जरुरी जानकारी | सरकार ने आईओसी के नए चेयरमैन की तलाश के लिए प्रक्रिया फिर शुरू की
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. सरकार ने इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी) के नए चेयरमैन की नियुक्ति के लिए पात्र उम्मीदवारों से आवेदन आमंत्रित किए हैं। इससे मौजूदा चेयरमैन श्रीकांत माधव वैद्य के पद पर बने रहने को लेकर अनिश्चितता समाप्त हो गई है।
नयी दिल्ली, पांच जून सरकार ने इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी) के नए चेयरमैन की नियुक्ति के लिए पात्र उम्मीदवारों से आवेदन आमंत्रित किए हैं। इससे मौजूदा चेयरमैन श्रीकांत माधव वैद्य के पद पर बने रहने को लेकर अनिश्चितता समाप्त हो गई है।
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने अपनी वेबसाइट पर प्रकाशित विज्ञापन में अग्रणी संस्थानों से स्नातकोत्तर प्रबंधन डिग्री प्राप्त तथा नेतृत्वकारी भूमिकाओं में कम से कम पांच साल का अनुभव रखने वाले इंजीनियर, चार्टर्ड अकाउंटेंट और कॉस्ट अकाउंटेंट से तीन जुलाई तक आवेदन मांगे हैं।
इसमें कहा गया कि आंतरिक उम्मीदवारों के लिए पात्रता की आयु सीमा 58 वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए और बाहरी उम्मीदवारों के लिए यह सीमा 57 वर्ष है। सेवानिवृत्ति की आयु 60 वर्ष है।
वैद्य ने एक जुलाई, 2020 को भारत की सबसे बड़ी पेट्रोलियम कंपनी के चेयरमैन का पद संभाला था। उन्हें 31 अगस्त, 2023 को सेवानिवृत्त होना था, जब वह 60 वर्ष हो गए थे।
हालांकि, चार अगस्त, 2023 के एक आधिकारिक आदेश के अनुसार, उन्हें एक विरले कदम के तहत उनकी सेवानिवृत्ति की तारीख से एक वर्ष के लिए यानी एक सितंबर, 2023 से 31 अगस्त 2024 तक के लिए अनुबंध के आधार पर पुनः नियुक्ति दी गई।
इसके बाद 31 अगस्त, 2024 के बाद आईओसी का प्रमुख कौन होगा, यह पता लगाने के लिए तीन सदस्यीय खोज-सह-चयन समिति का गठन किया गया।
इस समिति की अध्यक्षता लोक उपक्रम चयन बोर्ड (पीईएसबी) के चेयरमैन ने की। इसमें पेट्रोलियम सचिव तथा हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) के पूर्व चेयरमैन एम. के. सुराना सदस्य के रूप में शामिल हैं। हालांकि, समिति आयु-पात्रता के मुद्दे पर कुछ खास नहीं कर पाई।
सूत्रों ने बताया कि मंत्रालय ने शुरू में 61 वर्ष से कम आयु के किसी भी व्यक्ति को इस पद के लिए विचार करने की अनुमति देने का प्रस्ताव रखा था। इससे वैद्य इस पद के लिए पात्र हो गए। हालांकि, इस प्रस्ताव को प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) से मंजूरी नहीं मिली।
इसके बाद सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के प्रमुखों की नियुक्ति की पुरानी प्रणाली को पुनः लागू कर दिया, जिसमें सेवानिवृत्ति की आयु 60 वर्ष कर दी गई।
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