देश की खबरें | विश्व मोटर स्पोर्ट मानचित्र में भारत को फिर जगह दिलाएगी फार्मूला ई

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. अगले साल भारत में फार्मूला ई की शुरुआत के साथ देश में मोटरस्पोर्ट की बड़ी प्रतियोगिता की वापसी होगी और इसकी फार्मूला वन कारों से ‘अनुचित’ तुलना अभी से शुरू हो चुकी है जो एक समय ग्रेटर नोएडा में आकर्षण का केंद्र होती थी।

नयी दिल्ली, 10 जुलाई अगले साल भारत में फार्मूला ई की शुरुआत के साथ देश में मोटरस्पोर्ट की बड़ी प्रतियोगिता की वापसी होगी और इसकी फार्मूला वन कारों से ‘अनुचित’ तुलना अभी से शुरू हो चुकी है जो एक समय ग्रेटर नोएडा में आकर्षण का केंद्र होती थी।

भारत में बुद्ध अंतरराष्ट्रीय सर्किट में तीन सत्र तक फार्मूला रेस के आयोजन के दौरान भारतीय मोटरस्पोर्ट महासंघ के अध्यक्ष रहे विक्की चंडोक ने मोटर स्पोर्ट की शीर्ष फार्मूला वन रेस और फार्मूला ई की तुलना की। फार्मूला ई इलेक्ट्रिक कारों की रेस है जिसने 2014 में पदार्पण के बाद काफी अच्छी प्रगति की है।

चंडोक ने पीटीआई को बताया, ‘‘दोनों कार में चार पहियों, स्टीयरिंग व्हील, ब्रेक पैडल और थ्रोटल के अलावा कुछ भी समान नहीं है। फार्मूला वन मोटर स्पोर्ट का शिखर है और इसके बाद फार्मूला टू और फार्मूला थ्री आते हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘फार्मूला वन कारें इंजन से चलती हैं और आप इसकी तुलना फार्मूला ई कार में इस्तेमाल होने वाली बिजली की मोटर से नहीं कर सकते। हालांकि भारत में फार्मूला ई का आना शानदार है क्योंकि इससे विश्व मोटरस्पोर्ट मानचित्र पर हमें दोबारा जगह मिलेगी।’’

गति, स्तर, बजट, लोकप्रियता के मामले में मोटरस्पोर्ट की वैश्विक संचालन संस्था फिया से मान्यता प्राप्त इन दो सीरीज की कोई तुलना नहीं है। फार्मूला वन रेस का आयोजन 72 साल से हो रहा है जबकि फार्मूला ई सिर्फ आठ साल पुरानी है।

अगले 10 से 15 साल में सड़कों पर इलेक्ट्रिक कार बड़ी संख्या में नजर आएंगी और ऐसे में फार्मूला ई रेस का आयोजन एक उद्देश्य के साथ हो रहा है जबकि फार्मूला वन प्रदर्शन का शिखर है।

फार्मूला वन कार 360 किमी प्रति घंटा से अधिक की रफ्तार पकड़ सकती है जबकि फार्मूला टू कार 320 किमी प्रति घंटा की रफ्तार छू सकती हैं।

फार्मूला ई कारों की अधिकतम गति 280 किमी प्रति घंटा है।

भारत में पहली फार्मूला ई रेस अगले साल 11 फरवरी को हैदराबाद में होगी जो फार्मूला ई कैलेंडर में न्यूयॉर्क, लंदन और रोम जैसे शहरों का साथ देगा।

फार्मूला ई के दर्शकों की संख्या पिछले सत्र में डेढ़ अरब से अधिक थी जबकि पिछले साल फार्मूल ई रेस को 31 करोड़ 60 लाख दर्शकों ने देखा। दुनिया भर में महामारी के प्रकोप से पहले 2018-19 सत्र में इस रेस को रिकॉर्ड 41 करोड़ 90 लाख दर्शकों ने देखा था।

बजट की बात करें तो फार्मूला वन टीम सत्र में 20 करोड़ डॉलर तक खर्च करतीं थी लेकिन बाद में खर्च की सीमा को 14 करोड़ 50 लाख डॉलर तक सीमित कर दिया गया।

इसके विपरीत फार्मूला ई टीम का पूरे सत्र में औसत खर्च लगभग एक करोड़ 50 लाख डॉलर होता है।

फार्मूला वन से क्या भारतीय मोटरस्पोर्ट में नई जान आएगी इस बारे में पूछने पर रेसर और प्रशासक के रूप में दशकों से भारतीय मोटरस्पोर्ट से जुड़े रहे चंडोक ने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि एक रेस से कोई बड़ा अंतर पैदा होगा।

उन्होंने कहा, ‘‘प्रतियोगिता के नजरिए से निश्चित तौर पर इससे देश में मोटरस्पोर्ट को लेकर जागरूकता बढ़ेगी लेकिन मुझे लगता है कि इससे अधिक असर नहीं होगा। इससे भारतीय मोटरस्पोर्ट को कोई बढ़ावा नहीं मिलेगा।’’

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