देश की खबरें | गुजरात भाजपा और विहिप ने बाबरी विध्वंस मामले में फैसले का स्वागत किया

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. गुजरात में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी, विश्व हिंदू परिषद तथा प्रवीण तोगड़िया के संगठन अंतरराष्ट्रीय हिंदू परिषद ने बुधवार को सीबीआई की विशेष अदालत के उस फैसले का स्वागत किया जिसमें बाबरी विध्वंस के सभी 32 आरोपियों को बरी कर दिया गया है ।

एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

अहमदाबाद, 30 सितंबर गुजरात में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी, विश्व हिंदू परिषद तथा प्रवीण तोगड़िया के संगठन अंतरराष्ट्रीय हिंदू परिषद ने बुधवार को सीबीआई की विशेष अदालत के उस फैसले का स्वागत किया जिसमें बाबरी विध्वंस के सभी 32 आरोपियों को बरी कर दिया गया है ।

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सी आर पाटिल ने इस फैसले का स्वागत करते हुये इसे 'सत्य की जीत' करार दिया।

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पाटिल ने कहा, 'एक बार फिर से सत्य विजयी रहा । भारतीय न्यायपालिका का हृदय से आभार । जय श्री राम ।'

गुजरात के उप मुख्यमंत्री नितिन पटेल ने कहा, 'हम बेहद खुश हैं कि अदालत ने लाल कृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी एवं उमा भारती सरीखे राष्ट्रीय नेताओं को इस मामले से बरी कर दिया ।'

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पटेल ने गांधीनगर में संवाददाताओं से कहा, 'इस फैसले ने अब इस मामले पर पूर्ण विराम लगा दिया है। अयोध्या में राम मंदिर के लिये काम शुरू हो चुका है।'

उन्होंने कहा, 'अब, हम उम्मीद करते हैं कि इस मामले में कोई नया विवाद पैदा नहीं होगा और लोग भाईचारे के साथ रहेंगे तथा देश की समृद्धि के लिये मिल कर काम करेंगे ।'

तोगड़िया की अगुवाई वाली ​अंतरराष्ट्रीय हिंदू परिषद ने कहा कि यह फैसला देर से आया है ।

संगठन ने बयान जारी कर कहा, 'सीबीआई की अदालत ने आज सभी 32 हिंदुओं को बरी कर दिया है और हम दिल से इस फैसले का स्वागत करते हैं । यह और खुशी की बात होती अगर यह फैसला थोड़ा पहले तब आ गया होता जब (आरोपियों) महंत अवैद्यनाथ, अशोक सिंघल एवं विष्णु हरि डालमियां जैसे नेता जीवित थे ।'

विश्व हिन्दू परिषद की गुजरात इकाई ने कहा, 'देर आये दुरूस्त आये ।'

विहिप के प्रदेश सचिव अशोक रवाल ने कहा, 'हम इस फैसले का स्वागत करते हैं । प्रत्येक हिंदू को वर्षों से इस फैसले का इंतजार था । हम इस बात से खुश हैं कि वे नेता बरी हो गये हैं जिन्होंने अपना जीवन देश को समर्पित कर दिया ।

रवाल ने कहा, 'मैं 1992 में कार सेवक के तौर पर मौके पर मौजूद था । मुझे अच्छे से याद है कि मौके पर मौजूद नेताओं ने कार सेवकों को शांत कराने का प्रयास किया । लेकिन कार सेवकों में इतना रोष था कि उन्होंने नेताओं की बात नहीं सुनी और विवादित ढांचा ध्वस्त कर दिया । किसी ने उन्हें नहीं भड़काया था ।'

रंजन

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