देश की खबरें | मॉनसून से पहले कूनो राष्ट्रीय उद्यान में पांच और चीते स्वच्छंद विचरण के लिए छोड़े जाएंगे
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नयी दिल्ली, आठ मई केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने सोमवार को कहा कि जून में मॉनसून की शुरुआत से पहले मध्य प्रदेश के कूनो राष्ट्रीय उद्यान (केएनपी) में अनुकूलन शिविरों से पांच और चीतों को स्वच्छंद विचरण के लिए छोड़ा जाएगा। इनमें तीन मादा और दो नर चीते हैं।
इसने यह भी कहा कि चीतों को केएनपी से बाहर जाने दिया जाएगा और उन्हें ‘‘तब तक आवश्यक रूप से वापस नहीं लाया जाएगा, जब तक कि वे उन क्षेत्रों में प्रवेश न करें, जहां उन्हें खतरा हो।’’
नामीबिया से लाए गए आठ चीतों में से अब तक चार को केएनपी में अनुकूलन शिविरों से मुक्त-परिस्थितियों में छोड़ा गया है।
मंत्रालय ने एक बयान में कहा, "जून में मॉनसून की बारिश शुरू होने से पहले पांच और चीतों (तीन मादा और दो नर) को अनुकूलन शिविरों से केएनपी में स्वच्छंद विचरण की स्थिति में छोड़ा जाएगा।"
इसने कहा कि राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) के निर्देश पर विशेषज्ञों की एक टीम ने ‘प्रोजेक्ट चीता’ की वर्तमान स्थिति की समीक्षा के बाद यह निर्णय लिया।
विशेषज्ञ टीम ने कहा कि सभी चीते अच्छी शारीरिक स्थिति में हैं, वे नियमित अंतराल पर शिकार करते हैं और प्राकृतिक व्यवहार प्रदर्शित करते हैं।
बयान के अनुसार, निगरानी दलों द्वारा चीतों को उनकी व्यावहारिक विशेषताओं और पहुंच क्षमता के आधार पर मुक्त विचरण के लिए चुना गया है।
शेष चीते मॉनसून की अवधि के दौरान अनुकूलन शिविरों में रहेंगे।
मंत्रालय ने कहा, "इन चीतों को अधिक जगह का उपयोग करने और नर एवं मादा के बीच संपर्क होने देने के लिए कुछ आंतरिक द्वार खुले रहेंगे।"
इसने कहा कि मॉनसून के मौसम के बाद स्थिति की समीक्षा की जाएगी और बड़ी आबादी स्थापित करने के लिए चीता संरक्षण कार्य योजना के अनुसार केएनपी या आसपास के क्षेत्रों में योजनाबद्ध तरीके से चीते छोड़े जाएंगे।
बयान के अनुसार, स्वच्छंद विचरण के लिए पहले ही छोड़े जा चुके चार चीतों में से दो नर चीते (गौरव और शौर्य) उद्यान के भीतर ही रुके हुए हैं और उन्होंने इसकी सीमाओं से परे भू-क्षेत्र की खोज में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई है।
आशा नाम की एक मादा चीता ने बफर जोन से परे केएनपी के पूर्व में दो खोजपूर्ण भ्रमण किए हैं, लेकिन वह व्यापक कूनो भू-दृश्य के भीतर बनी हुई है और मानव-वर्चस्व वाले क्षेत्रों में नहीं गई है।
नर चीता पवन अपने दूसरे भ्रमण के दौरान उत्तर प्रदेश की सीमा के पास खेत में जाने के लिए दो अवसरों पर उद्यान की सीमाओं से परे क्षेत्र में पहुंचा, जिसे केएनपी में एक अनुकूलन शिविर में लौटा दिया गया।
महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले साल 17 सितंबर को अपने 72वें जन्मदिन पर मध्य प्रदेश के कूनो में नामीबिया से लाए गए आठ चीतों के पहले जत्थे को एक पृथक बाड़े में छोड़ा था। इन चीतों में पांच मादा और तीन नर थे।
इस तरह के दूसरे कार्यक्रम में, 12 चीतों को दक्षिण अफ्रीका से लाया गया था और 18 फरवरी को कूनो में छोड़ा गया था।
नामीबियाई चीतों में शामिल साशा नामक चीते की मार्च में गुर्दे से संबंधित बीमारी के कारण मृत्यु हो गई थी। वहीं, दक्षिण अफ्रीका से लाए गए चीता उदय की 13 अप्रैल को मौत हो गई।
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