ताजा खबरें | हंगामे की भेंट चढ़ा संसद में मानसून सत्र का पहला सप्ताह : तृणमूल सांसद सेन निलंबित

Get latest articles and stories on Latest News at LatestLY. मानसून सत्र के पहले सप्ताह, संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही विपक्ष द्वारा तीन नये केंद्रीय कृषि कानूनों, पेगासस जासूसी मामला सहित विभिन्न मुद्दों पर किए गये हंगामे की भेंट चढ़ गयी तथा शुक्रवार को तृणमूल कांग्रेस के एक राज्यसभा सदस्य को शेष सत्र के लिए सदन से निलंबित कर दिया गया।

नयी दिल्ली, 23 जुलाई मानसून सत्र के पहले सप्ताह, संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही विपक्ष द्वारा तीन नये केंद्रीय कृषि कानूनों, पेगासस जासूसी मामला सहित विभिन्न मुद्दों पर किए गये हंगामे की भेंट चढ़ गयी तथा शुक्रवार को तृणमूल कांग्रेस के एक राज्यसभा सदस्य को शेष सत्र के लिए सदन से निलंबित कर दिया गया।

पूरे सप्ताह के दौरान सिर्फ मंगलवार को उच्च सदन में उस समय चार घंटे सामान्य ढंग से कामकाज हो पाया जब कोविड-19 के कारण देश में उपजे हालात को लेकर, सभी दलों के बीच आपस में बनी सहमति के आधार पर चर्चा की गयी।

शुक्रवार को विपक्ष के हंगामे के कारण लोकसभा एक बार के स्थगन और राज्यसभा तीन बार के स्थगन के बाद पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी गयी। दोनों सदनों में आज भी प्रश्नकाल और शून्यकाल नहीं हो सका तथा शुक्रवार को होने वाला गैर सरकारी कामकाज भी हंगामे की भेंट चढ़ गया।

राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू ने उच्च सदन में लगातार हो रहे हंगामे और व्यवधान पर क्षोभ प्रकट करते हुए, सूचना प्रौद्योगिकी और संचार मंत्री अश्विनी वैष्णव के हाथों से एक विपक्षी सदस्य द्वारा बयान की प्रति छीन उसके टुकड़े हवा में लहराने की घटना को ‘‘संसदीय लोकतंत्र पर हमला’’ करार दिया।

उन्होंने कहा कि कोविड महामारी की विभीषिका के बीच यह सत्र आयोजित हुआ है और जनता से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा की जानी है। उन्होंने सदस्यों के सामने कई सवाल भी उठाए ओर उनसे इर पर चिंतन करने को कहा।

सभापति ने बृहस्पतिवार को सदन में हुए हंगामे और इस दौरान तृणमूल कांग्रेस के सदस्य शांतनु सेन सहित अन्य विपक्षी नेताओं के आचरण का जिक्र किया और इसे अशोभनीय बताया। सभापति ने कहा कि कल जो कुछ हुआ, निश्चित रूप से उससे सदन की गरिमा प्रभावित हुई। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं से विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र की गरिमा ही प्रभावित होती है।

नायडू ने कहा कि उन्होंने पहले भी इस बात पर जोर दिया है कि संसद राजनीतिक संस्थाओं से बहुत बड़ी है क्योंकि उसके पास संवैधानिक अधिकार हैं। उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन ऐसा लगता है कि संसद की गरिमा और संविधान के प्रति नाम मात्र का सम्मान है। यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है।’’

राज्यसभा के सभापति ने कहा कि जब देश आजादी के 75वें साल में प्रवेश कर रहा है तो ऐसे समय में सदन की कार्यवाही में व्यवधान अच्छा संदेश नहीं देता। उन्होंने सदस्यों से आग्रह किया कि वह सदन की गरिमा धूमिल न होने दें। उन्होंने सदस्यों को याद दिलाया कि वे संसदीय लोकतंत्र के संरक्षक हैं और उन्हें अपने-अपने राज्यों के और वहां की जनता के मुद्दे उठाने चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘सदन में व्यवधान न्याय का कोई तरीका नहीं है।’’

उच्च सदन में तृणमूल सदस्य शांतनु सेन को कल सदन में उनके अशोभनीय आचरण के लिए राज्यसभा के मौजूदा सत्र की शेष अवधि के लिए आज निलंबित कर दिया गया। इस संबंध में संसदीय कार्य राज्य मंत्री वी मुरलीधरन ने प्रस्ताव किया जिसे धवनि मत से पारित कर दिया गया।

गौरतलब है कि सेन ने बृहस्पतिवार को केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव के हाथों से ‘‘पैगासस विवाद’’ पर दिए जा रहे उनके बयान की प्रति छीन ली थी और उसके टुकड़े कर हवा में उछाल दिए थे।

