जरुरी जानकारी | सरकार निर्यात बढ़ाने को लेकर एमएसएमई की मदद के लिये उठा रही है कदम: मोदी

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नयी दिल्ली, 30 जून प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बृहस्पतिवार को कहा कि उनकी सरकार निर्यात बढ़ाने के लिये छोटे उद्यमों की मदद को हर कदम उठा रही है। उन्होंने कहा कि इसके साथ ही उनकी क्षमताओं के पूर्ण उपयोग को लेकर नई नीतियां बनायी जा रही हैं।

मोदी ने यहां ‘उद्यमी भारत’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि देश के निर्यात को बढ़ाने और उत्पादों को नये बाजारों तक पहुंचाने के लिये भारत के एमएसएमई क्षेत्र का मजबूत होना महत्वपूर्ण है। उन्होंने इस मौके पर सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई) के लिये कई पहल की भी शुरुआत की।

उन्होंने कहा, ‘‘हमारी सरकार आपकी काबिलियत और अपार क्षमता को ध्यान में रखकर निर्णय कर रही है और नई नीतियां बना रही हैं।’’

प्रधानमंत्री ने कहा कि जो कदम उठाये गये हैं और उठाये जा रहे हैं, उनका उद्देश्य एमएसएमई को बढ़ावा देना और गुणवत्ता बढ़ाना है।

इस मौके पर उन्होंने एमएसएमई के प्रदर्शन को बेहतर बनाने और उसे गति देने के लिए 6,000 करोड़ रुपये की योजना ‘रैंप’ (रेजिंग एंड एक्सिलेरेटिंग एमएसएमई परफार्मेन्स) की शुरुआत की। साथ ही उन्होंने वस्तुओं और सेवाओं के निर्यात को प्रोत्साहित करने के लिये ‘पहली बार निर्यात करने वाले एमएसएमई निर्यातकों के क्षमता निर्माण (सीबीएफटीई)’ की योजना शुरू की।

इसके अलावा प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) में नई विशेषताओं की घोषणा की।

उन्होंने पीएमईजीपी लाभार्थियों को 2022-23 के लिये डिजिटल तरीके से सहायता का भी हस्तांतरण किया। साथ ही एमएसएमई आइडिया हैकॉथन, 2022 के परिणामों की घोषणा की और एमएसएमई पुरस्कार, 2022 वितरित किए। इसके अलावा आत्मनिर्भर भारत कोष में 75 एमएसएमई को ‘डिजिटल इक्विटी’ प्रमाणपत्र भी दिये।

प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार निर्यात बढ़ाने के लिये एमएसएमई की मदद के लिये कदम उठा रही है। भारतीय दूतावासों को भी इस पर काम करने को कहा गया है।

उन्होंने कहा कि समाज के कमजोर तबके के लिये उद्यमिता अपनाने के रास्ते में सबसे बड़ी बाधा बिना किसी गारंटी के कर्ज लेने को लेकर थी।

वर्ष 2014 के बाद सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास के साथ उद्यमशीलता का दायरा बढ़ाने का निर्णय किया गया है।

उन्होंने कहा कि प्रत्येक भारतीय के लिये उद्यमिता को सुगम बनाने में मुद्रा योजना को महत्वपूर्ण भूमिका निभानी है।

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘बिना गारंटी के बैंक ऋण की इस योजना ने देश में महिला उद्यमियों, दलित, पिछड़े, आदिवासी उद्यमियों का एक बड़ा वर्ग तैयार किया है। इस योजना के तहत अबतक करीब 19 लाख करोड़ रुपये का कर्ज दिया जा चुका है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘कर्ज लेने वालों में करीब सात करोड़ ऐसे उद्यमी हैं, जिन्होंने पहली बार उद्यम शुरू किये हैं और नए उद्यमी बने हैं।’’

मोदी ने कहा कि मुद्रा योजना के तहत लाभार्थियों को दिये गये 36 करोड़ रुपये कर्ज में से 70 प्रतिशत ऋण महिला उद्यमियों को दिये गये हैं।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम को 2014 के बाद नया रूप दिया गया था क्योंकि यह 2008-2012 के बीच की अवधि में अपने लक्ष्यों को प्राप्त नहीं कर पाया। वर्ष 2014 से अबतक इस कार्यक्रम के तहत 40 लाख से अधिक नौकरियां सृजित हुई हैं।

समावेशी विकास की बात करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘ट्रांसजेंडर’ उद्यमियों को उनके लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिये हरसंभव सहायता प्रदान की जा रही है।

उन्होंने यह भी कहा कि खादी और ग्रामोद्योग का कारोबार पहली बार एक लाख करोड़ रुपये के पार हो गया है।

मोदी ने कहा, ‘‘यह इसलिए संभव हुआ है क्योंकि गांवों में हमारे छोटे उद्यमियों और हमारी बहनों ने बहुत मेहनत की है। खादी की बिक्री पिछले आठ साल में चार गुना बढ़ी है।’’

प्रधानमंत्री ने एमएसएमई क्षेत्र को भरोसा दिलाया कि सरकार ऐसी नीतियां बनाने के लिये प्रतिबद्ध है जो उनकी जरूरतों को पूरा करती हैं और उनके साथ सक्रिय रूप से चलती हैं।

छह हजार करोड़ रुपये की ‘रैंप’ (रेजिंग एंड एक्सिलेरेटिंग एमएसएमई परफॉर्मेन्स) योजना का उद्देश्य मौजूदा एमएसएमई योजनाओं के प्रभाव में वृद्धि के साथ राज्यों में छोटे उद्यमों की क्षमता और दायरे को बढ़ाना है।

वहीं वस्तुओं और सेवाओं के निर्यात को प्रोत्साहित करने के लिये ‘पहली बार निर्यात करने वाले एमएसएमई निर्यातकों के क्षमता निर्माण (सीबीएफटीई)’ की योजना का मकसद छोटे उद्यमों को वैश्विक बाजार के लिये अंतरराष्ट्रीय मानकों के उत्पादों और सेवाओं की पेशकश को लेकर प्रोत्साहित करना है। इससे वैश्विक मूल्य श्रृंखला में एमएसएमई की भागीदारी बढ़ेगी।

प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) की नई विशेषताओं में विनिर्माण क्षेत्र के लिये अधिकतम परियोजना लागत 25 लाख रुपये से बढ़ाकर 50 लाख रुपये तथा सेवा क्षेत्र में 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 20 लाख रुपये करना शामिल है।

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