सरकार ने पांच किलो मुफ्त अनाज योजना को अगले साल मार्च तक बढ़ाया

केंद्र ने बुधवार को प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (पीएमजीकेएवाई) के तहत प्रति माह 5 किलो मुफ्त खाद्यान्न की आपूर्ति योजना को चार महीने के लिये मार्च 2022 तक बढ़ाने का फैसला किया. सरकार के इस निर्णय से सरकारी खजाने पर 53,344 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ आयेगा.

पीएम नरेंद्र मोदी (Photo Credits: DD News)

नयी दिल्ली, 24 नवंबर: केंद्र ने बुधवार को प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (पीएमजीकेएवाई) के तहत प्रति माह 5 किलो मुफ्त खाद्यान्न की आपूर्ति योजना को चार महीने के लिये मार्च 2022 तक बढ़ाने का फैसला किया. सरकार के इस निर्णय से सरकारी खजाने पर 53,344 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ आयेगा. युवाओं के लिए खुशखबरी! मोदी सरकार ने दी नेशनल अप्रेंटिसशिप ट्रेनिंग स्कीम को अगले 5 वर्षों तक जारी रखने की मंजूरी. 

कोविड-19 महामारी के प्रभाव से उबर रहे गरीबों की मदद के इरादे से यह निर्णय किया गया है.

इस फैसले से राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए) के तहत आने वाले 80 करोड़ से अधिक राशन कार्ड धारकों को लाभ होगा. यह फैसला, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में किया गया.

पीएमजीकेएवाई योजना के तहत मुफ्त खाद्यान्न वितरण करने की घोषणा पिछले साल मार्च में कोविड महामारी के दौरान गरीबों को राहत प्रदान करने के लिए की गई थी. राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए) के तहत 2-3 रुपये प्रति किलो की बेहद सब्सिडी प्राप्त दर पर प्रदान किए जाने वाले सामान्य कोटे के ऊपर पीएमजीकेएवाई योजना के तहत यह मुफ्त खाद्यान्न वितरण होगा.

पीएमजीकेएवाई योजना की अवधि को कई बार बढ़ाया जा चुका है, और पिछला समय विस्तार 30 नवंबर तक ही वैध है. इस फैसले की जानकारी देते हुए सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा कि मंत्रिमंडल ने पीएमजीकेएवाई कार्यक्रम को मार्च, 2022 तक चार महीने के लिए बढ़ा दिया है.

इस योजना के समय का विस्तार के कारणों के बारे में पूछे जाने पर, ठाकुर ने बताया कि प्रधानमंत्री उन गरीबों की मदद करना चाहते थे, जो कोविड-19 महामारी से गुजरे हैं. उन्होंने कहा कि पीएमजीकेएवाई योजना का और चार महीने का विस्तार किये जाने से राजकोष पर 53,344 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा. उन्होंने कहा कि पीएमजीकेएवाई की कुल लागत लगभग 2.6 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगी.

एक अलग प्रेस वार्ता में और विस्तार से बताते हुए, खाद्य सचिव सुधांशु पांडे ने कहा, ‘‘यह उन लोगों का समर्थन करने के लिए एक सक्रिय उपाय है जो महामारी से उबर रहे हैं. अर्थव्यवस्था ठीक होने की स्थिति में है. लोग भी महामारी के झटके से उबर रहे हैं. आम गरीब लोगों को मदद देने का यह बहुत अच्छा निर्णय है.’’

यह पूछे जाने पर कि क्या यह निर्णय उत्तर प्रदेश सरकार की मदद के लिए किया गया है, जिसने नवंबर की शुरुआत में इस योजना को होली तक बढ़ाने की घोषणा की थी, सचिव ने कहा, ‘‘निर्णय एक राज्य के लिए नहीं किया गया है, यह पूरे देश के लिए है.’’

कोविड-19 महामारी के दौरान देशव्यापी लॉकडाउन के बीच गरीबों को राहत प्रदान करने के लिए यह योजना अप्रैल, 2020 में तीन महीने के लिए शुरू की गई थी. तब से इसे कई बार बढ़ाया जा चुका है.

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत सामान्य कोटे से अधिक पांच किलो खाद्यान्न उपलब्ध कराया जा रहा है. केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक के बाद सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा, ‘‘पीएमजीकेएवाई को मार्च, 2022 तक चार महीने के लिए बढ़ा दिया गया है.’’

पिछले साल देश में कोविड-19 महामारी के तेजी से फैलने कारण आर्थिक गतिविधियां प्रभावित होने के चलते सरकार ने मार्च, 2020 में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए) के करीब 80 करोड़ लाभार्थियों को मुफ्त अनाज वितरण करने की घोषणा की थी.

इस योजना के पहले चरण और दूसरे चरण को क्रमशः अप्रैल से जून, 2020 और जुलाई से नवंबर, 2020 तक चालू किया गया था. योजना का तीसरा चरण, मई से जून 2021 तक चालू था, जबकि योजना का चौथा चरण मौजूदा में जुलाई-नवंबर, 2021 के लिए चालू है.

एक सरकारी बयान में कहा गया है, ‘‘दिसंबर, 2021 से मार्च, 2022 तक पांचवे चरण के लिए खाद्य सब्सिडी की अतिरिक्त लागत 53,344.52 करोड़ रुपये होने का अनुमान है.’’ पीएमजीकेएवाई के तहत पांचवें चरण के लिए खाद्यान्न के स्तर पर कुल खपत लगभग 163 लाख टन होने की संभावना है.

अब तक पीएम-जीकेएवाई (पहले से चौथे चरण) के तहत, केंद्र ने राज्यों / केंद्रशासित प्रदेशों को लगभग 600 लाख टन खाद्यान्न आवंटित किया है, जो खाद्य सब्सिडी में लगभग 2.07 लाख करोड़ रुपये के बराबर है.

बयान में कहा गया है, ‘‘कुल मिलाकर, सरकार पीएमजीकेएवाई चरण एक से पांच में लगभग 2.60 लाख करोड़ रुपये खर्च करेगी.’’ अभी तक राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा 93.8 प्रतिशत खाद्यान्न का उठाव किया गया है.

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