विदेश की खबरें | जलवायु परिवर्तन पर अधिक रचनात्मक बातचीत करने के पांच तरीके

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on world at LatestLY हिन्दी. लंदन, 23 फरवरी (द कन्वरसेशन) जलवायु परिवर्तन के बारे में बात करना कभी भी आसान नहीं होता। यह मुद्दा जटिल और परेशान करने वाला है। सकारात्मक खबरों की अपेक्षा नकारात्मक खबरें सुर्खियों में कहीं अधिक रहती हैं।

श्रीलंका के प्रधानमंत्री दिनेश गुणवर्धने

लंदन, 23 फरवरी (द कन्वरसेशन) जलवायु परिवर्तन के बारे में बात करना कभी भी आसान नहीं होता। यह मुद्दा जटिल और परेशान करने वाला है। सकारात्मक खबरों की अपेक्षा नकारात्मक खबरें सुर्खियों में कहीं अधिक रहती हैं।

सामाजिक मनोविज्ञान, समाजशास्त्र, पर्यावरण और मीडिया अध्ययनों के सिद्धांतों और शोध के व्यापक विश्लेषण पर आधारित तकनीक जलवायु कार्रवाई प्रतिबद्धता और नागरिक सशक्तीकरण का मार्ग प्रशस्त कर सकती हैं।

जलवायु संबंधी उपायों को इस तरह से संप्रेषित करने के पांच तरीके यहां दिए गए हैं, जिससे लोग इसमें शामिल रहें और सकारात्मक कार्रवाई करने के लिए प्रेरित हों।

1. लोगों को प्रतिनिधित्व दें

कनाडाई-अमेरिकी सामाजिक मनोवैज्ञानिक अल्बर्ट बंडुरा द्वारा 1974 में प्रकाशित मौलिक शोध के अनुसार, मनुष्य सही तरीके से नेतृत्व किए जाने पर भय पर काबू पा सकते हैं और खुशहाल, प्रेरित जीवन जी सकते हैं।

एक परिदृश्य में, एक व्यक्ति अपने हाथों में सांप पकड़े हुए था या उसे टोकरी में रख रहा था, जबकि डरा हुआ व्यक्ति यह देख रहा था। दूसरे परिदृश्य में, व्यक्ति को एक सांप पकड़ने की जिम्मेदारी दी गई थी।

बंडुरा ने पाया कि किसी सांप को हाथ में पकड़े व्यक्ति को देखने से, सशक्तीकरण की भावना में कोई खास सुधार नहीं होता।

हालांकि, वास्तव में डरावने प्राणी को संभालने से लोगों को अधिक सुरक्षित महसूस हुआ और उनके डर पर काबू पाने की अधिक संभावना थी। यह दृष्टिकोण लोगों में प्रतिनिधित्व की भावना को बढ़ाने के लिए जाना जाता है।

जलवायु संचार के संदर्भ में, हमें बड़ी चुनौतियों से निपटने के लिए मनोवैज्ञानिक रूप से तैयार रहने के वास्ते स्थिति के कम से कम छोटे हिस्से को नियंत्रित करने में सक्षम होना चाहिए।

2. समस्या का स्थानीयकरण करें

अपनी नई पुस्तक, ‘इफेक्टिव क्लाइमेट कम्युनिकेशन’ के लिए शोध करते समय, मैंने पाया कि कम संसाधनों वाले कई देश जलवायु परिवर्तन से संबंधित स्थानीय खबरों को प्रस्तुत करने में संघर्ष करते हैं।

जमीनी स्तर पर संवाददाताओं की कमी (उप-सहारा अफ्रीका, नाइजीरिया और दक्षिण अफ्रीका, दक्षिण अमेरिका और एशिया के देशों पर किए गए अध्ययन देखें) के कारण विकासशील देशों के कई मीडिया संस्थान वैश्विक तापमान वृद्धि के स्थानीय परिणामों को नजरअंदाज कर देते हैं।

लोग जब प्रतिकूल मौसम के लिए कम तैयार होंगे, तो वे अपनी सरकारों से बदलाव की मांग करने या मौसम-प्रतिरोधी फसलों और अन्य रोकथाम तकनीकों में निवेश करने में कम सशक्त होंगे।

3. खबरों को प्रासंगिक बनाएं

जब तक आपका नाम एलन मस्क, बिल गेट्स (माइक्रोसॉफ्ट के सह-संस्थापक) या उर्सुला वॉन डेर लेयेन (यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष) न हो, वैश्विक स्तर पर जलवायु परिवर्तन के प्रबंधन पर आपका सीधा नियंत्रण नहीं है।

"सामाजिक प्रमाण" सिद्धांत के अनुसार, यदि हम यह सुनिश्चित कर सकें कि कोई भी नया व्यवहार सामाजिक आदर्श है, तो हम बदलाव के लिए अधिक उत्सुक होंगे।

4. 'विनाश' से बचें

टीवी स्क्रीन पर दुनिया के अंत के बारे में रोमांचक फिल्में देखना एक तरह से पलायनवादी और अजीब तरह से सुखदायक अनुभव हो सकता है। लेकिन अनेक समाचार सूचनाओं और सोशल मीडिया पोस्टों के माध्यम से हमारे सामने प्रलय को घटते देखना उतना संतोषजनक नहीं है।

5. एक नया सामान्य नजरिया बनाये

मीडिया प्रकाशन में जलवायु परिवर्तन पर विशेष अनुभाग होना इस बात का संकेत है कि संगठन को इस समस्या की परवाह है। लेकिन क्या इस बात की संभावना है कि लोग इस पर क्लिक करके नकारात्मक खबरों की झड़ी लगा देंगे? फैशन से लेकर यात्रा तक की ज्यादातर खबरों में जलवायु संदर्भों को शामिल करने से हमारे जीवन के सभी पहलुओं की पृष्ठभूमि के रूप में जलवायु परिवर्तन को सामान्य बनाने में मदद मिलती है।

(द कन्वरसेशन)

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)

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