नयी दिल्ली, नौ अगस्त केंद्रीय मंत्रिमंडल जल्द ही बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के वित्त पोषण के पूंजी स्रोतों को व्यापक बनाने के लिए ऋण गारंटी संवर्धन निगम के गठन के प्रस्ताव पर विचार करेगा। सूत्रों ने यह जानकारी दी।
राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन (एनआईपी) पर कार्यबल के अनुसार भारत को उच्च आर्थिक वृद्धि के लक्ष्य हासिल करने के लिए अगले पांच वर्षों के दौरान बुनियादी ढांचे में 111 लाख करोड़ रुपये का निवेश करने की जरूरत है।
सूत्रों ने बताया कि वित्त पोषण की बड़ी जरूरत को पूरा करने के लिए ऋण गारंटी संवर्धन निगम बुनियादी ढांचे के लिए फंड जुटाने में मदद करेगा।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वित्त वर्ष 2019-20 के बजट में घोषणा की थी कि बुनियादी ढांचे के वित्तपोषण के लिए पूंजी के स्रोतों को बढ़ाने के लिए ऋण गारंटी संवर्धन निगम की स्थापना की जाएगी।
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इसके लिए आरबीआई पहले ही ऋण गारंटी संवर्धन निगम के लिए नियमन को अधिसूचित कर चुका है।
सूत्रों ने कहा कि आईआईएफसीएल, एलआईसी, पीएफसी, आरईसी और इसी तरह की अन्य कंपनियों की साझेदारी में निगम को गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (एनबीएफसी) के रूप में गठित किए जाने की संभावना है।
सूत्रों ने बताया कि प्रस्तावित निगम की स्थापना के लिए एक कैबिनेट नोट तैयार किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि निगम के पास 20,000 करोड़ रुपये की अधिकृत पूंजी हो सकती है और पूरी हो चुकी परियोजनाओं द्वारा जारी बांडों को गारंटी देगा।
ऋण संवर्धन से कंपनियों को अपनी बांड रेटिंग बेहतर बनाने में मदद मिलती है और उन्हें सस्ती ब्याज दरों पर ऋण मिलने की गुंजाइश बढ़ जाती है।
सार्वजनिक क्षेत्र की एक वित्तीय कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि बुनियादी ढांचे के लिए दीर्घावधि के वित्त पोषण की उपलब्धता एक चुनौती है।
वित्त मंत्री ने 111 लाख करोड़ रुपये के राष्ट्रीय बुनियादी ढांचा पाइपलाइन के लिए वित्त पोषण का समर्थन करते हुए इस साल बजट में लगभग 22,000 करोड़ रुपये दिए थे।
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