देश की खबरें | पर्यावरण क्षेत्र में संरक्षण नहीं, कारोबार सुगमता को प्राथमिकता दे रही है सरकार: कांग्रेस

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. कांग्रेस ने संसद से जैव विविधता (संशोधन) विधेयक, 2023 को मंजूरी मिलने के बाद मंगलवार को केंद्र सरकार पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि इस सरकार में पर्यावरण एवं वन क्षेत्र में संरक्षण के मुकाबले कारोबार सुगमता को ज्यादा प्राथमिकता दी जा रही है।

नयी दिल्ली, एक अगस्त कांग्रेस ने संसद से जैव विविधता (संशोधन) विधेयक, 2023 को मंजूरी मिलने के बाद मंगलवार को केंद्र सरकार पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि इस सरकार में पर्यावरण एवं वन क्षेत्र में संरक्षण के मुकाबले कारोबार सुगमता को ज्यादा प्राथमिकता दी जा रही है।

पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने यह दावा भी किया कि विधेयक में संसद की संयुक्त समिति की ज्यादातर सिफारिशों को शामिल नहीं किया गया।

संसद ने मंगलवार को जैव विविधता (संशोधन) विधेयक, 2023 को मंजूरी दे दी, जिसमें जैव संसाधनों के संरक्षण, पेटेंट संबंधी आवेदन की प्रक्रिया को सुगम बनाने पर जोर दिया गया है।

राज्यसभा ने विधेयक को चर्चा के बाद ध्वनि मत से पारित कर दिया। लोकसभा इसे पहले ही पारित कर चुकी है।

रमेश ने एक बयान में कहा, ‘‘जैव विविधता (संशोधन) विधेयक, 2021 पहली बार 16 दिसंबर, 2021 को लोकसभा में पेश किया गया था। विधेयक में जैव विविधता अधिनियम, 2002 में कई दूरगामी संशोधन थे...प्रक्रिया के तहत विधेयक को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पर्यावरण एवं वन संबंधी स्थायी समिति को भेजा जाना चाहिए था। लेकिन ऐसा नहीं हुआ।’’

उन्होंने कहा, ‘‘विधेयक को स्थायी समिति को भेजने की बजाय एक संयुक्त समिति का गठन किया गया, जिसके अध्यक्ष सत्ताधारी दल के एक वरिष्ठ और काबिल सांसद हैं। इस समिति के अधिकांश सदस्य भी सत्ताधारी दल के ही हैं। मुझे भी उस समिति में अपनी भूमिका निभाने का मौका मिला था।’’

रमेश ने कहा कि उन्होंने संयुक्त समिति के समक्ष कई बिंदुओं को रखा था, जिसका कई सदस्यों ने समर्थन किया था।

रमेश ने दावा किया, ‘‘30 जून, 2022 को राज्यसभा में मेरा पिछला कार्यकाल समाप्त होने के साथ ही संयुक्त समिति की मेरी सदस्यता भी ख़त्म हो गई थी। इसके बाद मुझे इसकी बैठकों में आमंत्रित नहीं किया गया, जबकि अगले ही दिन से राज्यसभा में मेरा अगला कार्यकाल शुरू हो गया था।’’

उन्होंने कहा, ‘‘संयुक्त समिति ने 21 प्रमुख सिफारिशें की हैं। मैं भी उनका पूर्ण रूप से समर्थन करता हूं। लेकिन जो बात मुझे पूरी तरह से अस्वीकार्य है, वह यह कि 25 जुलाई 2023 को लोकसभा और आज राज्यसभा द्वारा पारित विधेयक में समिति की इन सिफ़ारिशों में से एक को छोड़कर बाकी सभी को ख़ारिज़ कर दिया गया है। ऐसा पहले शायद ही कभी हुआ हो, मेरी याद में तो कभी नहीं हुआ है।’’

उन्होंने आरोप लगाया कि संयुक्त समिति में शामिल सभी सदस्यों की मेहनत का अपमान है।

रमेश ने यह दावा भी किया, ‘‘मोदी सरकार के दावों एवं वास्तव में उनके द्वारा किए गए कार्यों के बीच जो भारी अंतर होता है, उसका यह एक और उदाहरण है। पर्यावरण और वन के क्षेत्र में सरकार कारोबार सुगमता को सुरक्षा, संरक्षण और सुधार के मुकाबले ज्यादा प्राथमिकता दे रही है।’’

हक

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