जरुरी जानकारी | त्योहारों में कीमतों पर अंकुश के लिए सरकार ने खाद्य तेलों पर सीमा शुल्क और घटाया

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. सरकार ने त्योहारों के सीजन के दौरान खाद्य तेलों की बढ़ती कीमतों में कमी लाने के लिए पाम तेल, सोया तेल और सूरजमुखी तेल पर मूल सीमा शुल्क में कटौती की है। इससे सरकार को करीब 1,100 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान होगा। सरकार ने शनिवार को यह जानकारी दी है।

नयी दिल्ली, 11 सितंबर सरकार ने त्योहारों के सीजन के दौरान खाद्य तेलों की बढ़ती कीमतों में कमी लाने के लिए पाम तेल, सोया तेल और सूरजमुखी तेल पर मूल सीमा शुल्क में कटौती की है। इससे सरकार को करीब 1,100 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान होगा। सरकार ने शनिवार को यह जानकारी दी है।

सरकार की इस पहल के बारे में तेल उद्योग का मानना है कि इसे खाद्य तेलों की खुदरा कीमतों में 4-5 रुपये प्रति लीटर की कमी आ सकती है।

उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग की एक विज्ञप्ति के अनुसार, इन तीनों खाद्य तेलों के कच्चे और रिफाइंड दोनों प्रकारों पर सीमा शुल्क कम किया गया है। लेकिन कच्चे पाम तेल पर कृषि उपकर 17.5 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत कर दिया गया है।

वित्त मंत्रालय ने 11 सितंबर से अगले आदेश तक इन तेलों के सीमा शुल्क में कटौती को अधिसूचित किया है।

वित्त मंत्रालय ने शुक्रवार को देर रात जारी एक अधिसूचना में कहा कि कच्चे पाम तेल पर आयात शुल्क को 10 प्रतिशत से घटाकर 2.5 प्रतिशत कर दिया गया है, जबकि कच्चे सोया तेल और कच्चे सूरजमुखी तेल पर इसे 7.5 प्रतिशत से घटाकर 2.5 प्रतिशत कर दिया गया है।

इस कटौती से कच्चे पाम तेल, कच्चे सोयाबीन तेल और कच्चे सूरजमुखी के तेल पर प्रभावी शुल्क घटकर 24.75 प्रतिशत रह जाएगा, जबकि रिफाइंड पाम तेल, सोया तेल और सूरजमुखी तेल पर प्रभावी शुल्क 35.75 प्रतिशत का होगा।

भारत में हाल के दिनों में तमाम सरकारी उपायों के बावजूद खाद्य तेल की कीमतों में बेरोकटोक जारी वृद्धि के बीच यह कदम उठाया गया है। भारत अपनी खाद्य तेल मांग का लगभग 60 प्रतिशत आयात से पूरा करता है।

खाद्य और उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कीमतों के बढ़ने की वजह से खाद्य तेलों की घरेलू कीमतें वर्ष 2021-22 के दौरान उच्चस्तर पर बनी रही हैं जो मुद्रास्फीति के साथ-साथ उपभोक्ताओं के लिहाज से गंभीर चिंता का विषय है।’’

इसमें कहा गया है कि खाद्य तेलों पर लगने वाला आयात शुल्क उन महत्वपूर्ण कारकों में से एक है, जिसके कारण खाद्य तेलों की पहुंच लागत और घरेलू कीमतें प्रभावित हुई।

कुछ महीने पहले खाद्य तेलों पर आयात शुल्क कम किया गया था और अब घरेलू आपूर्ति को बढ़ावा देने और कीमतों में वृद्धि को रोकने के लिए इसे और घटा दिया गया है।

मंत्रालय के मुताबिक, इन खाद्य तेलों पर सीमा शुल्क में की गई मौजूदा कटौती से 1,100 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान होने का अनुमान है। मंत्रालय ने कहा कि इन तेलों पर सीमा शुल्क में पहले की गई कटौती से 3,500 करोड़ रुपये के अतिरिक्त राजस्व के नुकसान के साथ सरकार को कुल 4,600 करोड़ रुपये का नुकसान होगा।

सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एसईए) के कार्यकारी निदेशक बी.वी. मेहता ने पीटीआई- को बताया कि ताजा कटौती से खाद्य तेलों की खुदरा कीमतों में 4-5 रुपये प्रति लीटर की कमी आ सकती है।

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