देश की खबरें | गुजरात के सरकारी स्कूलों में लगभग निजी संस्थानों के समान बुनियादी सुविधाएं : उच्च न्यायालय
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अहमदाबाद, 21 जून गुजरात उच्च न्यायालय ने मंगलवार को कहा कि सरकारी स्कूलों के बुनियादी ढांचे में सुधार के लिए राज्य के अधिकारियों द्वारा उठाए गए कदम न केवल संतोषजनक हैं, बल्कि लगभग निजी संस्थानों के समान हैं।
मुख्य न्यायाधीश अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति आशुतोष शास्त्री की पीठ ने अदालत द्वारा स्वत: संज्ञान ली गई जनहित याचिका के जवाब में सरकार के हलफनामे में दिए गए विवरण के आधार पर यह टिप्पणी की। हलफनामे में स्कूल भवनों और खेल के मैदानों तथा शौचालयों जैसी बुनियादी सुविधाओं के बारे में बताया गया है।
अदालत ने छोटा उदयपुर जिले के वागलवाड़ा गांव में एक स्कूल की इमारत के ढहने और महिसागर जिले के प्रतापपुरा में एक स्कूल की इमारत के कुछ हिस्सों के गिरने तथा कुछ छात्रों के इस घटना में घायल होने के बारे में अखबार की एक खबर के आधार पर मामले का स्वत: संज्ञान लिया था।
पीठ ने कहा कि हलफनामे में दिए गए विवरण से पता चलता है कि कक्षाएं संचालित करने के लिए भवन समेत पीने के पानी, शौचालय, खेल के मैदान जैसी बुनियादी सुविधाएं जिला, तालुका स्तर पर प्रदान की गई हैं। अदालत ने कहा कि महाधिवक्ता ने आश्वासन दिया है कि विद्या समीक्षा केंद्र, समग्र शिक्षा केंद्र या गुजरात स्कूल शिक्षा परिषद के संज्ञान में लाए जाने पर बुनियादी ढांचे में किसी भी तरह की कमी को दूर किया जाएगा।
सरकार ने अदालत को सूचित किया कि वागलवाड़ा में एक पक्का भवन बनाया गया है और प्रतापपुरा के स्कूल के संबंध में आवश्यक निर्देश जारी किए गए हैं। अदालत ने कहा कि वह ‘‘न केवल राज्य द्वारा उठाए गए कदमों से संतुष्ट है, बल्कि इस तरह की कमियों का उल्लेख किए जाने पर उठाए गए तत्काल कदमों के लिए सराहना भी करती है।’’
अतिरिक्त सचिव द्वारा दाखिल हलफनामे के अनुसार 47,07,846 छात्रों के साथ कुल 32,319 सरकारी स्कूल हैं। लगभग सभी स्कूलों में शौचालय की व्यवस्था और पीने के पानी की आपूर्ति है, वहीं कम से कम 6,443 में खेल के मैदान नहीं हैं। हलफनामे के अनुसार पहली कक्षा से 8वीं तक छात्रों के स्कूल छोड़ने का अनुपात, जो 2004-05 में लगभग 18.79 प्रतिशत था, 2021 में घटकर 3.07 प्रतिशत हो गया।
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