बेंगलुरू, 29 मई कर्नाटक आवासीय शैक्षणिक संस्थान सोसायटी (केआरईआईएस) द्वारा संचालित विद्यालयों के छात्रों के दसवीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा में जबरदस्त प्रदर्शन से उत्साहित राज्य सरकार ने इन स्कूलों को निजी विद्यालयों की तरह आधुनिक एवं उन्नत करने का संकल्प लिया है।
इन स्कूलों को आर्थिक और सामाजिक रूप से पिछड़े समुदायों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के लिए स्थापित किया गया था। ये स्कूल नौ मई को सेकेंडरी स्कूल लिविंग सर्टिफिकेट (एसएसएलसी) के नतीजे आने के बाद सुर्खियों में आए। बागलकोट जिले के मुधोल में मोरारजी देसाई आवासीय विद्यालय की अंकिता बसप्पा कोन्नूर 625 में से 625 अंक हासिल करके अव्वल रहीं।
अंकिता इस साल एकमात्र छात्रा रहीं जिन्हें सभी विषयों में शत-प्रतिशत अंक मिले।
वह एक साधारण पृष्ठभूमि से आती हैं। उनके पिता बसप्पा कोन्नूर एक किसान हैं और उनकी माता एक गृहिणी हैं जो अक्सर खेती में अपने पति की मदद करती हैं।
राज्य के समाज कल्याण मंत्री एच सी महादेवप्पा ने 'पीटीआई' को बताया, "समाज कल्याण विभाग के स्कूलों के इस शानदार प्रदर्शन को जारी रखने के लिए मैंने यह सुनिश्चित करने का फैसला किया है कि हमारे सभी सरकारी स्कूलों को सबसे उन्नत स्कूलों के बराबर अपग्रेड किया जाए।"
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार कर्नाटक में 833 आवासीय विद्यालय हैं।
महादेवप्पा ने समाज कल्याण विभागों द्वारा संचालित छह प्रकार के सरकारी स्कूलों के प्रदर्शन का डेटा भी साझा किया।
कर्नाटक एसएसएलसी परीक्षा में 73.4 प्रतिशत छात्र उत्तीर्ण हुए, जबकि सरकारी आवासीय विद्यालयों में 96 प्रतिशत छात्र उत्तीर्ण हुए।
इस वर्ष एसएसएलसी परीक्षा में ज्यादातर छात्रों ने अच्छा प्रदर्शन किया।
मंत्री ने कहा कि 798 सरकारी आवासीय विद्यालयों में से 358 में 100 प्रतिशत विद्यार्थी पास हुए।
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