देश की खबरें | प्राकृतिक आपदा में मृत्यु के मामले में वित्तीय सहायता 24 घंटे में जारी की जाएगी: आदेश

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. हिमाचल प्रदेश में प्राकृतिक आपदा के कारण मृत्यु होने की दशा में मृतक के परिजन को 24 घंटे के भीतर 25,000 रुपये की सहायता दी जाएगी। यह बात शनिवार को जारी एक आधिकारिक आदेश में कही गई।

शिमला, सात जनवरी हिमाचल प्रदेश में प्राकृतिक आपदा के कारण मृत्यु होने की दशा में मृतक के परिजन को 24 घंटे के भीतर 25,000 रुपये की सहायता दी जाएगी। यह बात शनिवार को जारी एक आधिकारिक आदेश में कही गई।

निदेशक-सह-विशेष सचिव (राजस्व) सुदेश के. मोख्ता ने कहा कि परिवार के सदस्यों की दिक्कतों को भांपते हुए यह कदम उठाया गया है, जिन्हें अनुग्रह राशि जारी कराने के लिए दर-दर भटकना पड़ता है।

हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा जारी एक बयान में कहा गया है, "... प्राकृतिक आपदा के कारण मृत्यु होने के मामले में राहत नियमावली में अधिसूचित न्यूनतम 25,000 रुपये और गंभीर चोट के मामले में 5,000 रुपये अब तुरंत जारी किए जाएंगे।’’

मोख्ता ने कहा कि नियमों के अनुसार, मृत्यु के मामले में 4 लाख रुपये की राशि प्रदान की जाती है, भले ही निवास स्थान और राष्ट्रीयता कुछ भी हो, बशर्ते मृत्यु राज्य के भीतर हुई हो। उन्होंने कहा कि हालांकि, शोक संतप्त परिवार के सदस्यों को 24 घंटे के भीतर 25,000 रुपये जारी किए जाएंगे और शेष राशि चार दिनों के भीतर जारी की जाएगी।

इस बीच, बारिश और हिमपात में देरी के कारण पहाड़ी राज्य में सूखे जैसी स्थिति से उत्पन्न होने वाली किसी भी घटना से निपटने के लिए जिला-स्तरीय बागवानी कार्यालयों को एक करोड़ रुपये की धनराशि वितरित की गई।

बागवानी विभाग के एक प्रवक्ता ने यहां कहा, ‘‘विभाग स्थिति पर बारीकी से नजर रख रहा है और इस राशि का उपयोग किसानों और बागवानी करने वालों को पौधे, पानी की टंकी, पाइप, दवाओं जैसी आवश्यक सामग्री की सहायता प्रदान करने के लिए किया जाएगा।’’

उन्होंने कहा कि बागवानी करने वालों को बारिश तक फल देने वाले पेड़ों की कटाई और छंटाई बंद करने की सलाह दी जाती है ताकि आगे होने वाले नुकसान से बचा जा सके।

प्रवक्ता ने कहा कि छोटे खेतों में बागवानी करने वालों को यह भी सलाह दी गई है कि वे अपने खेतों के बीच में उचित दूरी पर फलदार पौधे लगाएं और ढलान अंदर रखें ताकि बारिश के पानी का सही इस्तेमाल हो सके और मिट्टी का कटाव कम हो सके।

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