नडियाड (गुजरात), 30 नवंबर गुजरात के खेड़ा जिले में कथित तौर पर मिथाइल अल्कोहल युक्त आयुर्वेदिक सिरप पीने से कम से कम पांच लोगों की मौत हो गई। पुलिस ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।
खेड़ा के पुलिस अधीक्षक राजेश गढ़िया ने बताया कि इन लोगों की मौत 28 और 29 नवंबर को हुईं।
मिथाइल अल्कोहल एक जहरीला पदार्थ है। पुलिस इस मामले की जांच कर रही है।
पुलिस अधिकारी ने बताया कि खेड़ा जिले में नडियाड शहर के निकट बिलोदरा गांव में एक दुकानदार द्वारा ‘कालमेघसव- आसव अरिष्ट’ नामक आयुर्वेदिक सिरप लगभग 50 लोगों को बेचा गया था।
अधिकारियों के मुताबिक, शराब के आदी लोग कभी-कभी ऐसे औषधीय सिरप का दुरुपयोग करते हैं।
गौरतलब है कि गुजरात में शराबबंदी लागू है।
पुलिस अधीक्षक गढ़िया ने कहा, ‘‘पिछले दो दिन में सिरप पीने से पांच लोगों की मौत हो चुकी है और दो अन्य का अभी भी इलाज किया जा रहा है। हमने विस्तृत पूछताछ के लिए दुकानदार सहित तीन लोगों को हिरासत में लिया है।’’
उन्होंने कहा कि बिलोदरा और बगडू गांव में पांच लोगों की मौत की जानकारी मिलने पर पुलिस ने बुधवार दोपहर जांच शुरू की।
खेड़ा पुलिस ने एक विज्ञप्ति में बताया कि मितेश चौहान (27) बगडू गांव में अपनी बहन के घर पर रात में रुके थे और उन्होंने 28 नवंबर की सुबह चक्कर आने की शिकायत की।
विज्ञप्ति के अनुसार जब उनके जीजा अल्पेश सोढ़ा उन्हें अस्पताल ले जा रहे थे तो उनकी हालत बिगड़ गई और रास्ते में ही उनकी मौत हो गई।
इसमें कहा गया है कि जब चौहान का अंतिम संस्कार किया जा रहा था, तो सोढ़ा ने भी बेचैनी की शिकायत की और उन्हें महमदवाद के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया और बुधवार की शाम उनकी भी मौत हो गई।
गढ़िया ने कहा, ‘‘हमने पाया कि बिलोदरा गांव के तीन और व्यक्तियों की इसी तरह के लक्षण सामने आने के बाद 28 और 29 नवंबर को मौत हो गई थी। इनमें से चार के परिवारों ने पहले ही पुलिस को सूचित किए बिना अंतिम संस्कार कर दिया था। हमने सही कारण जानने के लिए नाटू सोढ़ा के परिवार को शव को पोस्टमार्टम के लिए सौंपने के लिए राजी कर लिया।’’
नाटू सोढ़ा के शव को पोस्टमार्टम के लिए नडियाड सिविल अस्पताल ले जाया गया।
अधिकारी ने बताया कि प्रारंभिक जांच से पता चला है कि सभी पांच लोगों की मौत कथित तौर पर ‘कालमेघासव’ पीने से हुई।
गढ़िया ने बताया कि दुकान के मालिक किशन सोढ़ा ने कथित तौर पर स्वीकार किया कि उसने पिछले एक सप्ताह में लगभग 50 लोगों को सिरप की बोतलों को बेचा था। उन्होंने बताया कि दुकानदार ने प्रति बोतल 100 रुपये में सिरप खरीद कर उसे प्रति बोतल 130 रुपये की दर से बेचा था।
उन्होंने कहा, ‘‘किशन के पिता सांकलभाई और बिलोदरा निवासी बलदेव सोढ़ा ने भी इस सिरप का सेवन किया था और दोनों का फिलहाल इलाज जारी है। सांकलभाई के खून की जांच में मिथाइल अल्कोहल पाये जाने की पुष्टि हुई और इसका अर्थ है कि सिरप में रसायन मिलाया गया था और यह जांच का विषय है कि इसे किस स्तर पर मिलाया गया।’’
अधिकारी ने बताया कि पुलिस ने किशन सोढ़ा, योगेश सिंधी और एक अन्य शख्स को हिरासत में लिया है। उन्होंने बताया कि किशन ने दावा किया कि उसने सिंधी से सिरप खरीदा था।
पुलिस अधीक्षक ने कहा, ‘‘हमें खाद्य एवं औषधि नियंत्रण प्रशासन (एफडीसीए) से पता चला कि इस सिरप को बेचने के लिए किसी लाइसेंस की आवश्यकता नहीं होती क्योंकि यह एक आयुर्वेदिक सिरप है। लेकिन इस तरह के सिरप बनाने के लिए लाइसेंस की आवश्यकता होती है। यह भी जांच का विषय है कि क्या सभी बोतलें खराब थीं, क्योंकि इसे पीने वाले 50 लोगों में से केवल पांच पर ही असर हुआ है।’’
एफडीसीए के आयुक्त एच. जी. कोशिया ने कहा कि ‘आसव’ और ‘अरिष्टम’ आयुर्वेदिक मिश्रण हैं जिनमें 12 प्रतिशत से कम स्व-निर्मित अल्कोहल होता है।
उन्होंने कहा, ‘‘क्योंकि गुजरात में (ऐसे सिरप का) उत्पादन भी प्रतिबंधित है, इसलिए इसे अन्य राज्यों से खरीदा जाता है और कभी-कभी इनमें अल्कोहल या मेथनॉल मिलाने के बाद इन्हें बेचा जाता है। हमने पहले भी ऐसी गड़बड़ियां पकड़ी हैं। योगेश सिंधी ने पहले इस सिरप की विनिर्माण इकाई शुरू करने के लिए एफडीसीए से अनुमति मांगी थी। लेकिन हमने उसका रिकॉर्ड जांचने के बाद उसे अनुमति देने से इनकार कर दिया था।’’
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