अदालत में स्थानांतरित करने के आदेश दिये थे।

ज्ञानवापी परिसर में सर्वे के दौरान हिन्दू पक्ष ने मस्जिद के वजूखाने में कथित शिवलिंग मिलने का दावा किया था। इसी आधार पर हिन्दू पक्ष ने कथित शिवलिंग की पूजा करने की मांग उठायी थी।

सर्वे की रिपोर्ट 19 मई को अदालत में दाखिल की गयी थी।

मुस्लिम पक्ष का दावा है कि ज्ञानवापी का मामला वर्ष 1991 के उपासना स्थल अधिनियम के खिलाफ है, लिहाजा यह मामला अदालत में सुनवाई करने लायक नहीं है। जिला अदालत में इसी पर सुनवाई हो रही है कि यह प्रकरण सुनवाई के योग्य है या नहीं।

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