देश की खबरें | जीएसटी धोखाधड़ी : न्यायालय ने फरार आरोपी को गिरफ्तारी से संरक्षण देने से इनकार किया
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नयी दिल्ली, 14 फरवरी उच्चतम न्यायालय ने जीएसटी धोखाधड़ी मामले में भारतीय पासपोर्ट रद्द होने के बाद मलेशिया के कुआलालंपुर में फंसे एक फरार आरोपी को गिरफ्तारी से संरक्षण देने से शुक्रवार को इनकार कर दिया।
प्रधान न्यायाधीश संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति संजय कुमार की पीठ के समक्ष आरुषि अग्रवाल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राजू रामचंद्रन ने अनुरोध किया कि उनके पति निशांत जांच में शामिल होने के लिए भारत आने के इच्छुक हैं।
निशांत और कुछ अन्य पर सरकार को धोखा देने और माल एवं सेवा कर (जीएसटी) कानून के तहत अवैध रूप से कर लाभ प्राप्त करने के लिए आधार और पैन कार्ड का इस्तेमाल करके फर्जी कंपनियां बनाने का आरोप है।
निशांत का भारतीय पासपोर्ट ‘ब्लू कॉर्नर’ नोटिस जारी होने के बाद रद्द कर दिया गया था। निशांत वर्तमान में कुआलालंपुर में है और अपनी पत्नी आरुषि के माध्यम से उसने उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर की है।
रामचंद्रन ने कहा कि निशांत को भारत आने की अनुमति दी जानी चाहिए, क्योंकि उनका पासपोर्ट रद्द कर दिया गया है। उन्होंने मामले में अग्रिम जमानत का अनुरोध किया। रामचंद्रन ने यह भी कहा कि कई अन्य आरोपी पहले से ही जमानत पर हैं।
प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘आप (निशांत) दुबई, मलेशिया और इंडोनेशिया गए। लेकिन आप जांच में शामिल होने के लिए भारत नहीं आए। उसे यहां आने से किसने रोका था?’’
उत्तर प्रदेश सरकार के वकील ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि निशांत करोड़ों रुपये के धोखाधड़ी मामले में मुख्य आरोपी है और उसने अपराध को अंजाम देने के लिए छह लाख पैन कार्ड का इस्तेमाल किया।
पीठ ने स्पष्ट किया कि आरोपी को आत्मसमर्पण करना होगा और भारत आना होगा। साथ ही, आरुषि और विदेश मंत्रालय को यह सुनिश्चित करने के लिए समन्वय करने का निर्देश दिया कि आरोपी को वापस लाया जाए।
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