सरकार ने आयुष चिकित्सा को लेकर भ्रामक प्रचार पर रोक लगाईः डॉक्टर कटोच

विश्व आयुर्वेद मिशन और आरोग्य भारती द्वारा "कोविड संक्रमणकाल में जीवनशैली" विषय पर आयोजित वेबिनार में कटोच ने रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए लोगों को आयुष काढ़े को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने का सुझाव भी दिया।

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प्रयागराज, 24 मई भारत सरकार के आयुष सलाहकार डॉक्टर डी.सी. कटोच ने कोरोना वायरस से बचाव के लिए आयुष मंत्रालय की नीतियों पर रविवार को चर्चा करते हुए कहा कि सरकार ने आयुष चिकित्सा संबंधी किसी भी भ्रामक प्रचार पर रोक लगाई है और किसी को भी भ्रामक सूचनाएं फैलाने से बचना चाहिए।

विश्व आयुर्वेद मिशन और आरोग्य भारती द्वारा "कोविड संक्रमणकाल में जीवनशैली" विषय पर आयोजित वेबिनार में कटोच ने रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए लोगों को आयुष काढ़े को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने का सुझाव भी दिया।

उन्होंने चार भाग तुलसी, दो भाग सोंठ, दो भाग दालचीनी और एक भाग काली मिर्च को बारीक पीसकर गुनगुने जल में आधा चम्मच की मात्रा में सेवन करने की सलाह दी।

विश्व आयुर्वेद मिशन के अध्यक्ष डॉ जी एस तोमर ने कहा, “इस संक्रमण काल में हमें अपनी जीवन शैली को बदलना होगा। स्वस्थ रहने के लिए आहार, आचार, औषधि एवं रोग से बचाव के उपाय पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।”

डॉ तोमर ने विशेष रूप से आहार पर जोर देते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को हितभुक यानी अपनी प्रकृति के अनुसार हितकर भोजन करना चाहिए और मितभुक अर्थात जितनी भूख हो उससे कम मात्रा में ही भोजन करना चाहिए। इसके साथ योग प्राणायम और कपालभाति का नित्य अभ्यास करते हुए लॉकडाउन में घर में ही टहलना चाहिए।

प्रोफेसर वाई के शर्मा ने बताया कि व्यक्ति की जीवनशैली उसकी आयु, शिक्षा, भौगोलिक स्थिति एवं आर्थिक स्थिति पर निर्भर करती है। लॉकडाउन में शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य के लिए व्यक्ति विभिन्न क्रियाओं जैसे बागवानी करना, संगीत सुनना, लेखन कार्य आदि में समय का सदुपयोग कर सकते हैं।

जामनगर आयुर्वेद विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर अनूप ठाकर ने स्वस्थ रहने के लिए आयुर्वेद में वर्णित तीन उपस्तम्भ की चर्चा करते हुए कहा कि पूरी नींद लेना महत्वपूर्ण है।

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