जरुरी जानकारी | वैश्विक गतिविधियां, कंपनियों के वित्तीय परिणाम, मुद्रास्फीति के आंकड़े देंगे बाजार को दिशा: विश्लेषक

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. कंपनियों के वित्तीय परिणाम, विदेशी निवेशकों का रुख और मुद्रास्फीति के आंकड़े इस सप्ताह शेयर बाजार की दिशा तय करेंगे। इसके अलावा, वैश्विक स्तर पर जारी संकट के बीच कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव पर भी बाजार की नजर रहेगी। विश्लेषकों ने यह कहा।

नयी दिल्ली, 13 अक्टूबर कंपनियों के वित्तीय परिणाम, विदेशी निवेशकों का रुख और मुद्रास्फीति के आंकड़े इस सप्ताह शेयर बाजार की दिशा तय करेंगे। इसके अलावा, वैश्विक स्तर पर जारी संकट के बीच कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव पर भी बाजार की नजर रहेगी। विश्लेषकों ने यह कहा।

रेलिगेयर ब्रोकिंग लि. के वरिष्ठ उपाध्यक्ष (शोध) अजीत मिश्रा ने कहा, ''आने वाले सप्ताह में बाजार की दिशा काफी हद तक कंपनियों के वित्तीय परिणाम पर निर्भर करेगी। इस दौरान रिलायंस इंडस्ट्रीज, इन्फोसिस, एचडीएफसी बैंक, एक्सिस बैंक और एचसीएल टेक्नोलॉजीज जैसी प्रमुख कंपनियां अपने परिणाम जारी करने वाली हैं।''

वृहद आर्थिक मोर्चे पर निवेशक सोमवार को जारी होने वाले सितंबर के सीपीआई (उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति) और डब्ल्यूपीआई (थोक मूल्य सूचकांक आधारित) मुद्रास्फीति के आंकड़ों पर नजर रखेंगे।

निवेशक वैश्विक स्तर पर जारी तनावों, विशेष रूप से कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी कोषों के रुख पर भी करीबी नजर रखेंगे।

मिश्रा ने कहा कि इस सप्ताह सीपीआई और डब्ल्यूपीआई मुद्रास्फीति सहित प्रमुख घरेलू आर्थिक आंकड़े भी जारी होने वाले हैं।

बीते सप्ताह, बीएसई सेंसेक्स 307.09 अंक यानी 0.37 प्रतिशत गिरकर 81,381.36 पर बंद हुआ। दूसरी ओर एनएसई निफ्टी 50.35 अंक यानी 0.20 प्रतिशत गिरकर 24,964.25 पर बंद हुआ।

उन्होंने कहा कि विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली के दबाव के कारण बीते सप्ताह की शुरुआत गिरावट के साथ हुई, लेकिन बाद के सत्रों में नुकसान को सीमित करने में मदद मिली।

इस सप्ताह बाजार में तीन आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) भी खुलेंगे। इनमें दो एसएमई खंड के हैं। हुंदै मोटर इंडिया का आईपीओ मंगलवार को खुलेगा और बृहस्पतिवार को बंद होगा। इस आईपीओ से 27,870 करोड़ रुपये जुटाने की योजना है।

जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज के शोध प्रमुख विनोद नायर ने कहा, ''विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) प्रोत्साहन उपायों और कम मूल्यांकन के कारण चीन के बाजारों का रुख कर रहे हैं। आरबीआई की नीति तटस्थ रही, क्योंकि रुख में बदलाव निकट भविष्य में दरों में कटौती की संभावना का संकेत नहीं देता है।''

विदेशी निवेशक अक्टूबर में शुद्ध विक्रेता बन गए और उन्होंने इस महीने अब तक 58,711 करोड़ रुपये की बिकवाली की।

इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष, कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल और चीनी बाजार के मजबूत प्रदर्शन के कारण भारतीय बाजारों में एफआईआई की बिकवाली हुई।

नायर ने कहा कि इस रुझान के चलते अल्पावधि में शेयर बाजार के प्रभावित होने का अनुमान है।

मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड के शोध प्रमुख सिद्धार्थ खेमका ने कहा कि इस सप्ताह भारत, चीन और ब्रिटेन अपनी मुद्रास्फीति के आंकड़े जारी करेंगे। उन्होंने कहा कि इसके अलावा यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ईसीबी) की ब्याज दर के फैसले, चीन की जीडीपी और अमेरिकी खुदरा बिक्री जैसे अंतरराष्ट्रीय कारक भी बाजार को प्रभावित कर सकते हैं।

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