सेन को शेष सत्र के लिए निलंबित करने की सभापति की घोषणा का विरोध करते हुए तृणमूल कांग्रेस के सदस्यों ने हंगामा किया। तृणमूल सदस्य शुखेंदु शेखर रॉय ने कहा कि मुरलीधरन ने अचानक से सेन के निलंबन का प्रस्ताव पेश कर दिया लेकिन सदन में आज की कार्यसूची में इसका कोई उल्लेख नहीं था।

सभापति ने उनकी आपत्ति को खारिज कर दिया।

कांग्रेस के सदस्य जयराम रमेश भी इस मुद्दे पर कुछ बोल रहे थे लेकिन हंगामे की वजह से उनकी बात नहीं सुनी जा सकी।

उच्च सदन में आज विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने पेगासस जासूसी विवाद का मुद्दा उठाना चाहा और कहा कि उन्होंने नेताओं, उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों, पत्रकारों और अन्य लोगों की जासूसी संबंधी आरोपों के बारे में एक नोटिस दिया है। पीठासीन अध्यक्ष भुवनेश्वर कालिता ने कहा कि इस बारे में सरकार की तरफ से पहले ही बयान दिया जा चुका है।

इसी बीच, राज्यसभा में उपनेता मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि इस मुद्दे को उठाया जा चुका है ओर इस पर सूचना प्रौद्योगिकी और संचार मंत्री का बयान आ चुका है। उन्होंने कहा, ‘‘इस दौरान किस तरह का व्यवहार विपक्ष के कुछ लोगों ने उनके साथ किया था, यह देश ने देखा है। नकवी बोल ही रहे थे कि कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस सहित कुछ अन्य विपक्षी दलों ने हंगामा प्रारंभ कर दिया।

इसके तुरंत बाद ही कालिता ने सदन की कार्यवाही दिन भर के लिए स्थगित कर दी।

लोकसभा में सुबह सदन की कार्यवाही आरंभ होने पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने ओलंपिक खेलों के लिए भारतीय खिलाड़ियों को शुभकामनाएं दीं और प्रश्नकाल शुरू कराया। इसके बाद कुछ विपक्षी सदस्य नारेबाजी करते हुए अध्यक्ष के आसन के निकट पहुंच गए। कुछ सदस्यों के हाथों में तख्तियां थी जिन पर पेगासस मामले की उच्चतम न्यायालय की निगरानी में न्यायिक जांच की मांग के बारे में लिखा हुआ था।

सदन में हंगामे के बीच ही स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया और पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने अपने अपने मंत्रालयों से संबंधित पूरक प्रश्नों के उत्तर दिए। बिरला ने नारेबाजी कर रहे विपक्षी सदस्यों से अपने स्थान पर जाने और कोविड दिशानिर्देशों का पालन करने की अपील की।

उन्होंने कहा, ‘‘कोविड संक्रमण और टीकाकरण की स्थिति पर बात हो रही है। आप लोगों ने मास्क नहीं लगा रखे हैं। कोरोना संक्रमण खत्म नहीं हुआ है। आप जन प्रतिनिधि हैं। अगर आप खुद संक्रमण फैलाएंगे तो फिर क्या संदेश जाएगा।’’

लोकसभा अध्यक्ष ने कहा, ‘‘कोविड दिशानिर्देशों का पालन करिए। आप मास्क निकालकर नारेबाजी कर रहे हैं और तख्तियां दिखा रहे हैं, यह उचित नहीं है। आप लोग अपनी सीट पर जाइए, आपको चर्चा करने का मौका दूंगा।’’

हंगामा नहीं थमने पर उन्होंने करीब 11.15 बजे सदन की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी।

निचले सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर स्थिति ज्यों की त्यों बनी रही। शोर-शराबे के बीच ही पीठासीन सभापति किरीट सोलंकी ने आवश्यक कागजात सभापटल पर रखवाये।

इस दौरान विपक्षी सदस्य अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी करते रहे। पीठासीन सभापति सोलंकी ने सदस्यों से अपने स्थान पर लौटने और कार्यवाही चलने देने का आग्रह किया। हालांकि सदस्यों का शोर-शराबा जारी रहा।

व्यवस्था बनती नहीं देख पीठासीन सभापति ने सदन की कार्यवाही करीब सवा 12 बजे दिन भर के लिये स्थगित कर दी। शनिवार और रविवार को अवकाश होने के कारण दोनों सदनों की अगली बैठक अब सोमवार, 26 जुलाई को पूर्वाह्न 11 बजे शुरू होगी।

माधव दीपक

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