नयी दिल्ली, 31 जुलाई भारतीय फुटबॉल खिलाड़ी संघ (एफपीएआई) शुक्रवार को तब विवाद में फंस गया जब उसने अपने अध्यक्ष रेनेडी सिंह की सहमित के बिना ईस्ट बंगाल क्लब को शीर्ष टीयर की इंडियन सुपर लीग (आईएसएल) में शामिल करने के लिये एआईएफएफ और आईएसएल आयोजक को पत्र लिख दिया।
अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (एआईएफएफ) के महासचिव कुशल दास और इंडियन सुपर लीग (आईएसएल) के आयोजक फुटबॉल स्पोर्ट्स डेवलपमेंट लिमिटेड (एफएसडीएल) को पत्र लिखकर संघ ने संबंधित शेयरधारकों से अनुरोध किया कि वे इस मामले का जल्दी हल निकालने के लिये अपने मतभेदों को अलग रखें।
एफपीएआई महासचिव साइरस फन्फेक्शनर ने पत्र में लिखा, ‘‘संघ में हम आपसे अनुरोध करते हैं कि ईस्ट बंगाल को बिना किसी हिचकिचाहट या विलंब के आईएसएल में शामिल कर लें। ’’
उन्होंने कहा, ‘‘इस क्लब का समृद्ध इतिहास है और यह सबसे पुराने और प्रमुख क्लबों में से एक है जिसके बहुत सारे प्रशंसक हैं जिसकी खेल को भारत में इसके विकास और इसे आगे बढ़ाने के लिये जरूरत है। ’’
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उन्होंने लिखा, ‘‘भारतीय फुटबॉल में सभी को अपने मतभेदों को दूर रखकर इस टीम को आईएसएल में शामिल करना चाहिए क्योंकि भारतीय फुटबॉल में इसके योगदान को अनदेखा नहीं किया जा सकता। ’’
पूर्व भारतीय मिडफील्डर रेनेडी सिंह ने इस संवेदनशील मामले में अपने जूनियर की प्रतिक्रया के बाद अपनी संस्था का रूख स्पष्ट किया कि उसका काम केवल खिलाड़ियों का समर्थन करना है, किसी क्लब का नहीं।
रेनेडी ने एआईएफएफ महासचिव को लिखे पत्र में कहा, ‘‘मैं सभी को सूचित करना चाहूंगा कि किसी एक विशेष क्लब के समर्थन में आना गलत है क्योंकि हम केवल खिलाड़ियों का ही समर्थन करते हैं। ’’
यह पूर्व खिलाड़ी राष्ट्रीय टीम का कप्तानी भी कर चुका है, उन्होंने कहा, ‘‘क्लबों को आईएसएल या किसी अन्य लीग में भागीदारी के संबंध में अपने अंदरूनी मामले महासंघ और एफएसडीएल से खुद ही सुलझाने चाहिए। ’’
एफएसडीएल ने कुछ दिन पहले क्लब प्रतिनिधियों की बैठक में स्पष्ट किया था कि वे 20201-21 सत्र में 10 टीमों के साथ ही खेलेंगे और नयी टीम के लिये टेंडर नहीं निकालेंगे।
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